Chanakya Niti: श्मशान ही नहीं, इन 3 जगहों को छोड़ते समय पीछे मुड़कर देखना है मना, छा सकती है कंगाली!

Chanakya Niti: क्या आप जानते हैं कि कुछ जगहों से लौटते वक्त पीछे मुड़कर देखना आपकी जिंदगी में कंगाली और भारी संकट ला सकता है? आइए चाणक्य नीति से जानते हैं उन विशेष जगहों के बारे में.

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चाणक्य नीति (Photo: ITG) चाणक्य नीति (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 जून 2026,
  • अपडेटेड 8:00 PM IST

Chanakya Niti: चाणक्य नीति प्राचीन भारत के महान आचार्य चाणक्य द्वारा लिखे गए विचारों और सिद्धांतों का संग्रह है. इसे नीतिशास्त्र भी कहा जाता है, जिसमें जीवन को सही दिशा देने वाली व्यवहारिक सीख दी गई है. इसमें व्यक्ति के व्यवहार, सफलता, संबंध, धन, राजनीति और जीवन प्रबंधन से जुड़ी गहरी बातें बताई गई हैं. वहीं, चाणक्य नीति का इस बात का भी जिक्र मिलता है, जहां से अपना काम पूरा करके लौटने के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए. ऐसा माना जाता है कि इन जगहों पर पीछे देखने से नकारात्मक ऊर्जा आपके साथ आ सकती है या आपके काम में बाधा आ सकती है. आइए जानते हैं उन स्थानों के बारे में.

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श्मशान घाट या अंतिम संस्कार से लौटते समय

यह नियम सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है. जब कोई व्यक्ति किसी के अंतिम संस्कार से लौटता है, तो उसे सीधे अपने घर की तरफ बढ़ना चाहिए. भूलकर भी पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए. दरअसल, श्मशान भूमि पर भारी मात्रा में नकारात्मक ऊर्जा और शोक का माहौल होता है. पीछे मुड़कर देखना मोह या उस नकारात्मकता को वापस अपनी ओर आकर्षित करने का प्रतीक माना जाता है.

किसी को उधार या मदद देकर लौटने के बाद

चाणक्य नीति के अनुसार, यदि आपने किसी जरूरतमंद की पैसों की मदद की है या किसी को उधार दिया है, तो वहां से निकलते समय बार-बार पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए. पीछे मुड़कर देखना यह दर्शाता है कि आपके मन में उस धन को लेकर अब भी संशय, लालच या पछतावा है. दान या मदद वही श्रेष्ठ है जो देकर भूल दी जाए.

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कोर्ट-कचहरी या विवादित स्थान से निकलने पर

यदि आप किसी कानूनी मामले, कोर्ट-कचहरी के काम या किसी बड़े विवाद को सुलझाकर वापस लौट रहे हैं, तो भी नहीं मुड़ना चाहिए. चाणक्य नीति मानती है कि विवादित स्थलों से पीछे मुड़कर देखने का मतलब है कि आप मानसिक रूप से उस शत्रुता या विवाद से पूरी तरह मुक्त नहीं हो पाए हैं. यह आपके मन में दोबारा नकारात्मक विचार पैदा कर सकता है.

किसी दुष्ट या कपटी व्यक्ति का घर छोड़ने के बाद

जब आप किसी ऐसे व्यक्ति का घर या साथ छोड़ रहे हों जो स्वभाव से दुष्ट, ईर्ष्यालु या कपटी है, तो वहां से निकलने के बाद कभी पीछे मुड़कर न देखें. आचार्य चाणक्य कहते हैं कि दुर्जन व्यक्ति का साथ जितनी जल्दी और जितनी सहजता से छूट जाए, उतना अच्छा है. पीछे मुड़कर देखना दुर्जन के प्रति अनचाहे जुड़ाव या कमजोरी को दर्शाता है, जिससे वह आपको दोबारा नुकसान पहुंचा सकता है.

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