गर्मी के बाद बारिश की बूंदे राहत देने का काम करती हैं लेकिन वातावरण की नमी का हमारे खानपान और सेहत पर भी काफी असर पड़ता है. नमी के चलते प्यास कम लगती है. नतीजा ये होता है कि हम पानी पीना कम कर देते हैं. कम पानी पीने की वजह से सिस्टाइटिस होने का खतरा बढ़ जाता है.
पुरुषों की तुलना में औरतों को सिस्टाइटिस होने का खतरा आठ गुना अधिक होता है. जब हमारे शरीर में लिक्विड की मात्रा कम हो जाती है तो सिस्टाइटिस का खतरा बढ़ जाता है. urinary bladder में इंफेक्शन हो जाने को ही सिस्टाइटिस कहते हैं. मानसून में प्यास कम लगने की सबसे बड़ी वजह ये है कि इस दौरान शरीर से कम पानी अवशोषित होता है.
सिस्टाइटिस, औरतों के लिए सिस्टाइटिस इंफेक्शन प्रेग्नेंसी के दौरान भी हो सकता है. इंफेक्शन हो जाने से प्रेग्नेंसी और फिर डिलीवरी में भी प्रॉब्लम आ सकती है.
सिस्टाइटिस के लक्षण:
1. यूरीन डिस्चार्ज के समय दर्द और जलन.
2. बार-बार यूरीन डिस्चार्ज होना.
3. कमर में दर्द.
4. तेज बुखार आना.
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क्या हैं उपाय?
1. अधिक से अधिक लिक्विड चीजे लें.
2. बहुत अधिक मात्रा में कैफीन और सॉफ्ट ड्रिंक लेने से बचें.
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