कर्नाटक: डीके शिवकुमार 3 जून को लेंगे CM पद की शपथ, कैबिनेट में सिद्धारमैया के करीबियों को जगह!

कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन के बीच डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की तैयारी चल रही है. इसी के साथ नई कैबिनेट को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं. कांग्रेस नेतृत्व जातीय, क्षेत्रीय और राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश में जुटा है. चर्चा है कि सिद्धारमैया और शिवकुमार दोनों खेमों के नेताओं को नई मंत्रिपरिषद में प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है.

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डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व वाली नई कर्नाटक कैबिनेट में यतींद्र सिद्धारमैया (बाएं) और जी. परमेश्वर (दाएं) संभावित चेहरों में शामिल हैं (Photo: ITG) डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व वाली नई कर्नाटक कैबिनेट में यतींद्र सिद्धारमैया (बाएं) और जी. परमेश्वर (दाएं) संभावित चेहरों में शामिल हैं (Photo: ITG)

सगाय राज

  • बेंगलुरु, कर्नाटक,
  • 29 मई 2026,
  • अपडेटेड 10:22 PM IST

कर्नाटक में सियासत का एक बड़ा बदलाव होने वाला है. सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है और अब डीके शिवकुमार नए मुख्यमंत्री बनने वाले हैं. ताजा जानकारी के मुताबिक, डीके शिवकुमार 3 जून को लोक भवन में सीएम पद की शपथ लेंगे. वे कर्नाटक के 25वें मुख्यमंत्री होंगे.

कांग्रेस पार्टी के बड़े नेता इस बदलाव को शांति से करवाने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन असली खींचतान चल रही है नई कैबिनेट को लेकर. कौन मंत्री बनेगा, किसे कौन सा विभाग मिलेगा, कौन सी जाति को कितनी जगह मिलेगी और किस इलाके को कितना हिस्सा मिलेगा. यही सब अभी तय हो रहा है.

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कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है. अभी तक सिद्धारमैया मुख्यमंत्री थे. लेकिन पार्टी के अंदर एक समझौता था कि सत्ता को बीच में ही डीके शिवकुमार को सौंप दिया जाएगा. अब वो वक्त आ गया है. सिद्धारमैया ने इस्तीफा दे दिया है. शनिवार को कांग्रेस के विधायकों की एक बड़ी बैठक होगी, जिसमें शिवकुमार को आधिकारिक तौर पर नया मुख्यमंत्री चुना जाएगा. उसके बाद शपथ ग्रहण समारोह होगा.

नई कैबिनेट पर माथापच्ची

नए मुख्यमंत्री के साथ नई कैबिनेट भी बनेगी. और इसी को लेकर सबसे ज्यादा बातचीत चल रही है. पार्टी के सामने कई चुनौतियां हैं. पहली चुनौती यह है कि सिद्धारमैया के खेमे के लोगों को भी जगह देनी है और शिवकुमार के खेमे के लोगों को भी. दूसरी चुनौती है कि अलग-अलग जातियों को उनका हक देना है. तीसरी चुनौती है कि राज्य के अलग-अलग इलाकों को भी कैबिनेट में हिस्सेदारी देनी है.

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पुराने मंत्री ही रहेंगे ज्यादातर

जो नाम अभी सामने आ रहे हैं, उनमें से ज्यादातर वो हैं जो सिद्धारमैया की सरकार में पहले से मंत्री थे. यानी पूरी तरह नया चेहरा नहीं आएगा. बहुत से लोग वही रहेंगे, बस मुख्यमंत्री बदलेगा. इससे यह भी साफ होता है कि सरकार चलाने में कोई बड़ा झटका न लगे और काम पहले जैसा चलता रहे.

यह भी पढ़ें: इस्तीफा देने के बाद भी 'पावर' में रहना चाहते हैं सिद्धारमैया, हाईकमान ने खारिज किया प्लान

कौन-कौन हो सकते हैं मंत्री?

अब एक-एक करके उन नामों को समझते हैं जो नई कैबिनेट में शामिल हो सकते हैं.

यतींद्र सिद्धारमैया: ये मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे हैं. खबरें हैं कि सिद्धारमैया खुद अपने बेटे के लिए एक बड़ा पद चाहते थे. यहां तक कि डिप्टी सीएम पद की भी चर्चा थी.

एएस पोन्नाना: ये सिद्धारमैया के वकील और करीबी साथी हैं. सिद्धारमैया के बेहद विश्वासपात्र माने जाते हैं.

जी परमेश्वर: कांग्रेस के पुराने नेता और अभी तक गृह मंत्री थे. दलित समाज का बड़ा चेहरा. जब मुख्यमंत्री बदलने की बात हो रही थी, तब इनका नाम भी सीएम पद के लिए चर्चा में आया था.

एमबी पाटिल: बड़े और मझोले उद्योगों के मंत्री रहे हैं. सिद्धारमैया के करीबी हैं. उत्तर कर्नाटक से ताल्लुक रखते हैं और लिंगायत समाज में इनकी अच्छी पकड़ है. कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं.

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बायरती सुरेश: बेंगलुरु के हेब्बाल से विधायक हैं और शहरी विकास मंत्री रहे हैं. बेंगलुरु में कांग्रेस के मजबूत नेता माने जाते हैं.

एचसी महादेवप्पा: दलित समाज के वरिष्ठ नेता और सामाजिक कल्याण मंत्री रहे हैं. सिद्धारमैया के पुराने साथी हैं. पार्टी में अहिंदा यानी पिछड़े और अल्पसंख्यक तबके की आवाज उठाने वाले नेता के रूप में जाने जाते हैं.

प्रियांक खड़गे: कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे हैं. ग्रामीण विकास और पंचायत राज मंत्री रहे हैं. पिता के देशभर में बड़े नेता होने की वजह से इनका कैबिनेट में रहना तय माना जा रहा है.

कृष्णा बायरे गौड़ा: राजस्व मंत्री रहे हैं. बेंगलुरु के नेता हैं और सरकारी कामकाज की अच्छी समझ रखने वाले नेता के रूप में जाने जाते हैं.

संतोष लाड: उत्तर कर्नाटक के नेता हैं और श्रम मंत्री रहे हैं. सिद्धारमैया के करीबी हैं.

दिनेश गुंडू राव: स्वास्थ्य मंत्री रहे हैं और कर्नाटक कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष हैं. पार्टी संगठन में अहम भूमिका निभाते रहे हैं. बेंगलुरु से ताल्लुक है.

लक्ष्मी हेब्बालकर: बेलगावी जिले से आती हैं और महिला और बाल विकास मंत्री रहीं हैं. कांग्रेस की ताकतवर नेत्री मानी जाती हैं. इनके नाम की चर्चा भी डिप्टी सीएम पद के लिए हो रही है.

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रामालिंगा रेड्डी: बेंगलुरु के वोक्कालिगा समाज का बड़ा चेहरा. परिवहन और मुजराई विभाग संभाल चुके हैं. वरिष्ठ नेता हैं.

रिजवान अर्शद: कांग्रेस विधायक हैं और पार्टी के अल्पसंख्यक यानी मुस्लिम समुदाय के अहम चेहरे हैं.

यूटी खादर: अभी कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष हैं. तटीय कर्नाटक से आते हैं और अल्पसंख्यक समुदाय के वरिष्ठ नेता हैं. पहले भी मंत्री रह चुके हैं.

शरत बचेगौड़ा: युवा विधायक हैं. कर्नाटक स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के चेयरमैन रह चुके हैं. पार्टी में उभरते चेहरे के रूप में देखे जाते हैं.

शनिवार को कांग्रेस विधायक दल की बैठक होगी. इसमें शिवकुमार को औपचारिक रूप से नया नेता चुना जाएगा.

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