राजस्थान के कोटा में इंसानियत और उम्मीद की एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं. पंद्रह साल से परिवार से बिछड़ी मां मोहिनी का जब अपने पति, बेटे और बेटी से मिलन हुआ तो माहौल बेहद भावुक हो गया. मां को सामने देखते ही बेटा गोवर्धन खुद को रोक नहीं पाया और मां के पैरों से लिपटकर फूट-फूटकर रो पड़ा. वहीं बेटी संगीता भी मां के गले लगकर बिलख उठी. यह मार्मिक मिलन संभव हुआ 'अपना घर' आश्रम की लगातार देखभाल और प्रयासों से.
15 साल पहले बिछड़ गई थी मोहिनी
जानकारी के अनुसार मोहिनी करीब 15 साल पहले परिवार से बिछड़ गई थी. करीब नौ वर्ष पूर्व वह झालावाड़ जिले के दांगीपुरा थाना क्षेत्र के बामन गांव में लावारिस हालत में घूमती मिली थी. उस समय मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण वह अपने बारे में कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं थी. मामले की सूचना मिलने पर दांगीपुरा थानाधिकारी गोकुल प्रसाद ने मनोहरथाना उपखंड अधिकारी के आदेश पर उसे कोटा स्थित 'अपना घर आश्रम' भिजवाया.
आश्रम में इलाज हुआ तो याद आया परिवार
आश्रम में नियमित इलाज, देखभाल और सेवा के बाद मोहिनी के स्वास्थ्य में धीरे-धीरे सुधार हुआ. समय बीतने के साथ उसने अपने परिवार और गांव के बारे में जानकारी देना शुरू किया. इसी दौरान पता चला कि वह प्रतापगढ़ जिले की रहने वाली है.इसके बाद अरनोद थाना पुलिस की मदद से उसके परिवार तक सूचना पहुंचाई गई, जो पीपलखूंट क्षेत्र के सोडलपुर गांव में रहता है.
परिवार को जैसे ही मोहिनी के जिंदा और सुरक्षित होने की सूचना मिली,घर में खुशी की लहर दौड़ गई. पति बाबूलाल, बड़ा बेटा गोवर्धन, बेटी संगीता और गांव के कुछ लोग तुरंत कोटा के लिए रवाना हो गए. परिवार को इस बात का यकीन ही नहीं था कि मोहिनी कभी स्वस्थ अवस्था में वापस मिल पाएगी.
देखते ही पैरों में गिर गया बेटा, सीने से लिपटी बेटी
आश्रम पहुंचते ही जैसे ही गोवर्धन ने अपनी मां को देखा, वह भावुक होकर उनके पैरों से लिपट गया और फूट-फूटकर रोने लगा. बेटी संगीता भी मां को गले लगाकर रो पड़ी. इस दृश्य को देखकर वहां मौजूद लोग भी भावुक हो गए. गांव से आए लोग भी इस मिलन को हैरानी और खुशी के साथ देखते रहे.
बड़े हो गए बच्चे, बेटी की हो गई शादी
परिजनों ने बताया कि पिछले 15 वर्षों में मोहिनी को ढूंढने की हर संभव कोशिश की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला. समय के साथ परिवार ने उसके मिलने की उम्मीद लगभग छोड़ दी थी. इसी दौरान परिवार के दो बेटे और एक बेटी बड़े हो गए. बड़े बेटे गोवर्धन और बेटी संगीता की शादी भी हो चुकी है. लेकिन मां की कमी परिवार हमेशा महसूस करता रहा. जब थाने और अपना घर आश्रम के सेवासाथियों के जरिए कोटा में मोहिनी के होने की खबर मिली तो पूरे परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई. परिवार और साथ आए ग्रामीणों ने आश्रम की सराहना करते हुए कहा कि संस्था ने एक बिखरे परिवार को फिर से जोड़ने का काम किया है.
चेतन गुर्जर