Heavy medications and hair loss: सिंगर और रैपर यो यो हनी सिंह ने हाल ही में खुलासा किया कि वे पूरी तरह गंजे हो चुके हैं और जो बाल दिखते हैं, वह एक विग है. उन्होंने बताया कि लगभग 7 साल तक चली बाइपोलर डिसऑर्डर की हैवी मेडिकेशन्स के कारण उनके सारे बाल झड़ गए हैं. इस खबर के बाद लोग हैरान हैं कि मानसिक बीमारी की दवाइयां बालों पर इतना खतरनाक असर कैसे डाल सकती हैं? मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इन दवाओं का सीधा संबंध हेयर लॉस से होता है. सिर्फ मेंटल हेल्थ नहीं अन्य हैवी डोज वाली मेडिसिन आपके बालों पर कैसे असर डालती हैं, इस बारे में भी आप स्टोरी में जानेंगे.
क्या कहती है मेडिकल रिसर्च?
हेल्थलाइन के मुताबिक, मेंटल डिजीज के ट्रीटमेंट में इस्तेमाल होने वाली दवाइयां बालों की सेहत को नुकसान पहुंचाती हैं. बाइपोलर डिसऑर्डर के इलाज में इस्तेमाल होने वाले मूड स्टेबलाइजर्स जैसे कि लिथियम (Lithium) और वालप्रोएट (Valproate) के सामान्य साइड इफेक्ट्स में हेयर लॉस यानी बालों का झड़ना शामिल है. यह दवाइयां दिमाग के केमिकल्स को बैलेंस करने का काम करती हैं लेकिन इनका असर शरीर के दूसरे हिस्सों पर भी पड़ता है.
आसान भाषा में समझें तो मूड स्टेब्लाइर्स जवाएं खासकर लिथियम और वालप्रोएट, बालों की नॉर्मल ग्रोथ साइकिल को डिस्टर्ब कर सकती हैं जिससे बाल रेस्टिंग फेज में चले जाते हैं और कुछ हफ्तों या महीनों बाद हेयर फॉल दिखने लगता है.
इस कंडीशन में बाल बहुत तेजी से टूटने लगते हैं. इसके अलावा, लंबे समय तक लिथियम जैसी दवाओं का सेवन करने से थायराइड फंक्शन कम हो सकता है, जो गंभीर हेयर फॉल की एक और बड़ी वजह है.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह प्रॉब्लम आमतौर पर टेलोजन एफ्लूवियम की तरह होती है यानी बाल जड़ से एक साथ कमजोर नहीं होते, बल्कि ज्यादा संख्या में शेडिंग फेज में चले जाते हैं. लिथियम की वजह से थायराइड प्रॉब्लम भी हो सकती है और हाइपोथायराइडिज्म खुद हेयर फॉल का कॉमन कारण है.
वैप्रोएट के केस में हेयर लॉस डोज़-डिपेंडेंट बताया गया है और स्टडीज़ में बायोटिनिडेज एक्टिविटी कम होने जैसी वजहें भी सामने आई हैं. रिसर्च रिव्यू के अनुसार वैप्रोएट, लिथियम और कार्बामाजेपिन जैसी दवाओं से हेयर लॉस हो सकता है लेकिन दवा कम करने या बंद करने पर हेयर रीग्रोथ अक्सर वापस आ जाती है.
क्या यह गंजापन हमेशा के लिए होता है?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि दवाइयों के कारण होने वाला हेयर लॉस ज्यादातर अस्थायी होता है. जब मरीज डॉक्टर की सलाह पर दवाइयां बंद करता है या उनकी डोज कम होती है तो बाल वापस आने लगते हैं. हालांकि, हनी सिंह के मामले में दवाइयों का दौर करीब 7 साल तक लगातार चला. इतने लंबे समय तक हैवी मेडिकेशन पर रहने के कारण हेयर फॉलिकल्स स्थाई रूप से कमजोर हो जाते हैं जिससे दोबारा नेचुरल बाल आना नामुमकिन सा हो जाता है.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क