इतनी धूप के बाद भी हिमालय की चोटियों पर क्यों नहीं पिघलती बर्फ? समझिये वजह

क्या आपने कभी सोचा है कि हिमालय की ऊंची चोटियों पर चमकती सफेद बर्फ आखिर पिघलती क्यों नहीं? सूरज के ज्यादा करीब होने के बावजूद ये बर्फ सालभर जमी रहती है. इसके पीछे आखिर कौन-सा विज्ञान काम करता है?

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आखिर हिमालय के पहाड़ों में इतनी धूप के बावजूद यहां की बर्फ क्यों नहीं पिघलती (PHOTO: AFP) आखिर हिमालय के पहाड़ों में इतनी धूप के बावजूद यहां की बर्फ क्यों नहीं पिघलती (PHOTO: AFP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 10:49 AM IST

पहाड़ों की ऊंची चोटियां खासकर हिमालय सालभर बर्फ से ढकी रहती हैं. यह बात कई लोगों को हैरान करती है, क्योंकि ऊंचाई पर मौजूद ये चोटियां जमीन की तुलना में सूरज के ज्यादा करीब होती हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इतनी धूप के बावजूद यहां की बर्फ क्यों नहीं पिघलती? आइये इसी का जवाब तलाशते हैं.दरअसल, इसके पीछे पृथ्वी के वातावरण, तापमान और बर्फ की कुछ खास विशेषताओं से जुड़ा विज्ञान काम करता है.

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ऊंचाई बढ़ने के साथ ठंडी होती जाती है हवा

जैसे-जैसे हम समुद्र तल से ऊपर की ओर बढ़ते हैं, वातावरण धीरे-धीरे पतला होता जाता है. ऊंचाई पर हवा में गैसों के अणु कम होते हैं, इसलिए उनके बीच टकराव भी कम होता है और गर्मी पैदा होने की प्रक्रिया कमजोर पड़ जाती है.

इसी कारण ऊंचाई बढ़ने के साथ तापमान लगातार गिरता जाता है. वैज्ञानिकों के मुताबिक औसतन हर 1000 मीटर की ऊंचाई पर तापमान लगभग 6.5 डिग्री सेल्सियस कम हो जाता है. यही वजह है कि हिमालय जैसी ऊंची जगहों पर तापमान इतना कम रहता है कि वहां अक्सर बारिश की बजाय बर्फ गिरती है.

पतली हवा गर्मी को ज्यादा देर तक नहीं रोक पाती

समुद्र तल के आसपास हवा अपेक्षाकृत घनी होती है, जो गर्मी को कुछ हद तक रोक कर रखती है.  ऊंचे पहाड़ों पर हवा काफी पतली हो जाती है.इस पतली हवा में गर्मी ज्यादा देर तक टिक नहीं पाती, इसलिए वहां का वातावरण ठंडा बना रहता है और जमी हुई बर्फ लंबे समय तक पिघलती नहीं.

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बर्फ की चमक भी बचाती है उसे पिघलने से

बर्फ की एक खासियत यह भी है कि वह सूरज की रोशनी को काफी हद तक वापस लौटा देती है. वैज्ञानिक भाषा में इसे रिफ्लेक्टिविटी या अल्बेडो प्रभाव कहा जाता है.

जब सूरज की किरणें बर्फ पर पड़ती हैं, तो उनका बड़ा हिस्सा अंतरिक्ष की ओर परावर्तित हो जाता है. इसी वजह से बर्फ उतनी जल्दी गर्म नहीं होती और लंबे समय तक जमी रहती है.

'स्नो लाइन' के ऊपर हमेशा बनी रहती है बर्फ

हर पर्वतीय क्षेत्र में एक निश्चित ऊंचाई होती है, जिसे स्नो लाइन कहा जाता है. इस ऊंचाई के ऊपर तापमान इतना कम रहता है कि वहां गिरने वाली बर्फ सालभर जमी रहती है और समय के साथ ग्लेशियर का रूप ले लेती है.हिमालय, आल्प्स और एंडीज जैसे पर्वतों की चोटियों पर इसी वजह से पूरे साल सफेद बर्फ की चादर दिखाई देती है.

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