केरलम में बरसों से एक परंपरा चली आ रही थी, जिसे मुख्यमंत्री पी. विजयन ने पांच साल पहले तोड़ दी थी. केरलम में, असल में, हर पांचवें साल सत्ता बदल जाती थी, लेकिन पी. विजयन के नेतृत्व वाले एलडीएफ गठबंधन ने 2021 में सत्ता में वापसी कर ली - लेफ्ट के लगातार 10 साल के शासन के बाद कांग्रेस और बीजेपी बदलाव की उम्मीद लगाए हुए हैं.
कांग्रेस को केरलम की सत्ता पर कब्जा दिलाने के लिए राहुल गांधी ने भी पिछले चुनाव में खूब मेहनत की थी. तब राहुल गांधी केरलम के ही वायनाड से सांसद हुआ करते थे. 2019 के चुनाव में अमेठी की हार के बाद वायनाड ही संबल बना था, और राहुल गांधी संसद पहुंचे थे. वायनाड ने तो 2024 में भी राहुल गांधी को संसद भेजा था, लेकिन उन्होंने रायबरेली सीट अपने पास रखी, और वायनाड अपनी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा के हवाले कर दिया. प्रियंका गांधी उपचुनाव जीतकर वायनाड की सांसद बनी हैं. लेकिन, प्रियंका गांधी को केरलम के बजाय असम विधानसभा चुनाव का प्रभारी बनाया गया है.
ऐसे में जबकि कांग्रेस केरलम विधानसभा चुनाव में बड़ा मौका देख रही है, मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में भी होड़ मची हुई है - और कई कांग्रेस नेता तो अभी से इलाके में एक्टिव बताए जा रहे हैं.
कौन बनेगा कांग्रेस का मुख्यमंत्री चेहरा?
कुछ दिन पहले कांग्रेस ने केरलम में एक सर्वे कराया था. सर्वे में मुख्य तौर पर 12 सवाल पूछे गए थे. सर्वे में लोगों से उनके पसंदीदा मुख्यमंत्री के बारे में भी पूछा गया था. मौजूदा सरकार की कमियों को लेकर भी सवाल पूछे गए थे. हर विधानसभा सीट के लिए सर्वे में शामिल लोगों से 6 संभावित उम्मीदवारों का आकलन करने को कहा गया था, जिनमें कुछ उम्मीदवार ऐसे भी थे जो इलाके से बाहर के थे.
सर्वे में यह भी जानने की कोशिश थी कि क्या वे लोग कांग्रेस को वोट देंगे? कांग्रेस को अपना मुख्यमंत्री कैसे चुनना चाहिए? और, यह जानने की भी कोशिश की गई कि क्या कांग्रेस चुनाव से पहले अपने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा कर देनी चाहिए?
रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव रणनीतिकार सुनील कनुगोलू की तरफ से कराए गए सर्वे में मुख्यमंत्री पद के लिए कई चेहरे सामने आए हैं, जिनमें वीडी सतीशन प्रमुख दावेदार बनकर उभरे हैं. वीडी सतीशन फिलहाल केरलम विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं.
वीडी सतीशन के अलावा मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सीनियर नेता रमेश चेन्निथला, केसी वेणुगोपाल और शशि थरूर भी शामिल हैं - लेकिन क्या सर्वे नतीजों के आधार पर ही कांग्रेस के चुनाव जीतने की स्थिति में मुख्यमंत्री कैंडिडेट फाइनल हो पाएगा?
1. वीडी सतीशन: केरलम में कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदार के रूप में वीडी सतीशन उभरे हैं. 2021 में कांग्रेस ने वीडी सतीशन को विधानसभा में विपक्ष का नेता बनाया था. वीडी सतीशन पांचवीं बार विधायक बने हैं. पेशे से वकील वीडी सतीशन पहली बार 2001 में विधानसभा चुनाव जीते थे, जब वो केरलम हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करते थे.
कई और भी सर्वे कराए गए हैं, जिनमें उनका नाम सबसे ऊपर पाया गया है. ऐसे ही एक सर्वे में मुख्यमंत्री पद के लिए वो मौजूदा सीएम पी. विजयन से भी ज्यादा लोगों की पसंद बताए गए थे.
2. केसी वेणुगोपाल: कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में एक बड़ा नाम केसी वेणुगोपाल है. केसी वेणुगोपाल फिलहाल कांग्रेस महासचिव संगठन हैं, और अलाप्पुझा लोकसभा सीट से सांसद हैं. 2017 में जब अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री बनाकर कांग्रेस ने राजस्थान भेजा तब केसी वेणुगोपाल को जिम्मेदारी दी गई थी.
अब केसी वेणुगोपाल को अलाप्पुझा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ाए जाने की भी चर्चा हो रही है. अव्वल तो कांग्रेस में सांसदों को विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ाए जाने की नीति रही है, लेकिन केसी वेणुगोपाल के मामले में यह अपवाद भी हो सकता है.
केसी वेणुगोपाल की एक खासियत तो ये है कि केरलम में उनका जनाधार भी है. 2024 में जब कांग्रेस नेताओं को लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए कहा गया, तो केसी वेणुगोपाल सबसे आगे नजर आए. कई नेताओं ने तो कन्नी काट ली थी. ऐसे में हर तरह से केसी वेणुगोपाल की दावेदारी सबसे मजबूत लगती है.
3. रमेश चेन्निथला: सर्वे में वीडी सतीशन के बाद मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में रमेश चेन्निथला का नाम आया है. रमेश चेन्निथला कांग्रेस के सबसे सीनियर नेताओं में शुमार हैं. 2016 में वह केरलम विधानसभा में विपक्ष के नेता चुने गए थे - और 2019 का आम चुनाव उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती थी, जब अमेठी के साथ साथ वायनाड से राहुल गांधी भी चुनाव मैदान में थे.
रमेश चेन्निथला ने चुनौती को इतनी गंभीरता से लिया कि राहुल गांधी की जीत तो पक्की हुई ही, केरलम की 20 में से 19 लोकसभा सीटें कांग्रेस की झोली में भर दिए - लेकिन, मौजूदा समीकरणों में वह रेस में सबसे आगे नहीं रह गए हैं.
4. शशि थरूर: कांग्रेस नेतृत्व से गहरे मतभेद के बावजूद शशि थरूर भी मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में शामिल किए जा सकते हैं. शशि थरूर की अंतर्राष्ट्रीय पहचान भी है, और राष्ट्रीय राजनीति में भी वह अक्सर ही सुर्खियों में रहते हैं. लेकिन, केरलम के लोग बताते हैं कि उनके प्रभाव का दायरा उनके संसदीय क्षेत्र तक ही सिमटा हुआ है.
शशि थरूर के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के प्रति उनके बयानों से नजदीकी देखी जाती है, लेकिन केरलम कांग्रेस के कई नेता भी ऐसी बातों से इनकार करते हैं. शशि थरूर खुद भी बीजेपी में जाने की बातों को खारिज कर चुके हैं, और सावरकर के नाम पर अवॉर्ड को ठुकराकर अपनी तरफ से संदेश देने की भी कोशिश की है.
मृगांक शेखर