गर्भावस्था की वजह से ट्रेनिंग से बाहर हुई मध्य प्रदेश कैडर की IPS अधिकारी उर्वशी सेंगर को फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है. अदालत ने चल रही ट्रेनिंग में उन्हें शामिल कराने का आदेश देने से इनकार कर दिया. हालांकि कोर्ट ने केंद्र के इस बयान को रिकॉर्ड पर लिया कि इससे उनकी वरिष्ठता पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) ने मेडिकल तौर पर फिट होने की शर्त पर महिला अधिकारी को ट्रेनिंग में शामिल होने की अनुमति दी थी. लेकिन पुलिस अकादमी ने इस आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी. हाईकोर्ट ने 22 जून को CAT के आदेश पर रोक लगा दी और कहा कि यह नियम महिला अधिकारी और उसके बच्चे, दोनों के हितों को ध्यान में रखकर बनाया गया है.
यह मामला मध्य प्रदेश कैडर की 2023 बैच की IPS अधिकारी उर्वशी सेंगर से जुड़ा है. ट्रेनिंग के दौरान वह गर्भवती हो गई थीं. बच्चे के जन्म के बाद मेडिकल फिटनेस हासिल करने पर उन्होंने जून में शुरू हुए फेज-II प्रशिक्षण में शामिल होने की अनुमति मांगी थी, लेकिन अकादमी ने 1993 के गृह मंत्रालय के कार्यालय ज्ञापन का हवाला देते हुए उनकी मांग ठुकरा दी.
कोर्ट ने केंद्र से पूछा अहम सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र से यह भी पूछा कि अगर कोई महिला अधिकारी मेडिकल तौर पर फिट है और ट्रेनिंग के लिए तैयार है, तो उसे मातृत्व लाभ के नाम पर उसके अधिकारों से क्यों रोका जाए. कोर्ट ने इस सवाल पर केंद्र का पक्ष भी सुना, लेकिन अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया.
1993 के नियम में क्या है?
1993 के गृह मंत्रालय के कार्यालय ज्ञापन के मुताबिक, अगर कोई महिला IPS प्रोबेशनर ट्रेनिंग के दौरान गर्भवती हो जाती है, तो उसकी ट्रेनिंग रोक दी जाती है. उसे प्रसव के एक साल बाद दोबारा प्रशिक्षण में शामिल होने की अनुमति मिलती है. उर्वशी सेंगर ने इसी नियम को चुनौती दी है.
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि पहली नजर में यह नीति महिलाओं को राहत देने के लिए बनाई गई थी, न कि उन्हें अयोग्य ठहराने के लिए. हालांकि अदालत ने इस मामले में कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की और मूल याचिका पर मेरिट के आधार पर सुनवाई करने को कहा.
संजय शर्मा