2 जून को केजरीवाल को करना होगा सरेंडर, सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने नहीं स्वीकारी और मोहलत की याचिका

दिल्ली के सीएम केजरीवाल के अंतरिम जमानत बढ़ाने की याचिका सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने स्वीकार नहीं की है. बता दें कि केजरीवाल ने यह कहकर अंतरिम जमानत की याचिका लगाई थी कि उन्हें कई मेडिकल संबंधी ढेर सारी जांंचे कराना हैं. हालांकि, उनकी याचिका स्वीकार नहीं की गई.

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Arvind Kejriwal (File Photo) Arvind Kejriwal (File Photo)

कनु सारदा / संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 29 मई 2024,
  • अपडेटेड 1:23 PM IST

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलती दिखाई दे रही है. उन्हें अब 2 जून को कोर्ट के सामने सरेंडर करना होगा. बता दें कि सीएम केजरीवाल ने अपनी अंतरिम जमानत 7 दिन के लिए आगे बढ़ाने की अपील की थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने उनकी यह याचिका स्वीकार ही नहीं की.

सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की अंतरिम जमानत की अवधि 7 दिन बढ़ाने की याचिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है. रजिस्ट्री का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने सीएम को ट्रायल कोर्ट में जमानत याचिका दायर करने की छूट दी है. इसका मतलब साफ है कि केजरीवाल को 2 जून तक सरेंडर करना ही होगा.

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सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने अरविंद केजरीवाल के अंतरिम जमानत को सात दिन बढ़ाने की मांग वाली याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने के अनुरोध को खारिज कर दिया. रजिस्ट्री ने पिछले अदालत के आदेश का हवाला दिया, जिसमें उनकी अंतरिम जमानत को 1 जून तक सीमित कर दी गई थी और उन्हें नियमित जमानत के लिए निचली अदालत जाने की स्वतंत्रता दी थी.

मंगलवार को भी सुप्रीम कोर्ट से मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को कोई राहत नहीं मिली. केजरीवाल की अंतरिम जमानत अवधि 7 दिन बढ़ाने की गुहार वाली अर्जी को अवकाशकालीन पीठ ने CJI के पास भेज दिया था. इसकी प्रक्रिया भी रजिस्ट्री के जरिए ही होती है. रजिस्ट्रार ही अर्जेंट मैटर में आवश्यकता और अनिवार्य परिस्थिति के मद्देनजर निर्णय लेते हैं कि इसे चीफ जस्टिस तक भेजना कितना उचित है. 

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हालांकि मंगलवार को अवकाशकालीन पीठ ने कह दिया था कि CJI डी वाई चंद्रचूड़ ही तय करेंगे कि केजरीवाल की याचिका पर सुनवाई कब हो और कौन सी पीठ करे. सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस केवी विश्वनाथन ने केजरीवाल के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने सवाल किया कि जब पिछले हफ्ते बेंच के एक सदस्य जस्टिस दीपांकर दत्ता वेकेशन बेंच में थे तो आपने ये मेंशन क्यों नहीं किया? इस पर कहा गया कि 25 मई को ही डॉक्टर ने केजरीवाल की शुरुआती जांच रिपोर्ट पर कहा कि पैट स्कैन सहित कई तरह की जांच करने की जरूरत है. इस पर अदालत ने कहा कि ये मामला पिछली बार 17 मई को सुना गया था. हम इसे CJI को पास भेजते हैं.

इलाज कराने के लिए मांगा था 7 दिन का और समय

बता दें कि हाल ही में केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी, जिसमें CM अपनी अंतरिम जमानत 7 दिन बढ़ाने की मांग की थी. आम आदमी पार्टी के मुताबिक सीएम केजरीवाल को अभी PET-CT स्कैन के साथ ही कई दूसरे टेस्ट से गुजरना है. इसलिए उन्होंने जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट से 7 दिन का समय मांगा था.

लोकसभा चुनाव देश के लिए अहम: जस्टिस खन्ना

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बता दें कि 10 मई को सुप्रीम कोर्ट से अरविंद केजरीवाल को जमानत मिल गई थी. उन्हें 1 जून तक के लिए अंतरिम जमानत दी गई थी. जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच ने अंतरिम जमानत का आदेश पारित करते हुए कहा था कि 'लोकसभा चुनाव इस साल की सबसे महत्वपूर्ण घटना है.'सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा था करोड़ों मतदाता अगले 5 साल के लिए इस देश की सरकार चुनने के लिए अपना वोट डालेंगे. आम चुनाव लोकतंत्र को जीवन शक्ति प्रदान करते हैं. इसके महत्व को देखते हुए अभियोजन पक्ष की के उस तर्क को खारिज किया जाता है, जिसमें उन्होंने कहा था कि जमानत देने से राजनेताओं को इस देश के सामान्य नागरिकों की तुलना में लाभकारी स्थिति में होने का फायदा मिलेगा.'

21 मार्च से जेल में थे सीएम केजरीवाल

दिल्ली के कथित शराब घोटाले में ईडी ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को 21 मार्च को गिरफ्तार किया था. इससे पहले ईडी ने उन्हें मामले में पूछताछ के लिए 9 समन जारी किए थे. हालांकि, केजरीवाल किसी भी समन पर पेश नहीं हुए थे. केंद्रीय जांच एजेंसी का आरोप है कि वह घोटाले के मुख्य साजिशकर्ता थे और सीधे तौर पर शराब कारोबारियों से रिश्वत मांगने में शामिल थे. इन आरोपों को खारिज करने वाली AAP कहती रही है कि दिल्ली में कोई नेतृत्व परिवर्तन नहीं होगा और मुख्यमंत्री केजरीवाल जेल से ही सरकार चलाएंगे.

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