साउथ एशिया, खासकर भारत में मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज और प्री-डायबिटीज के मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं. जेनेटिक फैक्टर्स और ज्यादा कार्बोहाइड्रेट खाने की आदतों की वजह से यहां के लोगों में इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या आम हो चुकी है. इस गंभीर हेल्थ क्राइसिस से निपटने के लिए एक्सपर्ट्स ने एक आसान और असरदार तरीका निकाला है जिसे 'हेल्दी प्लेट मेथड' कहा जा रहा है.
यदि आप भी खुद को इन बीमारियों से बचाना चाहते हैं तो आपको अपनी रोज की थाली का पूरा बैलेंस बदलना होगा. नए नियम के मुताबिक, आपकी थाली में आधी सब्जियां और बाकी हिस्से में प्रोटीन और चावल होने चाहिए.
क्या है थाली का नया फॉर्मूला?
आमतौर पर थाली में चावल या रोटी की मात्रा सबसे अधिक होती है और सब्जियां या दालें बहुत कम. लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, बीमारियों को दूर रखने के लिए अब थाली को तीन अलग-अलग हिस्सों में बांटना होगा. थाली का आधा (50%) हिस्सा नॉन-स्टार्च वाली हरी और रंग-बिरंगी सब्जियों से भरा होना चाहिए.
इसके बाद थाली के बचे हुए आधे हिस्से के 2 बराबर टुकड़े करें. यानी एक-चौथाई (25%) हिस्से में प्रोटीन जैसे दाल, पनीर, अंडा या लीन मीट होना चाहिए और बाकी के एक-चौथाई (25%) हिस्से में ही चावल या रोटी जैसी चीजें होनी चाहिए.
चावल और कार्ब्स क्यों बन रहे दुश्मन?
मेडिकल ऑर्गेनाइजेशन सफर हेल्थ के एक्सपर्ट्स के मुताबिक, साउथ एशियन्स के पारंपरिक खानपान में व्हाइट राइस और मैदा जैसी रिफाइंड चीजें ज्यादा इस्तेमाल होती हैं. जब हम जरूरत से ज्यादा कार्बोहाइड्रेट खाते हैं तो शरीर में इंसुलिन का लेवल अचानक बढ़ जाता है. इंसुलिन रेजिस्टेंस होने पर यह एक्स्ट्रा कार्ब्स एनर्जी में बदलने के बजाय सीधे लिवर और फैट सेल्स में जमा होने लगते हैं जिससे वजन और पेट की चर्बी तेजी से बढ़ती है.
डायबिटीज कंट्रोल करने में कैसे मिलेगी मदद?
इस प्लेट मेथड को लेकर स्टेंडफोर्ड मेडिसिन के एक प्रोजेक्ट में भी बताया गया है कि अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन का यह फॉर्मूला ब्लड शुगर को अचानक बढ़ने से रोकता है. जब आप थाली में सब्जियों की मात्रा बढ़ाते हैं तो शरीर को भरपूर फाइबर मिलता है. फाइबर खाने को धीरे-धीरे पचाता है, जिससे ग्लूकोज खून में एक साथ नहीं घुलता.
प्रोटीन और सब्जियों का सही सिलेक्शन
डायबिटीज कनाडा की गाइडलाइंस का कहना है, यदि आप शाकाहारी हैं तो अपनी डाइट में सुधार करने के लिए सामान्य गेहूं के आटे में चना, सोयाबीन या बाजरे का आटा मिला सकते हैं. थाली के प्रोटीन वाले हिस्से को पूरा करने के लिए छोले, राजमा, दालें और लो-फैट पनीर बेहतरीन ऑपशंस हैं.
वहीं सब्जियों में आलू या अरबी जैसी स्टार्च वाली चीजों की जगह भिंडी, गोभी, बैंगन और पालक जैसी नॉन-स्टार्च सब्जियों को तरजीह दें. अपनी थाली के इस सिंपल रीस्ट्रक्चरिंग से आप बिना भूखे रहे आसानी से वजन कम कर सकते हैं और प्री-डायबिटीज को रिवर्स कर सकते हैं.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क