दिल्ली हाईकोर्ट में CBI की अपील से केजरीवाल के स्टेटस में क्या बदला, बीजेपी हमलावर क्यों है?

दिल्ली शराब नीति मामले में सीबीआई द्वारा राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती देने के बाद राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है. हाई कोर्ट ने मामले में नोटिस जारी कर पक्षों से जवाब मांगा है. इस बीच बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है.

Advertisement
शराब नीति केस में हाई कोर्ट के आदेश के बाद अरविंद केजरीवाल फिर से बीजेपी के निशाने पर आ गए हैं. (Photo: PTI) शराब नीति केस में हाई कोर्ट के आदेश के बाद अरविंद केजरीवाल फिर से बीजेपी के निशाने पर आ गए हैं. (Photo: PTI)

मृगांक शेखर

  • नई दिल्ली,
  • 10 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 1:08 PM IST

शराब नीति केस के हाई कोर्ट पहुंचते ही दिल्ली में राजनीतिक बहस बदल गई है. राउज एवेन्यू कोर्ट का फैसला आने के बाद बीजेपी ने काफी देर तक चुप्पी साधे रखी थी, जबकि आम आदमी पार्टी के नेता काफी आक्रामक हो गए थे. सीबीआई की अपील पर दिल्ली हाई कोर्ट के रुख ने सब बदल दिया है - अब बीजेपी आम आदमी पार्टी के खिलाफ हमलावर हो गई है.

Advertisement

दिल्ली शराब घोटाला केस में राउज एवेन्यू स्पेशल कोर्ट के अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया सहित सभी 23 आरोपियों को डिस्चार्ज करने के फैसले को सीबीआई ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है. हाई कोर्ट ने इस मामले में सभी पक्षों को नोटिस जारी कर हफ्ते भर में अपना जवाब मांगा है. केस की अगली सुनवाई 16 मार्च को होनी है.

हाई कोर्ट के नोटिस के बाद बीजेपी अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के नेताओं पर नए सिरे से हमलावर हो गई है. दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा का कहना है कि निचली अदालत से बरी होना अंतिम फैसला नहीं होता. पुराने मामलों का जिक्र करते हुए वीरेंद्र सचदेवा कह रहे हैं, पहले भी कई नेताओं को निचली अदालतों से राहत मिली थी, लेकिन बाद में ऊपरी अदालतों में उन्हें सजा हुई. लालू यादव, ए. राजा और कनिमोझी जैसे नेताओं का उदाहरण देते हुए वीरेंद्र सचदेवा का कहना था कि शुरुआती फैसलों में नेताओं को राहत मिली थी, लेकिन बाद में मामलों ने नया मोड़ ले लिया.

Advertisement

हाई कोर्ट के आदेश से क्या बदला

दिल्ली हाई कोर्ट में CBI की तरफ से पैरवी करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने वही बातें दोहराई, जो राउज एवेंयू कोर्ट के फैसले पर सीबीआई के रिएक्शन में देखने को मिला था. गवाहों के बयानों का हवाला देते हुए तुषार मेहता ने
कहा कि कथित साजिश, पैसे के लेन-देन और रिश्वत के भुगतान के बारे में विस्तार से बताया गया है. तुषार मेहता ने दावा किया कि जांच का स्तर इतना उम्दा है कि हमारे पास ईमेल और व्हाट्सएप चैट तक हैं. ये सब कोई मनगढ़ंत या हवा हवाई गप्प या किस्सागोई नहीं है, और ASG ने 10 दिनों तक बहस भी की है, लेकिन कुछ ही दिनों में फैसला आ गया - शीघ्र न्याय हो, लेकिन यह अन्याय में तब्दील नहीं होना चाहिए.

सुनवाई के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने नोटिस जारी करने के साथ ही, कुछ आदेश भी दिए हैं - 

1. हाई कोर्ट ने राउज एवेन्यू कोर्ट के आदेश के उस हिस्से पर रोक लगा दी है, जिसमें सीबीआई के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच की संस्तुति की गई है.

2. हाई कोर्ट का कहना है कि निचली अदालत की कुछ टिप्पणियां तथ्यात्मक रूप से गलत थीं. हाई कोर्ट ने कहा है कि ED के मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया सहित 23 आरोपी आरोपमुक्त नहीं हो सकेंगे.

Advertisement

3. हाई कोर्ट ने कहा कि शराब नीति केस के हवाला मामले में तब तक आगे कोई सुनवाई नहीं होगी जब तक हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी नहीं हो जाती.

4. SG तुषार मेहता का कहना था कि ऐसे मामलों में अक्सर आरोपी राजनीतिक बदले की कार्रवाई के इल्जाम लगाते हैं, लेकिन ऐसा करने से जांच के तथ्यों की गंभीरता कम नहीं हो जाती.

5. सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि स्पेशल कोर्ट का आदेश आपराधिक कानून को पूरी तरह से उलट रहा है. गवाहों के बयानों को मुकदमे की सुनवाई तक पुष्टि की आवश्यकता नहीं होती, उनसे जिरह की जा सकती है.

बीजेपी को मिला हमले का मौका

राउज एवेंयू कोर्ट के फैसले के बाद काफी देर तक खामोशी अख्तियार करने वाली बीजेपी को हाई कोर्ट के आदेश के बाद आम आदमी पार्टी पर हमले का मौका मिल गया है. दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट में सीबीआई की याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार किया जाना न्यायिक प्रक्रिया की मजबूती का संकेत है. वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि झूठ और भ्रम का जीवन ज्यादा लंबा नहीं होता... न्यायिक प्रक्रिया भले ही लंबी हो सकती है, लेकिन अंत में सत्य की ही जीत होती है. 

Advertisement

1. दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी स्पेशल कोर्ट का पूरा सम्मान करती है, लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा सीबीआई अधिकारियों के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर रोक लगाना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है. 

2. सीनियर वकीलों का जिक्र करते हुए वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि निचली अदालत के फैसले में कई खामियां बताई गई हैं... जस्टिस रंजन गोगोई कमेटी की रिपोर्ट को दिल्ली सरकार द्वारा नजरअंदाज किया गया. एक आरोपी जाकिर खान पर फर्जी ईमेल के जरिए जनमत बनाने की कोशिश का आरोप भी सामने आया है.

3. दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष का दावा है कि गोवा चुनाव में हवाला भुगतान के लिए इस्तेमाल किए गए दस रुपये के नोट का जिक्र जांच में सामने आया है, जो कथित तौर पर अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के फोन में पाया गया था. 

वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा चलाए जा रहे मामले को जारी रखने की अनुमति देकर दिल्ली हाई कोर्ट ने न्यायिक प्रक्रिया को और मजबूत किया है, जिससे जांच एजेंसियों को अपना काम पूरा करने का मौका मिलेगा.

आम आदमी पार्टी का बचाव

आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आरोप दोहराया है कि बीजेपी के इशारे पर सीबीआई ने आम आदमी पार्टी के नेताओं के खिलाफ साजिश रची थी. कहते हैं, राउज एवेंयू कोर्ट के फैसले के बाद सीबीआई ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपील दाखिल की, लेकिन वहां से भी निचली अदालत के आदेश पर कोई स्टे नहीं मिला... यह साफ हो गया है कि पूरा मामला कमजोर था और राजनीतिक बदले की भावना से तैयार किया गया था. 

Advertisement

1. अपने नेताओं के बचाव में सौरभ भारद्वाज का कहना है, निचली अदालत से AAP नेताओं को मिले डिस्चार्ज के आदेश पर हाईकोर्ट ने कोई रोक नहीं लगाई है, जिससे यह साबित होता है कि मामला कमजोर और मनगढ़ंत था.

2. सौरभ भारद्वाज का दावा है, डिस्चार्ज होना बरी होने से भी बड़ा फैसला होता है, क्योंकि बरी तब किया जाता है जब पूरा मुकदमा चल चुका हो... जबकि इस मामले में अदालत ने शुरू में ही इसे ट्रायल के योग्य नहीं माना. 

3. सौरभ भारद्वाज का यह भी दावा है कि केंद्र सरकार ने अदालत में अधिकारियों के खिलाफ संभावित कार्रवाई को रोकने की मांग की है. 
 
सौरभ भारद्वाज का कहना है, केंद्र सरकार की कोशिश है कि प्रवर्तन निदेशालय की जांच जारी रहे, जबकि सीबीआई का आधारभूत मामला ही अदालत में कमजोर साबित हो चुका है. 

शराब नीति केस का मामला जिस तरह आगे बढ़ रहा है, उसमें राजनीतिक बहस का मौका जरूर मिला है, लेकिन कानूनी तौर पर कुछ अलग नहीं हुआ है. जैसे एक बार आम आदमी पार्टी को बोलने का मौका मिला था, अब बीजेपी को अवसर मिल गया है. निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील और सुनवाई के बाद नोटिस जारी होना सामान्य कानूनी प्रक्रिया है. हां, सीबीआई के खिलाफ टिप्पणी और अफसरों के खिलाफ जांच पर हाई कोर्ट की रोक, एजेंसी के लिए राहत की बात है. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement