Bakrid 2026: 28 मई को बकरीद, जानें मुसलमान साल में कितनी बार मनाते हैं ईद

Bakrid 2026: भारत समेत दुनिया भर में ईद-उल-अजहा यानी बकरीद की तैयारियां जोरों पर हैं. अमूमन लोग सिर्फ मीठी ईद और बकरीद के बारे में ही जानते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस्लाम में 3 तरह से ईद मनाई जाती है? चलिए जानते हैं.

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3 तरीके की ईद  (Photo: ITG) 3 तरीके की ईद (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 26 मई 2026,
  • अपडेटेड 9:31 AM IST

Bakrid 2026: दुनिया भर के मुसलमानों का सबसे खास त्योहार ईद-उल-अजहा यानी बकरीद को दो दिन रह गए हैं. भारत में बकरीद यानी ईद उल-अजहा 28 मई यानी परसों मनाई जाएगी. वहीं, सऊदी के देशों में बकरीद 27 मई यानी कल मनाई जाएगी. इसी को लेकर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि मुसलमान साल में आखिर कितनी बार ईद मनाते हैं.

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आम तौर पर लोग यह जानते हैं कि इस्लाम में सिर्फ दो ही मुख्य ईद होती हैं. एक ईद-उल-फ़ितर और दूसरी ईद-उल-अजहा. इस्लाम में इन्हीं दो त्योहारों को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है. लेकिन, असल में मुसलमान साल में तीन बार  ईद मनाते हैं और तीसरी ईद का नाम है ईद मिलाद-उन-नबी.

चलिए अब जानते हैं कि 3 ईद क्यों और कैसा मनाई जाती है.  तीनों ईद एक दूसरे से कैसे अलग होती है और मुसलमान धर्म के लोग किस ईद को कैसे मनाते हैं? 

ईद-उल-फ़ितर

सबसे पहल बात ईद की करते हैं, जिसे ईद-उल-फ़ितर कहा जाता है. इसे आम तौर पर भारत में मीठी ईद या सेवई वाली ईद भी कहा जाता है. यह त्योहार रमजान के महीने के खत्म होने पर जश्न के तौर पर मनाया जाता है.

एक महीने रोज़ा रखने के बाद जब चांद दिखाई देता है, तो अगले दिन ईद मनाई जाती है. इस दिन लोग नमाज पढ़ते हैं, गरीबों को दान देते हैं और एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद देते हैं. घरों में मीठे पकवान, खासकर सेवइयां बनाई जाती हैं, और हर तरफ खुशी और भाईचारे का माहौल होता है. 

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ईद-उल-अजहा

दूसरी ईद होती है ईद-उल-अजहा, जिसे आम तौर पर भारत के लोग बकरीद कहते हैं. ईद-उल-अजहा का त्योहार इस्लाम धर्म को आखिरी और 12वें महीने में जिलहिज्जा की दसवीं तारीख को मनाया जाता है, जिसमें दुनिया भर के मुसलमान जानवरों की कुर्बानी करते हैं. 

कुर्बानी की परंपरा को हजरत इब्राहिम की उस कहानी से जोड़ा जाता है, जब उन्होंने अल्लाह के आदेश पर अपनी सबसे प्यारी चीज कुर्बान करने का इरादा किया था.

इस्लाम धर्म के मुताबिक जब अल्लाह ने हजरत इब्राहीम के परीक्षा लेने के लिए उन्हें सबसे प्यारी चीज को कर्बान करने के लिए कहा तो उन्होंने अपने बेटे हजरत इस्माइल की कुर्बानी देने के लिए तैयार हो गए थे, लेकिन, आखिरी समय में अल्लाह ने उनकी जगह एक दुंबे को रख दिया था और इस तरह उनकी परीक्षा पूरी हुई थी.

इसी घटना की याद में आज भी मुसलमान जानवर की कुर्बानी देते हैं. बकरीद का त्योहार तीन दिनों तक मनाया जाता है और तीन दिन तक जानवरों की कुर्बानी करते हैं.  इस त्योहार का संबंध हज से भी है, जब हर साल लाखों लोग मक्का जाकर इबादत करते हैं. 

ईद मिलाद-उन-नबी

मुस्लिम समुदाय के लोग ईद और बकरीद के अलावा तीसरी ईद भी मनाते हैं, जिसे ईद मिलाद-उन-नबी कहा जाता है. ये ईद मिलाद-उन-नबी हजरत मोहम्मद के जन्मदिन की याद में मनाया जाता है, जिसे मुसलमान बहुत पवित्र मानते हैं. इस दिन को मनाने का तरीका हर जगह अलग-अलग होता है. कई जगहों पर लोग इसे सादगी से याद करते हैं, जबकि कुछ जगहों पर इसे उत्सव की तरह मनाया जाता है.

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भारत में खास तौर पर कुछ मुस्लिम समुदाय इस दिन जुलूस निकालते हैं और हजरत मोहम्मद के जीवन और उनके संदेशों के बारे में लोगों को बताते हैं. इस मौके पर गरीबों और जरूरतमंदों को खाना खिलाने और मदद करने की भी परंपरा होती है. हालांकि, सभी लोग इसे एक जैसे तरीके से नहीं मनाते हैं. कुछ लोगों का मानना है कि इस्लाम में जन्मदिन मनाने की परंपरा नहीं है, इसलिए वे इस दिन को सिर्फ याद करने तक ही सीमित रखते हैं. 

ईद आखिर क्या है?

ईद का मतलब होता है खुशी, उत्सव या बार-बार आने वाली खुशी. यह सिर्फ एक धार्मिक त्योहार नहीं, बल्कि आपसी प्रेम और इंसानियत का संदेश भी देता है.

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