'जो लोग आज कांशीराम जी को मुख्यमंत्री बनाने की बात कर रहे हैं, वे शायद उनका कद भूल गए हैं. मान्यवर साहब वो शख्सियत थे जिन्होंने देश को कई प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री दिए. वे किसी की मेहरबानी पर पद लेने वाले नेता नहीं, बल्कि पद बांटने वाले 'किंगमेकर' थे.' राजस्थान के भरतपुर में बसपा के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद ने इन शब्दों के साथ राहुल गांधी के बयान पर कड़ा पलटवार किया. मौका था बसपा संस्थापक कांशीराम की जयंती का, जहां आकाश आनंद ने राहुल गांधी के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि 'अगर नेहरू होते तो कांशीराम को CM बनाते.'
दरअसल, शनिवार को राजस्थान के भरतपुर में मान्यवर कांशीराम की जयंती के उपलक्ष्य में एक विशाल जनसभा का आयोजन किया गया था. इस दौरान मंच से बोलते हुए आकाश आनंद ने राहुल गांधी के उस हालिया दावे पर कड़ा पलटवार किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि 'अगर नेहरू होते तो कांशीराम को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाते'. राहुल गांधी के इसी बयान का जिक्र करते हुए आकाश आनंद ने उन्हें बहुजन आंदोलन के इतिहास को गहराई से समझने की सलाह दे डाली.
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मान्यवर साहब का कद किसी भी पद से बहुत ऊपर था. आकाश आनंद के मुताबिक, ''साहब वो शख्सियत थे जिन्होंने समाज के वंचित वर्ग को सत्ता की कुर्सी तक पहुंचाया और अपने पूरे जीवन में कभी खुद के लिए किसी पद की इच्छा नहीं की. कांशीराम जी वो हैं जिन्होंने पीएम-सीएम बनाए हैं और खुद कभी पद का लालच नहीं किया. हकीकत तो यह है कि अगर वो नेहरू जी के दौर में सक्रिय होते, तो उनमें इतनी राजनैतिक ताकत थी कि वे नेहरू को भी प्रधानमंत्री पद तक पहुंचाने की क्षमता रखते.''
इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर भी विशेष जोर दिया कि कांशीराम जी हमेशा एक 'किंगमेकर' की भूमिका में रहे, जिन्होंने समाज को खुद नेतृत्व करना सिखाया, न कि किसी के रहमोकरम या दया पर पद स्वीकार करना. बता दें कि यह सियासी घमासान तब शुरू हुआ जब राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर कांशीराम को 'भारत रत्न' देने की मांग उठाई. राहुल ने पत्र में लिखा कि कांशीराम ने दलितों और पिछड़ों को उनके वोट की ताकत का अहसास कराया.
'कांग्रेस ने हमेशा अपमान किया'
सिर्फ आकाश ही नहीं, बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी कांग्रेस को जमकर खरी-खोटी सुनाई. मायावती ने याद दिलाया कि जब कांशीराम जी का निधन हुआ था, तब केंद्र में कांग्रेस की ही सरकार थी, लेकिन उन्होंने एक दिन का राजकीय शोक तक घोषित नहीं किया था. मायावती ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने बाबासाहेब अंबेडकर को भी हमेशा नीचा दिखाया और उन्हें भारत रत्न देने में सालों लगा दिए, अब वही कांग्रेस वोट के लिए कांशीराम जी के नाम का सहारा ले रही है.
2027 के लिए दलित वोट'पर छिड़ी जंग
यूपी में 2027 के चुनाव से पहले दलित राजनीति का केंद्र अब 'कांशीराम' बन गए हैं. जहां राहुल गांधी उन्हें भारत रत्न दिलाने की बात कर रहे हैं, वहीं अखिलेश यादव भी उन्हें अपनी विरासत का हिस्सा बता रहे हैं. लेकिन भरतपुर की रैली से आकाश आनंद ने साफ कर दिया कि कांशीराम की विरासत पर सिर्फ और सिर्फ बहुजन समाज पार्टी का हक है और विपक्षी दलों की दाल यहां नहीं गलने वाली.
अरविंद ओझा