बीट रिपोर्ट: कर्नाटक कांग्रेस में बड़े बदलाव की आहट! दिल्ली तलब किए गए सीएम सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार, कुर्सी को लेकर 3 समीकरण तैयार

कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व बदलाव को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को दिल्ली बुलाया गया है, जहां राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ अहम बैठक होगी. सूत्रों के मुताबिक 2028 विधानसभा चुनाव से पहले सरकार और संगठन में बदलाव की रणनीति पर चर्चा होगी.

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कर्नाटक कांग्रेस की सत्ता पर दिल्ली में बड़ा फैसला संभव है (Photo: ITG) कर्नाटक कांग्रेस की सत्ता पर दिल्ली में बड़ा फैसला संभव है (Photo: ITG)

मौसमी सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 25 मई 2026,
  • अपडेटेड 10:02 PM IST

कर्नाटक कांग्रेस में एक बार फिर नेतृत्व बदलाव की चर्चाएं तेज हो गई हैं. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को दिल्ली बुलाया गया है, जहां मंगलवार सुबह कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर अहम बैठक होगी. इस बैठक में राहुल गांधी भी मौजूद रहेंगे.

2023 में जब कांग्रेस ने कर्नाटक में बड़ी जीत हासिल की, तो पार्टी के सामने एक मुश्किल थी. दो बड़े नेता थे जो मुख्यमंत्री बनना चाहते थे. पहले हैं सिद्धारमैया. बुजुर्ग, अनुभवी, और AHINDA यानी पिछड़े वर्ग, अल्पसंख्यक और दलित समुदाय के बड़े चेहरे. दूसरे हैं डीके शिवकुमार. पार्टी के लिए पैसा जुटाने वाले, संगठन चलाने वाले, और वोक्कालिगा समुदाय के बड़े नेता जिन्होंने मुश्किल वक्त में पार्टी थामे रखी.

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कांग्रेस हाईकमान ने एक फॉर्मूला निकाला. सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री बनाया और शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री. साथ में शिवकुमार को एक वादा भी दिया गया कि लीडरशिप का मामला बाद में देखा जाएगा.

वो वादा और केरल कनेक्शन

शिवकुमार को बताया गया था कि केरलम चुनावों के बाद लीडरशिप का सवाल सुलझाया जाएगा. केरलम चुनाव हो चुके हैं. यानी वो वक्त अब आ गया है. इसीलिए यह दिल्ली बैठक बेहद जरूरी हो गई है.

मंगलवार की बैठक क्या है?

सिद्धारमैया और शिवकुमार दोनों को दिल्ली बुलाया गया है. बैठक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के घर पर सुबह 11 बजे होगी. राहुल गांधी भी इसमें शामिल रहेंगे.

यह कोई रूटीन मीटिंग नहीं है. सूत्रों के मुताबिक बैठक में कर्नाटक की लीडरशिप और 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारी पर बात होगी. हाईकमान को लग रहा है कि सरकार में एक नई शुरुआत की जरूरत है ताकि 2028 तक सब कुछ पटरी पर रहे.

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तीन रास्ते जो मेज पर हैं
 

पहला रास्ता - सरकार वैसी ही, बस मंत्री बदलें

सबसे कम उथल-पुथल वाला तरीका यह है कि सिर्फ कैबिनेट में फेरबदल हो. जो मंत्री ठीक से काम नहीं कर रहे उन्हें हटाया जाए. जातीय समीकरण को बेहतर बनाने के लिए AHINDA को और जगह दी जाए. शिवकुमार की राय भी इसमें शामिल हो. यानी यह ऊपर से थोपा गया बदलाव नहीं बल्कि दोनों नेताओं की सहमति से होने वाला बदलाव होगा.

दूसरा रास्ता - शिवकुमार बनें मुख्यमंत्री

यह सबसे ज्यादा चर्चा में है. डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाया जाए और सिद्धारमैया को राज्यसभा भेजा जाए. शिवकुमार के साथियों को नई कैबिनेट में जगह मिले.

इससे एक साफ राजनीतिक संदेश जाएगा कि जिसने पार्टी के लिए मेहनत की, उसे इनाम मिला. साथ ही 2028 से पहले पार्टी के दोनों गुटों को एक साथ लाने की कोशिश भी होगी.

यह भी पढ़ें: "Beat Report: सत्ता संघर्ष, निर्णय में देरी और आलाकमान की चुप्पी... कांग्रेस के हाथों से फिसल रहा कर्नाटक?

तीसरा रास्ता - मल्लिकार्जुन खड़गे का कर्नाटक आना

यह सबसे कम संभावना वाला विकल्प है. अगर बात दोनों नेताओं के बीच नहीं बनी, तो कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को ही कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनाया जाए. खड़गे खुद कर्नाटक के हैं और वहां के CM बनने की इच्छा लंबे समय से रखते हैं.

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लेकिन इसमें दिक्कत है. अगर खड़गे कर्नाटक चले जाते हैं तो दिल्ली में कांग्रेस का पूरा ढांचा हिल जाएगा और राहुल गांधी को नई राष्ट्रीय लीडरशिप टीम बनानी पड़ेगी. इसीलिए यह तीसरा रास्ता बहुत कम संभव है.

साथ में और क्या चल रहा है?

इसी बीच कर्नाटक में राज्यसभा की तीन सीटों और नौ विधान परिषद सीटों को लेकर भी राजनीतिक हलचल बढ़ी हुई है. उम्मीदवारों के चयन को लेकर पार्टी के भीतर समीकरण और गुटबाजी फिर सामने आ सकती है.

कर्नाटक कांग्रेस में पहले भी नेतृत्व को लेकर कई बार बयानबाजी, अटकलें और अंदरूनी खींचतान देखने को मिल चुकी है. ऐसे में दिल्ली में होने वाली यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है. पार्टी के सामने चुनौती सिर्फ नेतृत्व तय करने की नहीं, बल्कि जातीय समीकरण, संगठनात्मक संतुलन और 2028 चुनाव की तैयारी को साथ लेकर चलने की भी है.

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