घड़ी में लगने वाले छोटे-छोटे बटन सेल को लेकर अक्सर सोशल मीडिया पर तरह-तरह के दावे किए जाते हैं. कई वीडियो में कहा जाता है कि पुराने घड़ी के सेल में चांदी होती है और इनसे अच्छी खासी चांदी निकाली जा सकती है. कई लोग सेल से चांदी निकालकर बेचने का दावा भी करते हैं. तो ऐसे में जानते हैं कि इस दावे में कितनी सच्चाई है और क्या सच में घड़ी के इस छोटे से सेल में चांदी भी होती है...
क्या घड़ी के सेल में चांदी होती है?
इसका जवाब है हां. घड़ी के सेल में सिल्वर होता है, लेकिन ऐसा नहीं है कि ये हर सेल में मिले. कुछ-कुछ ही ऐसे सेल हैं, जिनमें चांदी की मात्रा पाई जाती है. रिपोर्ट्स के अनुसार, सिल्वर ऑक्साइड सेल में कैथोड में सिल्वर ऑक्साइड (Ag₂O) का इस्तेमाल होता है. यही वजह है कि इनमें चांदी मौजूद होती है. बाजार में इन्हें आमतौर पर SR सीरीज के नाम से जाना जाता है, जैसे SR626SW, SR920SW और SR927SW. यानी सिर्फ इन सेल में ही थोड़ी बहुत चांदी निकलती है.
इसके अलावा दूसरे सेल भी आते हैं, जिन्हें अल्कलाइन सेल कहते हैं. कई घड़ियों में ये वाले सेल भी डलते हैं. ये जिंक और मैगजीन डाइऑक्साइड से बने होते हैं और बाजार में एलआर सीरीज के नाम से मिलते हैं, जैसे LR44। इनकी कीमत भी सिल्वर ऑक्साइड सेल से कम होती है. यानी यदि किसी घड़ी में एलआर सीरीज का सेल लगा है, तो उसमें चांदी नहीं मिलेगी.
बता दें कि जर्नल ऑफ पावर सोर्स में छपी एक रिसर्च 'Hydrometallurgical recovery of silver from waste silver oxide button cells' में सिल्वर होने की बात मिलती है. इस शोध में वैज्ञानिकों ने Maxell SR626SW सिल्वर ऑक्साइड बटन सेल पर रिसर्च की और पता चला कि इस्तेमाल हो चुकी बैटरी में चांदी धातु के रूप में मौजूद रहती है. उदाहरण के तौर पर, अगर एक SR626SW बैटरी का वजन लगभग 0.4 ग्राम है, तो उसमें करीब 0.12 ग्राम सिल्वर मौजूद हो सकता है. इसी आधार पर 10 ऐसी बैटरियों में लगभग 1.2 ग्राम सिल्वर होने का अनुमान लगाया जा सकता है.
एक सेल में कितनी चांदी होती है?
ये तो आप समझ गए होंगे कि किन सेल में चांदी होती है या कौनसे सेल में नहीं होती. बता दें कि सिल्वर ऑक्साइड बैटरी में चांदी की मात्रा बैटरी के आकार और मॉडल पर निर्भर करती है. अलग-अलग तकनीकी दस्तावेजों और रीसाइक्लिंग इंडस्ट्री के अनुमान के अनुसार, एक सामान्य सिल्वर ऑक्साइड बटन सेल में लगभग 0.1 ग्राम से 0.3 ग्राम तक सिल्वर हो सकता है.
इसका मतलब है कि अगर आपके पास 10 सिल्वर ऑक्साइड सेल हैं, तो उनमें कुल मिलाकर लगभग 1 से 3 ग्राम तक चांदी हो सकती है. हालांकि यह कोई तय मात्रा नहीं है और हर मॉडल में अलग हो सकती है. इसके अलावा मुश्किल बात ये है कि आप चाहें तो इसे आसानी से नहीं निकाल सकते हैं.
चांदी निकालने की प्रक्रिया बेहद तकनीकी और रासायनिक होती है. इसमें इस्तेमाल होने वाले केमिकल, मशीनें और सुरक्षा उपाय आम व्यक्ति के लिए उपलब्ध नहीं होते. यही कारण है कि चांदी की रिकवरी का काम बड़ी रीसाइक्लिंग कंपनियां करती हैं, जो हजारों या लाखों पुराने सेल एक साथ प्रोसेस करती हैं. सिर्फ 10 या 20 पुराने सेल से चांदी निकालना न तो आसान है और न ही आर्थिक रूप से फायदेमंद माना जाता है.
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