पुश्तैनी जायदाद बेचने के मामले में इंदौर राजघराने के वारिसों को राहत, नहीं होगी EOW जांच!

सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षकारों की दलील सुनने के बाद गुरुवार को अपना फैसला सुनाया. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को दरकिनार करते हुए ट्रस्ट के खासगी न्यासियों के खिलाफ आर्थिक अपराध शाखा की जांच कराने की बात कही गई थी.

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सुप्रीम कोर्ट (File Photo) सुप्रीम कोर्ट (File Photo)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 22 जुलाई 2022,
  • अपडेटेड 2:12 AM IST
  • कोर्ट ने जांच को गैर जरूरी बताया
  • ट्रस्टियों पर लगे थे हेराफेरी के आरोप

पुश्तैनी जायदाद बेचने के मामले में महारानी अहिल्या बाई होलकर के वंशजों को सुप्रीम कोर्ट से आंशिक राहत मिल गई है. यह विवाद हरिद्वार में स्थित ट्रस्ट की एक संपत्ति की बिक्री का था. होलकर वंशजों के बीच राजघराने की संपदा के रखरखाव के लिए बने ट्रस्ट को जानकारी दिए बगैर संपत्ति बेचने का विवाद में सुप्रीम कोर्ट में था.

सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षकारों की दलील सुनने के बाद गुरुवार को अपना फैसला सुनाया. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को दरकिनार करते हुए ट्रस्ट के खासगी न्यासियों के खिलाफ आर्थिक अपराध शाखा की जांच कराने की बात कही गई थी. आरोपी ट्रस्टियों में दो इंदौर के पूर्व महाराज यशवंत राव होलकर की बेटी और दामाद थे. ये दोनों महारानी अहिल्या बाई होलकर की छठी पीढ़ी में आते हैं.

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मध्य प्रदेश सरकार और खासगी यानी अहिल्याबाई होलकर चैरिटीज (ट्रस्ट) के बीच 246 संपदाओं को लेकर 2012 से ही विवाद चल रहा था. हरिद्वार के होलकर वाड़ा इलाके में स्थित कुशावर्त गंगा घाट के कुछ प्लॉट और इमारतों की बिक्री को लेकर विवाद था. ये संपदा राज घराने की निजी जायदाद थी, लेकिन उसके आसपास खासगी ट्रस्ट की भी संपत्ति थीं.

संपदा खरीदने वाले निजी हकदारों ने जब वहां धर्मशालाओं और स्मारकों को ध्वस्त करना शुरू किया तो विरोध ने तूल पकड़ लिया और बात कोर्ट तक पहुंच गई. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अपने फैसले में निर्देश दिया था कि ट्रस्टियों के खिलाफ लगाए गए आर्थिक हेराफेरी और अमानत में खयानत के इल्जाम की पड़ताल राज्य की आर्थिक अपराध शाखा करे.

जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस एएस ओक और जस्टिस सीटी रवि कुमार की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि ये जांच गैर जरूरी है. मध्य प्रदेश सरकार ने दलील दी थी कि ये संपदा लोक न्यास के तहत है, जिस पर मालिकाना हक सरकार का है. सरकार की दलील थी कि ये सच है कि राज घराने की निजी संपदा पर घराने के वारिसों का अधिकार है, लेकिन आजादी के बाद भारत में होलकर साम्राज्य के विलय के बाद खासगी संपदा पर न्यास के माध्यम से सरकार का अधिकार है.

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सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि ट्रस्ट 246 संपदाओं का मालिक है, लेकिन मध्य प्रदेश लोक न्यास कानून 1951 की धारा 14 के मुताबिक रजिस्ट्रार की पूर्व अनुमति से ट्रस्ट अपनी संपदा बेच सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने लोक न्यास केके रजिस्ट्रार को निर्देश दिया है कि वो इस खरीद फरोख्त की नए सिरे से जांच कराएं. अगर ट्रस्ट को नुकसान पहुंचाते हुए संपत्ति बेचने की प्रक्रिया में कोई घपला पाया जाए तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ समुचित कार्रवाई करें.

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