'मैं तो कांग्रेस अध्यक्ष बनना चाहता था, लेकिन साजिश हुई...' अशोक गहलोत का बड़ा दावा

अशोक गहलोत ने कहा है कि वह कांग्रेस अध्यक्ष बनने जा रहे थे और सोनिया गांधी और पार्टी नेतृत्व ने उन्हें इस पद के लिए चुना था. लेकिन उनके अनुसार अचानक हुए घटनाक्रम और एक कथित साजिश के कारण वह अध्यक्ष नहीं बन सके.

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कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बन पाने पर अशोक गहलोत का महीनों बाद छलका दर्द (Photo: PTI) कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बन पाने पर अशोक गहलोत का महीनों बाद छलका दर्द (Photo: PTI)

शरत कुमार

  • जयपुर, राजस्थान,
  • 07 जून 2026,
  • अपडेटेड 4:26 PM IST

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के बड़े नेता अशोक गहलोत ने एक बार फिर वो पुराना मामला उठाया है, जब वो कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनते-बनते रह गए थे. गहलोत का कहना है कि उन्हें अध्यक्ष बनाने का फैसला हो चुका था, लेकिन एक साजिश की वजह से सब कुछ पलट गया. और आज भी लोग असली सच नहीं जानते.

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कुछ साल पहले कांग्रेस में अध्यक्ष पद के लिए चुनाव की बात चली. उस वक्त सोनिया गांधी और कांग्रेस की टॉप लीडरशिप ने अशोक गहलोत को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का मन बना लिया था. गहलोत खुद भी इस पद के लिए तैयार थे और उन्होंने इसे सम्मान की बात मानी थी.

फिर अचानक क्या हुआ?

लेकिन जैसे ही यह तय होने लगा, पार्टी ने राजस्थान में पर्यवेक्षक भेजे यानी ऐसे नेता जो वहां की स्थिति देखने आए. इसके बाद हालात तेजी से बदल गए. गहलोत के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम के पीछे एक बड़ी साजिश थी, जिसकी वजह से वो अध्यक्ष नहीं बन पाए.

लोगों ने क्या समझा?

इस पूरे मामले के बाद देशभर में यह बात फैल गई कि गहलोत ने खुद ही अध्यक्ष पद से मना कर दिया, क्योंकि वो राजस्थान का मुख्यमंत्री पद नहीं छोड़ना चाहते थे. यानी लोगों की नजर में यह गहलोत की अपनी पसंद थी. यहां तक कि उनके अपने करीबी लोग और समर्थक भी यही मानते रहे.

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गहलोत क्या कह रहे हैं?

गहलोत अब साफ कह रहे हैं कि यह धारणा गलत है. वो कहते हैं कि वो अध्यक्ष बनना चाहते थे, उनकी पूरी तैयारी थी, और उन्होंने खुद पीछे नहीं हटे. बल्कि जो हुआ वो एक साजिश का नतीजा था. उनका कहना है कि इस साजिश की वजह से उनकी छवि को नुकसान पहुंचा और पूरे देश में उनके बारे में गलत धारणा बन गई.
 


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गहलोत ने और क्या कहा?

गहलोत ने यह भी कहा कि वो कोई अनपढ़ या अनजान नेता नहीं हैं. उन्होंने कामराज, महात्मा गांधी, नेहरू और सरदार पटेल जैसे बड़े नेताओं का जिक्र किया और कहा कि कांग्रेस में अध्यक्ष पद हमेशा से बहुत सम्मान वाला रहा है. अध्यक्ष बनने के लिए किसी खास परिवार या पृष्ठभूमि की जरूरत नहीं होती.

गहलोत के मुताबिक, सोनिया गांधी और कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें पार्टी अध्यक्ष बनाने का फैसला किया था. उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में उनके लिए इस जिम्मेदारी को स्वीकार करना स्वाभाविक था. लेकिन उसी दौरान अचानक कुछ ऐसे घटनाक्रम हुए, जिन्होंने पूरी तस्वीर बदल दी.

आज भी सच छुपा है

गहलोत का कहना है कि इस पूरे मामले की असली सच्चाई आज भी बहुत कम लोगों को पता है. वो लगातार लोगों को समझाने की कोशिश करते हैं, लेकिन जो धारणा बन चुकी है वो हटाना आसान नहीं. उनके मुताबिक, वो इसलिए नहीं चूके क्योंकि उनकी इच्छा नहीं थी, बल्कि परिस्थितियां और साजिश इसके लिए जिम्मेदार थी.

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