देश की सबसे बड़ा मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम नीट-यूजी पेपर लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलावों का ऐलान कर दिया है. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि अब अगले साल से नीट परीक्षा पूरी तरह कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली पर आयोजित की जाएगी. सरकार का दावा है कि इससे पेपर लीक और शिक्षा माफिया पर लगाम लगेगी.
देश की कोचिंग राजधानी माने जाने वाले कोटा में पढ़ रहे छात्रों ने सरकार के फैसले का स्वागत तो किया, लेकिन इसके साथ कई सवाल और चिंताएं भी सामने रखीं.
देशभर से लाखों छात्र डॉक्टर और इंजीनियर बनने का ख्वाब लेकर कोटा पहुंचते हैं. मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए कोटा कई साल से छात्रों की पहली पसंद रहा है. ऐसे में नीट पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने की खबर ने यहां पढ़ रहे छात्रों को सबसे ज्यादा झकझोरा है.
छात्रों ने जताई नाराजगी...
सरकार की ओर से दोबारा परीक्षा और कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली लागू करने के ऐलान के बाद अलग-अलग कोचिंग संस्थानों में छात्रों से आजतक ने बातचीत की. छात्रों ने कहा कि परीक्षा केंद्रों पर उनसे बेहद सख्ती बरती जाती है. जूते उतरवाने से लेकर कपड़ों और दस्तावेजों तक की जांच होती है, लेकिन सबसे बड़ी जिम्मेदारी प्रश्नपत्र की सुरक्षा की होती है, जहां बार-बार चूक सामने आ रही है.
कई विद्यार्थियों ने कहा कि अगर पहले ही सख्त कार्रवाई और तकनीकी सुधार किए गए होते, तो आज ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती. छात्रों का कहना है कि लगातार पेपर लीक की घटनाएं हमारा मनोबल तोड़ रही हैं और भविष्य पर सवाल खड़े कर रही हैं.
'अब उम्मीद है मेहनत बर्बाद नहीं....'
कोटा में तैयारी कर रहे छात्रों ने कहा कि कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली लागू होने से उम्मीद जगी है. उनका कहना है कि वे घर-परिवार से दूर रहकर दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन परीक्षा के बाद जब पेपर लीक की खबर आती है, तो मेहनत पर पानी फिर जाता है.
छात्रों ने कहा कि सरकार को यह फैसला पहले ही लागू कर देना चाहिए था. अगर कई साल पहले कंप्यूटर आधारित परीक्षा शुरू हो जाती, तो शायद लाखों छात्रों को इस मानसिक तनाव और असुरक्षा का सामना नहीं करना पड़ता.
हालांकि, छात्रों ने यह भी कहा कि सिर्फ ऑनलाइन परीक्षा लागू कर देना ही समाधान नहीं है. अगर साइबर सिक्योरिटी मजबूत नहीं हुई तो नया एग्जाम सिस्टम भी खतरे से बाहर नहीं रहेगा.
साल 2027 में NEET एग्जाम में बैठने की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों ने भी चिंता जाहिर की है. उनका कहना है कि पेपर लीक की घटनाओं ने डर पैदा कर दिया था कि दो साल की मेहनत कहीं बेकार न चली जाए. लेकिन अब नए एग्जाम सिस्टम के ऐलान से उम्मीद मिली है कि भविष्य में मेहनत के साथ खिलवाड़ नहीं होगा.
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सरकार ने क्या फैसला लिया है?
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई ऐलान किए हैं. उन्होंने बताया कि सभी अभ्यर्थियों को 14 जून तक प्रवेश पत्र जारी कर दिए जाएंगे. दोबारा परीक्षा के लिए छात्रों को अपनी पसंद का शहर चुनने का विकल्प मिलेगा. इसके लिए एक हफ्ते का वक्त दिया जाएगा. आंसर शीट में डीटेल्स भरने के लिए एक्स्ट्रा 15 मिनट का वक्त दिया जाएगा. दोबारा परीक्षा के लिए छात्रों से कोई एक्स्ट्रा फीस नहीं ली जाएगी. एग्जाम फीस वापस करने का भी फैसला लिया गया है.
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में साइबर चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं और करीब 120 एक्टिव टेलिग्राम चैनलों को बंद कराया गया है. उन्होंने माना कि शिक्षा माफिया के खिलाफ यह लंबी लड़ाई है और इस बार पेपर लीक मामले की जांच कई स्तरों पर केंद्रीय जांच एजेंसी करेगी.
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार ने राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों के आधार पर अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों तरह के सुधार लागू किए थे, लेकिन इसके बावजूद सेंध कैसे लगी, इसकी गहराई से जांच की जाएगी. उन्होंने भरोसा दिलाया कि अब किसी भी माफिया को पैसों के दम पर छात्रों की सीट नहीं छीनने दी जाएगी.
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'सिर्फ व्यवस्था नहीं, सुरक्षा भी मजबूत हो'
कोटा के छात्रों ने सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि कंप्यूटर आधारित परीक्षा सही दिशा में उठाया गया कदम है, लेकिन इसके साथ साइबर सिक्योरिटी और एग्जाम सिक्योरिटी सिस्टम को भी बेहद मजबूत करना होगा. छात्रों का कहना है कि चाहे परीक्षा ऑफलाइन हो या ऑनलाइन, अगर सुरक्षा में चूक रही तो एग्जाम माफिया फिर रास्ता निकाल लेंगे.
अब पूरे देश की नजर इस बात पर है कि सरकार के ये बड़े फैसले आने वाले वक्त में नीट जैसी जरूरी परीक्षा की विश्वसनीयता कितना खरा उतर पाते हैं. क्या वास्तव में लाखों छात्रों के भविष्य को पेपर माफिया से सुरक्षित किया जा सकेगा.
चेतन गुर्जर