तमिलनाडु में हार से ज्यादा बीजेपी अन्नामलाई के जाने से होगी हर्ट

लोकसभा चुनाव में बीजेपी को दहाई अंकों में वोट शेयर दिलाकर इतिहास रचने वाले अन्नामलाई का जाना पार्टी के लिए किसी चुनावी हार से भी ज्यादा नुकसानदेह साबित हो सकता है. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या विजय और उदयनिधि स्टालिन जैसे युवा चेहरों के उभार के बीच, अपने सबसे बड़े स्टार नेता के बिना बीजेपी तमिलनाडु की भविष्य की सियासत में अपनी प्रासंगिक बनाए रख पाएगी.

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अन्नामलाई का बीजेपी से इस्तीफा (Photo-ITG) अन्नामलाई का बीजेपी से इस्तीफा (Photo-ITG)

अनघा

  • नई दिल्ली ,
  • 05 जून 2026,
  • अपडेटेड 3:14 PM IST

तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी के लिए जो एक बड़े प्रयोग के रूप में शुरू हुआ था, वह पार्टी के सबसे बड़े दांव के अलग होने के साथ ही खत्म हो गया है. अन्नामलाई को 2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को 11% वोट शेयर दिलाने का श्रेय दिया जाता है, जबकि उस समय पार्टी 2019 के मोदी-विरोधी रुख के बचे हुए प्रभावों से जूझ रही थी. उन्होंने तमिलनाडु में कुछ ऐसा हासिल कर दिखाया था, जिसे कभी पूरी तरह असंभव माना जाता था, यानी लोकसभा चुनाव में बीजेपी को डबल डिजिट में वोट शेयर दिलाना.

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बीजेपी नेतृत्व को लिखे एक पत्र में, अन्नामलाई ने कथित तौर पर तर्क दिया कि राष्ट्रीय पार्टियां अक्सर ऐसी भाषा बोलती हैं, जिसे तमिलनाडु कभी समझ ही नहीं पाया, जो कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत प्रस्तावित त्रि-भाषा (three-language) नीति के साथ उनकी असहमति को दर्शाता है. विचारधारा और भाषा का यह अंतर ही बीजेपी से अलग होने के उनके फैसले के पीछे का मुख्य कारण बनकर उभरा है. सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने 4 दिसंबर को ही पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी चिंताएं जाहिर कर दी थीं, लेकिन उनसे चुनाव खत्म होने तक इस पद पर बने रहने के लिए कहा गया था.

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बीजेपी से राहें जुदा करते हुए भी अन्नामलाई ने इस बात को बरकरार रखा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सर्वोच्च सम्मान करते हैं. हालांकि, उन्होंने कहा कि वह बीजेपी के साथ उसी तरह राजनीतिक रूप से मुकाबला करेंगे जैसे वह तमिलनाडु की अन्य पार्टियों, जिनमें द्रमुक (DMK), टीवीके (TVK), एमडीएमके (MDMK) और डीएमडीके (DMDK) शामिल हैं, के साथ करते हैं.

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सीटों की रणनीति ने आंतरिक असंतोष को हवा दी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने जिन सीटों पर चुनाव लड़ा, वह फैसला अन्नामलाई को रास नहीं आया. पार्टी ने पुदुकोट्टई जिले में चार सीटों पर चुनाव लड़ा, जहां जमीनी स्तर पर उसकी मौजूदगी मजबूत नहीं है, जबकि कोयंबटूर में केवल एक सीट पर उम्मीदवार उतारा, जिसे राज्य में बीजेपी का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता है. यह रणनीति पूरी तरह से फेल साबित हुई और बीजेपी इस चुनाव में केवल एक सीट जीतने में ही कामयाब हो सकी. चुनावों से ठीक पहले, अन्नामलाई ने अपने पिता के खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए खुद को चुनावी जिम्मेदारियों से अलग कर लिया था.

बीजेपी के सामने वजूद बनाए रखने की बड़ी चुनौती

तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष के रूप में अन्नामलाई के तेजी से बढ़ते कद ने कथित तौर पर कई उन वरिष्ठ नेताओं के बीच बेचैनी पैदा कर दी थी, जिन्होंने राज्य में पार्टी को खड़ा करने में दशकों बिताए थे. अब बड़ा सवाल यह नहीं है कि क्या बीजेपी तमिलनाडु में आगे बढ़ सकती है. बल्कि बड़ा सवाल यह है कि क्या बीजेपी तमिलनाडु में उस नेता के बिना भी अपना वजूद बनाए रख सकती है, जो राज्य में पार्टी का सबसे जाना-पहचाना चेहरा बन चुका था. 

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युवा कार्यकर्ता कर सकते हैं अन्नामलाई का रुख

बीजेपी के युवा कार्यकर्ताओं और पहली पीढ़ी के समर्थकों का एक बड़ा वर्ग खुद को पार्टी संगठन की तुलना में अन्नामलाई से अधिक जुड़ा हुआ महसूस करता है. इनमें से कई लोग उसी दौर में बीजेपी में शामिल हुए थे जब अन्नामलाई पार्टी का मुख्य चेहरा बने थे. उनके जाने से, अब तमिलनाडु में बीजेपी को अपने सबसे ऊर्जावान जमीनी नेटवर्क के एक बड़े हिस्से को खोने का जोखिम उठाना पड़ सकता है.

तमिलनाडु की राजनीति में नए युग की शुरुआत

तमिलनाडु की राजनीति अब एक पीढ़ीगत बदलाव के दौर में प्रवेश कर रही है. पारंपरिक द्रविड़ राजनीति को नए चेहरों और नए राजनीतिक दलों से लगातार कड़ी चुनौती मिल रही है. यह अनिश्चितता सिर्फ बीजेपी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अन्नाद्रमुक (AIADMK) के लिए भी बड़ी चुनौती है, जो टीवीके (TVK) के उभार के बाद राजनीतिक पायदान पर और नीचे खिसक गई है.

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विजय-उदयनिधि-अन्नामलाई त्रिकोण बदलेगा भविष्य की जंग का रुख

तमिलनाडु की राजनीति की अगली पीढ़ी अब तीन उभरते हुए चेहरों विजय, उदयनिधि स्टालिन और अन्नामलाई के इर्द-गिर्द घूम सकती है, अगर आने वाले दशक की सियासी जंग इसी त्रिकोण के बीच सिमटती है, तो बीजेपी खुद को एक ऐसे मुकाबले से बाहर पा सकती है जो राज्य के भविष्य को तय करने वाला है. यही कारण है कि अन्नामलाई का जाना अंततः बीजेपी को किसी चुनावी हार से भी ज्यादा बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है, क्योंकि वोटों की भरपाई करना फिर भी आसान है, लेकिन उस नेता की जगह लेना बेहद मुश्किल है जो तमिलनाडु में पार्टी की पहचान बन चुका था.

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दूसरी ओर, बीजेपी का कहना है कि उनके जाने से पार्टी को कोई नुकसान नहीं हुआ है, तमिलनाडु बीजेपी के अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा, "बीजेपी एक विचारधारा पर आधारित पार्टी है, इस घटनाक्रम का निश्चित रूप से पार्टी पर कोई असर नहीं पड़ेगा. लोकतंत्र में कोई भी नई राजनीतिक पार्टी शुरू करने के लिए स्वतंत्र है. अन्नामलाई के इस्तीफे से पार्टी प्रभावित नहीं होगी."
 

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