केरल विधानसभा चुनाव के संताप से लेफ्ट उबरा भी नहीं था कि बुधवार उसके लिए भूचाल लेकर आया. प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कई टीमों ने एक साथ पूर्व मुख्यमंत्री पिनरई विजयन के ठिकानों पर दस्तक दी. वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के केस में केरल हाई कोर्ट से हरी झंडी मिलने के महज 24 घंटे के भीतर हुई इस चौतरफा कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि केंद्रीय एजेंसियां अब इस मामले को अंजाम तक ले जाने के मूड में हैं.
बुधवार सुबह जब केरल जागा, तो राजधानी तिरुवनंतपुरम से लेकर कन्नूर के राजनीतिक गलियारों तक केंद्रीय सुरक्षा बलों की गाड़ियां दौड़ रही थीं. ED ने पूर्व मुख्यमंत्री पिनरई विजयन के किराए के आवास और उनके पैतृक घर समेत करीब एक दर्जन ठिकानों पर एक साथ 'सर्च ऑपरेशन' शुरू किया. जांच की आंच सिर्फ विजयन तक सीमित नहीं रही. उनके दामाद और पूर्व पीडब्ल्यूडी मंत्री पी. ए. मोहम्मद रियास के कोझिकोड स्थित ठिकानों पर भी छापे मारे गए. इसके साथ ही, विवाद के केंद्र में रही निजी कंपनी 'कोचीन मिनरल्स एंड रुटाइल लिमिटेड' (CMRL) के अलुवा स्थित कॉर्पोरेट दफ्तर और उसके प्रबंध निदेशक शशिधरन कर्था के आवास को भी खंगाला गया.
इस कार्रवाई के विरोध में सीपीआई(एम) के कार्यकर्ता सड़क पर आ गए. विजयन के घर पहुंची ED अधिकारियों को घेर लिया. उनकी गाड़ियों को तोड़फोड़ दिया. जैसे-तैसे पुलिस ने उन्हें वहां से निकाला. लेफ्ट इसे केंद्र सरकार का 'पॉलिटिकल वेंडेटा' करार दे रहा है. हालांकि, कानूनी गलियारों में इस दलील की हवा कल ही निकल चुकी थी, जब हाई कोर्ट ने जांच पर रोक लगाने की कंपनी की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया था.
क्या है केरल का CMRL केस? 'मंथली प्रोटेक्शन मनी' और रसूख का खेल
यदि आरोपों को सच मानें तो यह सीधे तौर पर क्रोनी कैपिटलिज्म और राजनीतिक रसूख के दुरुपयोग का एक क्लासिक उदाहरण नजर आता है.
मामला साल 2017 से 2021 के बीच का है. पूर्व मुख्यमंत्री पिनरई विजयन की बेटी वीणा की एक कंसल्टेंसी फर्म थी 'एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस'. इस फर्म को माइनिंग और केमिकल क्षेत्र की निजी कंपनी CMRL ने लगभग 1.72 करोड़ रुपये (कुछ वित्तीय आकलनों के अनुसार 2.70 करोड़ रुपये) का भुगतान किया. आयकर विभाग के अंतरिम सेटलमेंट बोर्ड की जांच में जो सबसे चौंकाने वाला तथ्य सामने आया, वो यह था कि इस भारी-भरकम रकम के बदले वीना की कंपनी ने CMRL को कोई सॉफ्टवेयर या मार्केटिंग सर्विस दी ही नहीं थी.
गंभीर आरोप: सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) की 160 पन्नों की चार्जशीट में साफ कहा गया है कि यह भुगतान किसी व्यापारिक सौदे के एवज में नहीं, बल्कि सूबे के सबसे शक्तिशाली राजनेता के परिवार को 'संतुष्ट' रखने और फायदा लेने के लिए किया गया एक 'मंथली प्रोटेक्शन मनी' था.
कांग्रेस का बुना जाल, जिसमें वह खुद फंसी
इस पूरे मामले को जनता की अदालत में लाने का श्रेय तब केरल की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस और उसके गठबंधन यूडीएफ (UDF) को जाता है. 2023 में जब आयकर विभाग की रिपोर्ट सार्वजनिक हुई, तब कांग्रेस ने इसे केरल के इतिहास का सबसे बड़ा फैमिली करप्शन स्कैंडल घोषित कर दिया था. हालिया विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने इसे अपनी राजनीति का ब्रह्मास्त्र बनाया. रैलियों में विजयन सरकार को 'कट-मनी' और 'भ्रष्टाचार की जननी' कहा गया. नतीजा यह हुआ कि वामपंथी सरकार सत्ता से बेदखल हो गई.
लेकिन आज जब उसी मुद्दे पर ED ने निर्णायक कदम उठाया है, तो कांग्रेस के होंठ सिल गए हैं. उसे इस कार्रवाई का क्रेडिट नहीं चाहिए. क्योंकि ED एक केंद्रीय जांच एजेंसी है, और लेफ्ट पार्टियां इसके दुरुपयोग के लिए बीजेपी पर हमलावर हैं. कांग्रेस इस झगड़े के बीच में नहीं आना चाहती.
दिल्ली-बंगाल की तरह कांग्रेस के बनाए केस पर बीजेपी का एक्शन
दिल्ली के कथित आबकारी घोटाले में अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के खिलाफ सबसे पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस करने और जेल भेजने की मांग करने वाली कांग्रेस ही थी. लेकिन जैसे ही ED ने केजरीवाल पर हाथ डाला, कांग्रेस ने राष्ट्रीय स्तर पर इसे 'लोकतंत्र की हत्या' करार दे दिया. हालांकि, बुधवार को विजयन पर हुई कार्रवाई को लेकर केजरीवाल ने एक्स पर भाजपा के साथ कांग्रेस को भी आड़े हाथों लिया है.
पश्चिम बंगाल में अधीर रंजन चौधरी और स्थानीय कांग्रेस इकाइयां ममता बनर्जी की सरकार को कोयला, राशन और शिक्षक भर्ती घोटाले पर रोज पानी पी-पीकर कोसती हैं. मगर जब केंद्रीय एजेंसियां कार्रवाई करती हैं, तो नई दिल्ली में बैठे कांग्रेस के शीर्ष नेता इसे 'एजेंसियों का दुरुपयोग' बताने लगते हैं.
अब यही दुविधा केरल में कांग्रेस के लिए जी का जंजाल बन चुकी है. केरल की प्रादेशिक राजनीति में खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए उसे विजयन के भ्रष्टाचार का विरोध करना है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर 'विपक्ष की एकजुटता' और 'विक्टिम कार्ड' के नैरेटिव को बचाने के लिए उसे ED की कार्रवाई की निंदा करनी है.
बीजेपी को दिख रहा है नंबर 2 बनने का मौका
केरल की 140 विधानसभा सीटों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ को 102 और लेफ्ट पार्टियों के गठबंधन वाले एलडीएफ को 35 सीटें मिली हैं. राज्य की 25 फीसदी सीटों तक सिमट गया लेफ्ट बीजेपी को केरल की सियासत में उस संकरी गली की तरह दिख रहा है, जिससे होकर वह राज्य की मेनस्ट्रीम वाली सियासत में प्रवेश कर सकती है. वह लेफ्ट की जितनी जगह पर काबिज होगी, उतनी ही नंबर 2 वाले मुकाम पर पहुंचेगी. लेफ्ट पार्टियों में नेतृत्व की शुचिता बहुत मायने रखती है. यदि केरल में विजयन और उनका परिवार भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरा रहता है, तो उनके कैडर का मानोबल तोड़ने वाला होगा.
बुधवार को हुई ED की कार्रवाई ने केरल की वामपंथी राजनीति को तो बैकफुट पर धकेल ही दिया है, लेकिन उससे भी ज्यादा इसने कांग्रेस को एक वैचारिक असमंजस में ला खड़ा किया है. बीजेपी ने इस मौके को ताड़ते हुए वामपंथियों पर सीधा हमला बोला है और कांग्रेस की खामोशी को उसका 'डर और दोहरा चरित्र' करार दिया है.
धीरेंद्र राय