टीनेजर्स के सामने सुस्त कोरोना! 20 साल से कम उम्र वाले लोगों को खतरा कम: WHO

एक रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर 20 साल से नीचे 10 फीसद से भी कम लोग वायरस की चपेट में आए हैं.

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aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 16 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 4:38 PM IST
  • 20 साल से नीचे 10 फीसद से भी कम लोग वायरस के शिकार
  • बच्चों और किशोरों पर वायरस का अलग तरह से प्रभाव

कोरोना वायरस की दहशत हर दिन बढ़ी रही है. इस भयंकर बीमारी का सबसे कम असर टीनेजर्स पर देखने को मिला है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर 20 साल से नीचे 10 फीसदी से भी कम लोग वायरस से संक्रमित हुए हैं. अब तक कोविड-19 से 20 साल से कम उम्र के 0.2 फीसदी से भी कम लोगों की मौत हुई है. WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) के प्रमुख ने मंगलवार को कहा कि बच्चों और युवाओं में इस भयंकर बीमारी के खतरे और मौत के आंकड़ों को समझने के लिए अभी शोध की आवश्यकता है.

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WHO के डायरेक्टर जनरल टेड्रस अधनोम ने कहा, 'हम जानते हैं कि ये वायरस (Corona virus) बच्चों की जान ले सकता है, लेकिन बच्चों में इसका हल्का इंफेक्शन दिखता है.' WHO ने भी माना कि बच्चों और युवाओं में कोरोना से संक्रमित और उससे मरने वालों की संख्या काफी कम है. संक्रमित बच्चों और किशोरों में संभावित लॉन्ग टर्म हेल्थ इफेक्ट (Long terms health effects) छिपे रहते हैं.

हालांकि, बच्चों पर वायरस के सबसे गंभीर स्वास्थ्य प्रभाव कम ही देखने को मिलते हैं. टेड्रस अधनोम ने चेतावनी देते हुए कहा कि बच्चों और किशोरों पर अलग तरह से वायरस का प्रभाव पड़ा है. उन्होंने कई ऐसे देशों का उदाहरण दिया जहां जरूरी न्यूट्रिशन और इम्यूनाइजेशन (nutrition and immunization ) की सेवाएं बाधित हो चुकी हैं. लाखों बच्चे शिक्षा हासिल करने के लिए स्कूल तक नहीं जा पा रहे हैं.

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WHO प्रमुख ने कहा कि कई देशों में स्कूल खुल चुके हैं. ऐसे में बच्चों की सुरक्षा का जिम्मा ना सिर्फ सरकार और परिवारों को उठाना चाहिए, बल्कि समुदाय में रहने वाले हर इंसान तरीकों के साथ इनका बचाव करना चाहिए. जिन देशों में अभी तक स्कूल बंद पड़े हैं, वहां डिस्टेंस लर्निंग के जरिए बच्चों की शिक्षा में निरंतरता की गारंटी लेनी चाहिए.

 

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