Guru Gochar 2026 In Cancer: ज्योतिष शास्त्र में देवगुरु कहे जाने वाले बृहस्पति ग्रह का गोचर हमेशा से एक बड़ी खगोलीय और ज्योतिषीय घटना माना जाता है. ज्ञान, भाग्य, संतान, विवाह और समृद्धि के कारक गुरु बृहस्पति आगामी 2 जून 2026 को मिथुन राशि से निकलकर अपनी उच्च राशि कर्क (Cancer) में प्रवेश करने जा रहे हैं.
इस बार का यह गोचर बेहद खास और दुर्लभ है. आमतौर पर गुरु एक राशि में लगभग 13 महीने का समय लेते हैं, लेकिन इस समय वे अतिचारी (सामान्य से कई गुना तेज गति) चाल चल रहे हैं. इस तीव्र गति के कारण गुरु साल 2026 में तीन राशियों का सफर तय करेंगे. कर्क राशि में गुरु के आते ही केंद्र में हंस पंचमहापुरुष राजयोग का निर्माण होगा. कर्क राशि कालपुरुष की कुंडली का चौथा भाव (सुख, भावना और आंतरिक शांति) है, और चूंकि गुरु व कर्क दोनों का स्वभाव पोषण और संरक्षण का है, इसलिए यह गोचर वैश्विक स्तर के साथ-साथ सभी 12 राशियों के जीवन में व्यापक बदलाव लाएगा.
आइए जानते हैं चंद्र राशि (Moon Sign) के आधार पर मेष से लेकर मीन राशि तक पर इस गोचर का क्या शुभ-अशुभ असर होने वाला है और गुरु को मजबूत करने के अचूक उपाय क्या हैं.
1. मेष राशि (Aries)
मेष राशि के जातकों के लिए गुरु का गोचर कुंडली के चौथे (सुख) भाव में उच्च का होकर होगा.
प्रभाव: यह समय आपके लिए बेहद भाग्यशाली रहने वाला है. रियल एस्टेट, प्रॉपर्टी या नए वाहन के सुख में वृद्धि होगी. करियर में मनचाही पदोन्नति (Promotion) और वेतन वृद्धि के मजबूत योग हैं.
2. वृषभ राशि (Taurus)
आपकी गोचर कुंडली के तीसरे (पराक्रम) भाव में देवगुरु का गोचर होने जा रहा है.
प्रभाव: आपकी आय के स्रोतों में अचानक बढ़ोतरी देखने को मिलेगी. इस दौरान आपका रुझान भौतिक सुखों से हटकर अध्यात्म की ओर अधिक होगा.
3. मिथुन राशि (Gemini)
बृहस्पति आपकी राशि से निकलकर आपके दूसरे (धन व वाणी) भाव में प्रवेश करेंगे.
प्रभाव: आर्थिक मोर्चे पर यह गोचर आपके लिए वरदान साबित हो सकता है. नौकरीपेशा जातकों को कार्यक्षेत्र में नए और बड़े अवसर मिलेंगे.
4. कर्क राशि (Cancer)
कर्क राशि के जातकों के लिए गुरु का यह गोचर उनके लग्न यानी पहले भाव में ही होने जा रहा है, जहाँ गुरु उच्च के होते हैं.
प्रभाव: लग्न में गुरु का आना आपके ज्ञान और व्यक्तित्व में निखार लाएगा. हालांकि, अतिचारी गति के कारण आपको शुरुआत में कुछ मानसिक चुनौतियों या जिम्मेदारियों के बोझ का सामना करना पड़ सकता है.
5. सिंह राशि (Leo)
सिंह राशि के जातकों की गोचर कुंडली के बारहवें (व्यय व विदेश) भाव में बृहस्पति का संचरण होगा.
प्रभाव: घर में सुख-शांति बनी रहेगी, लेकिन धार्मिक कार्यों और सुख-सुविधाओं पर खर्च काफी बढ़ सकता है. बजट का ध्यान रखना जरूरी होगा.
6. कन्या राशि (Virgo)
कन्या राशि के जातकों के लिए गुरु का गोचर ग्यारहवें (लाभ) भाव में होने जा रहा है.
प्रभाव: यह समय आपके लिए चौतरफा लाभ लेकर आने वाला है. व्यापार में भारी मुनाफा होगा, नए व्यावसायिक संबंध स्थापित होंगे.
7. तुला राशि (Libra)
आपकी गोचर कुंडली के दसवें (कर्म) भाव में गुरु बृहस्पति का आगमन होने जा रहा है.
प्रभाव: कार्यक्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही परेशानियां और राजनीति समाप्त होगी. आपकी आर्थिक स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत होने वाली है.
8. वृश्चिक राशि (Scorpio)
वृश्चिक राशि के जातकों की गोचर कुंडली के नौवें (भाग्य) भाव में गुरु का यह गोचर होगा.
प्रभाव: भाग्य भाव में उच्च के गुरु का होना आपके बंद पड़े भाग्य के ताले को खोल सकता है. आपको सही समय पर सही मार्गदर्शक और सहयोगी मिलेंगे.
9. धनु राशि (Sagittarius)
धनु राशि के जातकों के लिए गुरु का गोचर कुंडली के आठवें (आयु व शोध) भाव में होने जा रहा है.
प्रभाव: आठवें भाव का गुरु जातक को गहरा आध्यात्मिक ज्ञान और साधना की ओर ले जाता है. परोपकार के कार्यों में आपकी रुचि बढ़ेगी.
10. मकर राशि (Capricorn)
मकर राशि के जातकों के सातवें (विवाह व साझेदारी) भाव में देवगुरु का गोचर होने वाला है.
प्रभाव: यदि आपके वैवाहिक जीवन में तनाव चल रहा था, तो अब वहां खुशियां और आपसी तालमेल वापस लौट आएगा.
11. कुंभ राशि (Aquarius)
कुंभ राशि के जातकों के लिए गुरु का गोचर छठे (रोग, ऋण, शत्रु) भाव में होने जा रहा है.
प्रभाव: छठे भाव का गुरु आपको कोर्ट-कचहरी के मामलों या पुरानी देनदारियों से मुक्ति दिला सकता है.प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों और नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को सफलता मिलेगी.
12. मीन राशि (Pisces)
मीन राशि के जातकों के लिए गुरु का गोचर पांचवें (संतान, बुद्धि, शिक्षा) भाव में उच्च का होकर होगा.
प्रभाव: मीन राशि के जातकों के लिए यह गोचर अत्यंत शुभ और फलदायी सिद्ध होने वाला है.आपकी निर्णय क्षमता और बुद्धि का विकास होगा.
देवगुरु बृहस्पति को बलवान बनाने के 3 महाउपाय
यदि आपकी कुंडली में गुरु कमजोर स्थिति में हैं या गोचर के दौरान आपको नकारात्मक प्रभाव मिल रहे हैं, तो ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ये तीन उपाय अवश्य करें.
विष्णु सहस्रनाम का पाठ: नियमित रूप से या हर गुरुवार को भगवान विष्णु के विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से गुरु जनित सभी दोष दूर होते हैं और जीवन में स्थिरता आती है.
पलाश के फूल का चमत्कारिक प्रयोग: पलाश के फूलों का उपयोग गुरु को शांत और प्रसन्न करने के लिए अचूक माना गया है.पलाश के फूल को लाल कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी में रखने से धन की आवक बढ़ती है और पैसा स्थिर रहता है.वहीं, इसे पीले कपड़े में बांधकर पास रखने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में लाभ होता है.
रुद्राक्ष धारण करना: ग्रहों की शांति के लिए सही रुद्राक्ष पहनना बेहद प्रभावी होता है.गुरु ग्रह को बल देने के लिए पांच मुखी या दस मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए.इसके अलावा, चूंकि गुरु कर्क (चंद्रमा की राशि) में जा रहे हैं, इसलिए मानसिक शांति के लिए दो मुखी या गौरी-शंकर रुद्राक्ष धारण करना भी अत्यंत शुभ रहेगा।
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