Which salt is good for health: सफेद, काला या सेंधा... कौन सा नमक है अधिक हेल्दी? डॉक्टर ने समझाया

क्या आप भी पिंक सॉल्ट या काला नमक को टेबल सॉल्ट से ज्यादा हेल्दी मानकर खा रहे हैं? अगर हां, तो यह खबर आपके लिए है. क्या वाकई इन साल्ट्स में कोई जादूई क्वालिटी है या ये सिर्फ एक मार्केटिंग भ्रम है और क्यों डॉक्टर आज भी आयोडीन युक्त नमक खाने की सलाह देते हैं.

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नमक के बारे में अलग-अलग लोग अपनी राय रखते हैं. (Photo: AI Generated) नमक के बारे में अलग-अलग लोग अपनी राय रखते हैं. (Photo: AI Generated)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 06 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 4:06 PM IST

Which salt is good for health: आजकल सोशल मीडिया पर पिंक सॉल्ट, काला नमक और रॉक सॉल्ट के हेल्थ बेनिफिट्स को लेकर काफी चर्चा है. कई लोग टेबल सॉल्ट को छोड़कर इन ऑप्शंस की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं, यह सोचकर कि ये ज्यादा हेल्दी हैं. लेकिन क्या सच में इनमें कोई बड़ा अंतर है या ये सिर्फ एक मार्केटिंग ट्रेंड है? ऑनकोलॉजिस्ट डॉ. जयेश शर्मा ने इस विषय पर अपनी राय शेयर की है. उनके मुताबिक, चाहे कोई भी नमक हो, उसमें 97 से 99 प्रतिशत तक सोडियम क्लोराइड ही होता है इसलिए किसी भी तरह के नमक का अधिक सेवन सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है.

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नमक के प्रकार और सच्चाई

मार्केट में मिलने वाले रॉक सॉल्ट, हिमालयन पिंक सॉल्ट या काला नमक, सब लगभग एक जैसे ही हैं. डॉ. शर्मा के अनुसार, इन सभी साल्ट्स में सोडियम की मात्रा बहुत अधिक होती है. इनमें मौजूद अन्य मिनरल्स केवल 1 से 2 प्रतिशत ही होते हैं जो हमारी रोजाना की मिनरल जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी नहीं हैं.

यदि आप सिर्फ मिनरल्स के लिए नमक ज्यादा खाएंगे तो सोडियम का ओवरडोज शरीर को नुकसान पहुंचाएगा इसलिए कोई भी नमक हो उसे सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए.

हेल्थलाइन के मुताबिक, पिंक हिमालयन सॉल्ट और टेबल सॉल्ट के सोडियम कंटेंट में बहुत मामूली अंतर है और पिंक सॉल्ट के मिनरल फायदे बहुत सीमित हैं.

एंटी-केकिंग एजेंट्स का डर

सोशल मीडिया पर अक्सर साल्ट में इस्तेमाल होने वाले एंटी-केकिंग एजेंट्स को 'जहरीला' या 'स्लो पॉइजन' बताकर डराया जाता है. डॉ. शर्मा स्पष्ट करते हैं कि ये एजेंट्स बहुत ही कम मात्रा (1 प्रतिशत से भी कम) में होते हैं और इनसे सेहत को कोई खास खतरा नहीं है.

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McGill University के अनुसार, एंटी-केकिंग एजेंट्स जैसे सोडियम फेरोसायनाइड को सुरक्षित माना जाता है क्योंकि इसमें मौजूद साइनाइड आयरन के साथ मजबूती से बंधा होता है और शरीर के लिए हानिकारक नहीं होता.

आयोडीन की कमी को नजरअंदाज न करें

नमक का सबसे जरूरी काम हमारे शरीर में आयोडीन की सप्लाई करना है. भारत के कई हिस्सों में आज भी पानी और मिट्टी में आयोडीन की कमी है जिससे बच्चों का मानसिक विकास प्रभावित हो सकता है और महिलाओं को थायराइड की समस्या हो सकती है. इसलिए आयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल करना बहुत जरूरी है. भले ही आप काला नमक या पिंक सॉल्ट का स्वाद के लिए इस्तेमाल करें लेकिन अपनी डाइट में आयोडीन वाले साल्ट को जरूर शामिल रखें.

भारत में आज भी आयोडीन की कमी एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता है, जिसके लिए पर्याप्त आयोडीन युक्त नमक का सेवन अनिवार्य है.

कौन सा नमक खाएं?

रिसर्च और मेडिकल एक्सपर्ट्स की सलाह के अनुसार, नमक का चुनाव करते समय सबसे महत्वपूर्ण कारक आयोडीन है. पिंक, काला या रॉक सॉल्ट के नाम पर मिलने वाले महंगे विकल्प सोडियम क्लोराइड के मामले में सामान्य नमक से अलग नहीं हैं. 

रिसर्च बताती है कि पिंक हिमालयन सॉल्ट और टेबल सॉल्ट के सोडियम कंटेंट में बहुत मामूली अंतर होता है और पिंक सॉल्ट में पाए जाने वाले अतिरिक्त मिनरल्स की मात्रा इतनी कम होती है कि वे शरीर की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में प्रभावी नहीं होते हैं.

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इसलिए नमक के रंग या प्रकार (सफेद, काला या सेंधा) के बजाय आपको पैकेट पर यह देखना चाहिए कि वह 'आयोडीन युक्त' (Iodized) है या नहीं. बिना आयोडीन वाला नमक, चाहे वह कितना भी 'नेचुरल' क्यों न हो, स्वास्थ्य के लिए अधूरा है.

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