काली हो चुकी है खेत की मिट्टी, हरी सब्जियां बनीं स्लो पॉइजन... पानी में मिल रहा फैक्ट्रियों से निकलता जहर

जयपुर के सांगानेर इलाके में फैक्ट्रियों से निकल रहा केमिकल और ब्लीच मिला पानी खेतों में पहुंच रहा है, जिससे उगाई जा रही सब्जियां और फल लोगों की सेहत के लिए स्लो पॉइजन बनते जा रहे हैं. दूषित पानी से सिंचाई के कारण खेतों की मिट्टी काली पड़ चुकी है और पालक, पत्तागोभी, बैंगन जैसी सब्जियों में गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है.

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जयपुर के सांगानेर इलाके में फैक्ट्रियों से निकलने वाले केमिकल और ब्लीच से दूषित पानी से खेती प्रभावित हो रही है. (Photo: ITG) जयपुर के सांगानेर इलाके में फैक्ट्रियों से निकलने वाले केमिकल और ब्लीच से दूषित पानी से खेती प्रभावित हो रही है. (Photo: ITG)

देव अंकुर

  • जयपुर,
  • 14 दिसंबर 2025,
  • अपडेटेड 6:48 AM IST

जयपुर में फैक्ट्रियों से निकल रहा केमिकल और ब्लीच मिला पानी लोगों की सेहत के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है. सवाल यह है कि जो हरी सब्जियां और फल लोग सेहत के लिए खाते हैं, क्या वे सच में उन्हें स्वस्थ बना रहे हैं या धीरे-धीरे बीमार कर रहे हैं.

अगर इन सब्जियों और फलों की खेती ऐसे पानी से हो रही हो, जिसमें फैक्ट्रियों का जहरीला कचरा और रसायन मिले हों, तो इसका सीधा असर आम लोगों की सेहत पर पड़ता है. ऐसा पानी किडनी फेल होने, दिल की बीमारियों और यहां तक कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है.

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स्लो पॉइजन का काम कर रही सब्जियां
 
जयपुर के सांगानेर इलाके में सांगानेर से चांदलई तक करीब 20 किलोमीटर के दायरे में दो दर्जन से ज्यादा गांव आते हैं. यहां कपड़ों की रंगाई, छपाई और ब्लीच का काम करने वाली फैक्ट्रियां आसपास के जल स्रोतों में केमिकल और ब्लीच वाला पानी छोड़ रही हैं. इससे पूरे इलाके में भारी प्रदूषण फैल गया है. जानकारी के मुताबिक, इस दूषित पानी से उगाई गई फसलें धीमे जहर की तरह काम कर रही हैं, जो समय के साथ गंभीर बीमारियों की वजह बन सकती हैं.

काली हो चुकी है खेतों की मिट्टी

इंडिया टुडे की टीम जब जयपुर की सांगानेर तहसील के शिकारपुरा और मुहाना समेत कई इलाकों में पहुंची, तो वहां काले रंग का पानी खेतों में पंप किया जा रहा था. इन खेतों में पत्तागोभी, बैंगन, पालक और लगभग हर तरह की मौसमी सब्जियों की खेती हो रही थी. कई जगहों पर इस गंदे पानी की वजह से मिट्टी का रंग भी ग्रे और काला हो चुका है. किसान सीताराम का कहना है कि इससे खाने वाली सभी फसलों को नुकसान हो रहा है, लेकिन जांच के लिए अब तक कोई अधिकारी नहीं आया है.

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'कई साल से छोड़ा जा रहा पानी, कोई कार्रवाई नहीं'

जानकारी यह भी है कि कुछ फैक्ट्रियों में गंदे पानी को साफ करने की व्यवस्था जरूर है, लेकिन ज्यादातर फैक्ट्रियां बिना किसी सफाई के केमिकल और रंग मिला पानी सीधे नालों और जल स्रोतों में छोड़ रही हैं. इसका असर सीधे खेतों और फसलों पर पड़ रहा है. 

स्थानीय लोगों का कहना है कि सालों से फैक्ट्रियों का जहरीला पानी इन खेतों में छोड़ा जा रहा है, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. एक फैक्ट्री कर्मचारी सिकंदर का दावा है कि उनके यहां गंदे पानी को साफ करने की व्यवस्था है और फिल्टर के बाद ही पानी बाहर छोड़ा जाता है. हालांकि, जमीनी हालात कुछ और ही कहानी बयान कर रहे हैं.

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