Lord Shiva Facts: भगवान शिव को भी झेलने पड़े थे ये 3 भयंकर श्राप, जानें महादेव से जुड़े ये पौराणिक रहस्य

Lord Shiva Facts: भगवान शिव ही सब कुछ हैं, वही सृष्टि के आदि और अंत हैं. लेकिन उनके ही एक स्वरूप महादेव को कई श्रापों का सामना करना पड़ा था. एक श्राप के कारण ही उन्हें अपने पुत्र गणेश का सिर काटना पड़ा था. तो आइए जानते हैं कि भगवान शिव के सभी श्रापों के बारे में.

Advertisement
भगवान शिव के अद्भुत रहस्य (Photo: ITG) भगवान शिव के अद्भुत रहस्य (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 7:55 AM IST

Lord Shiva Facts: शिव ही आदि हैं, शिव ही अंत हैं. महादेव भी शिव का ही एक रूप हैं और इस संपूर्ण सृष्टि में जो कुछ भी है, वह शिवमय ही है. लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि स्वयं भगवान शिव ने भी कभी अपने आपको सृष्टि के नियमों से ऊपर नहीं रखा है. यही कारण है कि उनके एक स्वरूप, महादेव को भी श्रापों का सामना करना पड़ा था. अगर हम हिंदू पुराणों को ध्यान से देखें, तो एक बात स्पष्ट दिखाई देती है कि हर बड़ी घटना किसी न किसी वरदान या श्राप से जुड़ी हुई है. तो आइए जानते हैं कि भगवान शिव को किन-किन श्रापों का सामना करना पड़ा.

Advertisement

दक्ष प्रजापति का श्राप

दक्ष प्रजापति, ब्रह्मा जी के मानस पुत्रों में से एक थे. उन्हें सृष्टि विस्तार का कार्य सौंपा गया था. ब्रह्मा जी ने उन्हें शिव और शक्ति के मिलन का दायित्व भी दिया. तपस्या के बाद माता शक्ति ने वचन दिया कि वे उनकी पुत्री के रूप में जन्म लेकर शिव से विवाह करेंगी.

समय बीता और शक्ति ने सती के रूप में जन्म लिया. लेकिन दक्ष को शिव पसंद नहीं थे. इसके पीछे कई कथाएं मिलती हैं, लेकिन सबसे प्रचलित कथा यह है कि एक यज्ञ में जब दक्ष पहुंचे, तो सभी देवता उनके सम्मान में खड़े हो गए, लेकिन भगवान शिव बैठे ही रहे. इसे दक्ष ने अपना अपमान समझा था. क्रोधित होकर दक्ष ने शिव को श्राप दिया कि उन्हें यज्ञों में देवताओं के समान भाग नहीं मिलेगा और उनकी पूजा भी नहीं होगी. भोलेनाथ ने बिना विरोध किए इस श्राप को स्वीकार कर लिया था.

Advertisement

ऋषि कश्यप का श्राप

एक अन्य कथा के अनुसार, भगवान शिव के दो भक्त, माली और सुमाली, का सूर्यदेव से युद्ध हो गया था. अपने भक्तों की रक्षा के लिए भगवान शिव ने सूर्यदेव पर त्रिशूल से प्रहार कर दिया था, जिससे वे अचेत होकर गिर पड़े. यह देखकर सूर्यदेव के पिता, ऋषि कश्यप, अत्यंत दुखी हुए और उन्होंने शिव को श्राप दिया कि, "जैसे आज मेरे पुत्र की यह अवस्था हुई है, वैसे ही एक दिन तुम्हें भी अपने पुत्र का मस्तक काटना पड़ेगा." बाद में यही श्राप सत्य हुआ, जब भगवान शिव ने गणेश जी का सिर काट दिया और फिर उन्हें हाथी का मस्तक लगाकर पुनर्जीवित किया था.

माता पार्वती का श्राप

एक रोचक कथा जुए (धूत) से जुड़ी है. कहा जाता है कि एक बार भगवान शिव और माता पार्वती के बीच जुए का खेल हुआ, जिसमें भगवान शिव सब कुछ हार गए और गंगा तट पर चले गए थे. जब यह बात माता पार्वती को पता चली, तो उन्होंने गणेश जी को शिव को वापस लाने के लिए भेजा. आगे घटनाएं ऐसी हुईं कि भगवान विष्णु ने पासे का रूप धारण किया और शिव को जीत दिलाने लगे. जब यह चाल माता पार्वती को पता चली, तो वे क्रोधित हो गईं. माता पार्वती ने गुस्से में कई श्राप दे दिए जैसे शिव जी को गंगा को अपने मस्तक पर धारण करने का श्राप, नारद जी को कभी एक स्थान पर स्थिर न रहने का श्राप, विष्णु जी को रावण के रूप में शत्रु मिलने का श्राप और कार्तिकेय को सदा बाल रूप में रहने का श्राप दिया था.

Advertisement

श्राप का अर्थ और प्रभाव

पुराणों के अनुसार, श्राप केवल दंड नहीं होता है, बल्कि कर्मों का परिणाम होता है. जब किसी व्यक्ति को अपने कर्मों का कारण समझ नहीं आता, तो वह उसे श्राप मानता है. कई बार ये श्राप सीमित समय के लिए होते हैं, तो कभी-कभी कई जन्मों तक प्रभाव डालते हैं. लेकिन एक सत्य यह भी है कि भगवान शिव स्वयं हर प्रकार के श्राप और कष्टों का निवारण करने में सक्षम हैं.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »