चीतों के घर में दशकों बाद नजर आई जंगली बिल्ली, कैमरे में कैद हुई दुर्लभ तस्वीर; कूनो नेशनल पार्क में खुशखबरी

Kuno National Park Rare Caracal: मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है. कूनो में तैयार हुए इकोसिस्टम की वजह से अब दशकों से गायब और विलुप्तप्राय वन्यजीव यहां दोबारा लौटने लगे हैं.

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पहली बार कैमरा ट्रैप में स्याहगोश (जंगली बिल्ली).(Photo:ITG) पहली बार कैमरा ट्रैप में स्याहगोश (जंगली बिल्ली).(Photo:ITG)

aajtak.in

  • श्योपुर,
  • 06 जून 2026,
  • अपडेटेड 8:29 PM IST

MP News: श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में 'प्रोजेक्ट चीता' का असर अब पूरे फॉरेस्ट एरिया पर साफ दिखाई देने लगा है. इस प्रोजेक्ट का मकसद सिर्फ चीतों को बसाना नहीं, बल्कि पूरे ईको सिस्टम को दोबारा बहाल करना था और आज इसके नतीजे बेहद चौंकाने वाले हैं.

हाल ही में हुए एक कैमरा ट्रैप सर्वे में कूनो के जंगलों में बेहद दुर्लभ माने जाने वाले वन्य जीव स्याहगोश या जंगली बिल्ली (Caracal) की मौजूदगी दर्ज की गई है.

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दशकों बाद इस जीव की तस्वीरें पहली बारकैमरे में कैद हुई हैं, जो इसके दोबारा लौटने का पुख्ता संकेत हैं.  

चीतों के बाद अब कैराकल की एंट्री

कूनो में पहली बार दर्ज हुए ये बड़े बदलाव

जंगली उल्लू: दुनिया से विलुप्त माने गए इस दुर्लभ वन उल्लू को कूनो के इतिहास में 113 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद पहली बार दर्ज किया गया है. दिसंबर 2025 से यह दुर्लभ उल्लू कूनो के जंगलों में नियमित रूप से देखा जा रहा है.

कूनो की पारोंद बीट में दिखा विलुप्तप्राय शिकारी पक्षी.

जंगली कुत्ता: कूनो के लिखित इतिहास में पहली बार जंगली कुत्तों (ढोल) की मौजूदगी पाई गई है, जिसे विशेषज्ञ कूनो की बेहतर होती पारिस्थितिकी का सबसे बड़ा और खास संकेत मान रहे हैं.

कूनो में पहली बार देखे गए जंगली ढोल.

भारतीय भेड़िया: पहले गर्मियों का मौसम आते ही भेड़िए पानी और शिकार की कमी से इस इलाके को छोड़कर पलायन कर जाते थे, लेकिन अब सुधरे हालातों के चलते वे यहां के स्थायी निवासी बन चुके हैं.

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अब कूनो में भेड़िया भी लौट आए हैं.

सोलर पंप  ने मिटाया पानी का संकट
कूनो के इस अभूतपूर्व कायाकल्प के पीछे वन विभाग की एक बेहतरीन और आधुनिक जल प्रबंधन नीति है. कूनो के जिन पथरीले और ऊंचे इलाकों में पानी की घोर किल्लत रहती थी, और जिसके डर से वन्यजीव गर्मियों में पलायन कर जाते थे, वहां अब कूनो नदी का पानी पहुंच रहा है. इस पानी की पहुंच को सुगम और निरंतर बनाने के लिए वन विभाग ने मॉडर्न टेक्नोलॉजी यानी सोलर पंप का सहारा लिया है. इन सोलर पंपों की मदद से गर्मियों में भी कूनो के तालाब पानी से लबालब भरे रहते हैं.

अब ऐसी दिखती है कूनो की जादुई शाम
आज कूनो का नजारा पूरी तरह बदल चुका है. मवेशियों के गलों में बजने वाली घंटियों के शोर का स्थान अब जंगली सन्नाटे, पक्षियों की मधुर चहचहाहट और वन्यजीवों की गूंजती पुकारों ने ले लिया है. शाम ढलते ही धूल भरे रास्तों से चीतलों की लंबी कतारें निकलती हैं और सांभर तालाबों के किनारे शांत खड़े दिखाई देते हैं. नीलगाय और तेंदुए अब पानी की तलाश में कहीं और भटकने के बजाय कूनो के इस ग्रीष्म जंगल को अपना स्थायी आशियाना मानकर यहाँ के तालाबों के आसपास नरम कदमों से घूमते नजर आते हैं.

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इसकी वजह है कि कूनो नेशनल पार्क के जिन पथरीले और ऊंचे इलाकों में पानी की कमी के कारण वन्यजीव गर्मी के मौसम में पलायन कर जाते थे, वहां अब वन विभाग के बेहतरीन मैनेजमेंट से कूनो नदी का पानी पहुंच रहा है. पानी की इस पहुंच को बढ़ाने के लिए पार्क में मॉडर्न टेक्नोलॉजी यानी सोलर पंप का सहारा लिया गया है.

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