पहली महिला उबर ड्राइवर शन्‍नो बनीं मिसाल, सोशल मीडिया पर मिली वाहवाही

कहते हैं कि अगर कुछ करने की ठान लो तो सारी कठिनाईयां छोटी पड़ जाती हैं. इसकी जीती-जागती मिसाल हैं शन्‍नो, आप भी जानिए उनके बारे में...

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शन्‍नो बेगम शन्‍नो बेगम

सोशल मीडिया पर आजकल दिल्‍ली के एक उबर ड्राइवर की काफी चर्चा है. अब आप सोच रहे होंगे कि इसमें ऐसा क्‍या खास है... दिल्‍ली में तो बहुत से उबर ड्राइवर हैं.

खास बात ये है कि ये उबर ड्राइवर एक महिला है. इनका नाम है शन्‍नो बेगम. शन्‍नो बेगम दिल्‍ली में उबर टैक्‍सी सर्विस की पहली महिला ड्राइवर हैं. शन्‍नो ज्‍यादा पढ़ी-लिखी नहीं हैं, इसलिए अपने पति की मौत के बाद उन्‍होंने ड्राइवरी सीख इसे अपना पेशा बनाया.

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शन्‍नो के तीन बच्‍चे हैं. शन्‍नो बताती हैं कि जब उन्‍होंने इसे पेशे के तौर पर अपनाया तो उन्‍हें काफी सवालों का सामना करना पड़ा. पर अपने बच्‍चों के पालन-पोषण के लिए उन्‍होंने वही किया जो उन्‍हें सही लगा.

प्रेरित करती है शन्‍नो की कहानी
शन्‍नो की कहानी किसी को भी प्रेरणा दे सकती है. पति के गुजरने के बाद उसने सबसे पहले सब्‍जी की रेहड़ी लगाई. पर उससे जो आमदनी होती थी उससे बच्‍चों को पालना मुश्किल होने लगा. फिर वो एक अस्‍पताल में काम करने लगी. जब वहां से भी आमदनी इतनी नहीं हुई कि वे बच्‍चों को पढ़ा सकें तो उसने घरों में खाना पकाने का काम शुरू किया. इस काम से वे 6 हजार रुपए प्रतिमाह कमा लेती थीं लेकिन ये भी काफी नहीं था.


किसने की मदद
शन्‍नो बताती हैं कि आजाद फाउंडेशन नाम के एक एनजीओ ने उनकी मदद की. उनकी मदद से शन्‍नो ने ड्राइविंग सीखी. इंडिया टुडे से बातचीत में शन्‍नो ने बताया कि उन्‍होंने पहले दो साल मेहनत करके 10वीं पास की और फिर ड्राइविंग में करियर बनाया.

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