तपेगी धरती, तड़पेंगे लोग... फिर आ रहा 5 करोड़ लोगों की जान लेने वाला सुपर अल नीनो?

अब एक बार फिर से 150 साल पहले आए सुपर अल नीनो के लौटने का डर सता रहा है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इन दिनों जैसे हालात बन रहे हैं. उसकी वजह से 1877 में आए सुपर अल नीनो जैसी स्थिति फिर से बन सकती है. तब दुनिया भर में करीब 5 करोड़ लोगों की मौत हो गई थी और कई साल तक दुनिया के अधिकतर हिस्से में सूखे की स्थिति बन गई थी.

Advertisement
1877 में आया था सबसे विनाशकारी सुपर अल नीनो (Photo - ITG) 1877 में आया था सबसे विनाशकारी सुपर अल नीनो (Photo - ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 मई 2026,
  • अपडेटेड 8:37 AM IST

हर दिन तापमान रिकॉर्ड तोड़ रहा है.  पारा चढ़ता ही जा रहा है. मौसम वैज्ञानिक दुनियाभर में गर्मी की बदतर हो रही स्थिति को देखकर चिंतित हैं. क्योंकि, उन्हें 148 साल पहले आए सुपर अल नीनो के लौटने की चिंता सता रही है, जिसने दुनिया भर में 5 करोड़ लोगों की जान ले ली थी. ऐसे में समझते हैं कि आखिर डेढ़ सौ साल पहले क्या हुआ था.    

Advertisement

आज से करीब 150 साल पहले धरती पर मौसम का ऐसा कहर बरपा था, जिसकी कल्पना कर आज भी लोग सिहर जाते हैं. तब पूरी दुनिया एक रेयर  सुपर अल नीनो इफेक्ट का शिकार हो गई थी. धरती का तापमान करीब 3 डिग्री तक बढ़ गया था. चारों तरफ आकाल, सूखा और भुखमरी के हालात बन गए थे. सुपर अल नीनो ने ऐसी तबाही मचाई थी कि 5 करोड़ लोग तड़प- तड़प कर मर गए थे. सिर्फ भारत में एक करोड़ से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी.

डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि आने वाला 'सुपर अल नीनो' पिछली बार से भी अधिक शक्तिशाली हो सकता है, जिसके कारण 5 करोड़ से अधिक लोगों की मौत हुई थी.

प्रशांत महासागर का तापमान 2 डिग्री से ज्यादा बढ़ गया था
1877 का अल नीनो इतिहास में दर्ज सबसे गंभीर जलवायु घटनाओं में से एक था. इसने एक वैश्विक मानवीय आपदा को जन्म दिया था. इसे महान अकाल के नाम से जाना जाता है. जलवायु संबंधी रिक्रिएशन से पता चलता है कि प्रशांत महासागर के एक प्रमुख इलाके में पानी का तापमान 2.7 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ गया. इससे दुनिया भर में वर्षा का पैटर्न डिस्टर्ब हो गया था. 

Advertisement

अनुमानों से पता चलता है कि इसके परिणामस्वरूप दुनियाभर में भोजन की कमी और बीमारियों के प्रकोप से उस समय पृथ्वी की लगभग चार प्रतिशत आबादी खत्म हो गई थी. अगर ऐसा आज होता है तो यह कम से कम 250 मिलियन लोगों के बराबर होगा.

अगर लौटा सुपर अल नीनो तो क्या होगा?
अब, पूर्वानुमानों से पता चलता है कि इस साल के अंत में पानी का तापमान औसत से 3 डिग्री सेल्सियस (5.4 डिग्री फारेनहाइट) से अधिक हो सकता है. इससे आने वाला सुपर एल नीनो लगभग 150 साल पहले वाले सुपर एल नीनो से भी अधिक शक्तिशाली हो जाएगा.

वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी की एसोसिएट प्रोफेसर दीप्ति सिंह ने वाशिंगटन पोस्ट को बताया कि 1870 के दशक जैसी एक साथ कई वर्षों तक चलने वाली सूखे की स्थिति फिर से उत्पन्न हो सकती है. तब सालों तक दुनिया के कई हिस्से में सूखे और आकाल के हालात बने रहे थे.

अब जो बात अलग है वह यह है कि हमारा वायुमंडल और महासागर 1870 के दशक की तुलना में काफी गर्म हैं. इसका अर्थ है कि इससे जुड़े चरम प्रभाव और भी अधिक गंभीर हो सकते हैं.

सुपर अल नीनो ने बदल दिया था दुनिया का इतिहास
कई जलवायु इतिहासकारों का मानना ​​है कि 1877-78 की घटना ने विश्व इतिहास को नया आकार दिया. कुछ इसे पहली वास्तव में क्लाइमेट चेंज से जुड़ी आपदाओं में से एक मानते हैं. तब कई वर्षों से चली आ रही सूखे की स्थिति और भी गंभीर हो गई थी. इससे बड़े पैमाने पर फसलें बर्बाद हो गईं थी

Advertisement

भारत पर पड़ा था सबसे बुरा प्रभाव
मानसून की बारिश न होने से भारत सबसे बुरी तरह प्रभावित क्षेत्रों में से एक था. यहां लंबे समय तक सूखा और अकाल जैसे हालात बन गे थे. एक अनुमान के मुताबिक, भारत में एक करोड़ से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी. जबकि, उत्तरी चीन में विनाशकारी सूखे के कारण फसलें बर्बाद हो गईं. ब्राजील में नदियां सूख गई थीं और कृषि व्यवस्था ठप हो गई थीं. वहीं अफ्रीका, दक्षिणपूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया के कुछ हिस्सों में भी भीषण सूखा और जंगल की आग का कहर बरपा था.

सुपर अल नीनो ने  सबसे बड़ी अकाल को जन्म दिया था. इसने दुनिया भर में समाजों को कमजोर कर दिया. वहीं कुछ क्षेत्रों में औपनिवेशिक नियंत्रण और ज्यादा सख्त कर दिए गए. इससे लोगों के विस्थापन और प्रवासन को गति मिली. कमजोर आबादी वाले क्षेत्रों में मलेरिया, प्लेग, पेचिश, चेचक और हैजा जैसी बीमारियों का भी प्रकोप तेजी से फैला था.

स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयॉर्क एट अल्बानी के पॉल राउंडी ने कहा कि यह वर्ष संभावित रूप से 1877 के बाद से सबसे बड़ी अल नीनो घटना हो सकती है. इस बीच, जलवायु वैज्ञानिक कैथरीन हेहो ने कहा है कि इसका मानव समाज और मानव कल्याण पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है.

Advertisement

क्या होता है सुपर अल नीनो?
अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु पैटर्न है जो हर दो से सात साल में एक गर्म अल नीनो और एक ठंडा ला नीना स्टेज के बीच घटित होता है. अल नीनो के इस चक्र के दौरान, प्रशांत महासागर में जमा होने वाला गर्म पानी फैल जाता है और पृथ्वी के औसत सतही तापमान को बढ़ा देता है. यह गर्मी अंत में  वायुमंडल में निकल जाती है, जिससे हमारे पृथ्वी  का तापमान महीनों तक बढ़ जाता है. जहां समुद्र की सतह का तापमान 2°C (3.6°F) से अधिक हो जाता है. इस घटना को अक्सर 'सुपर एल नीनो' कहा जाता है. हालांकि वैज्ञानिक स्वयं इस शब्द का प्रयोग नहीं करते हैं.

मौजूदा हालात से पता चलता है कि ट्रोपिकल पेसेफिक इलाके  में समुद्र की सतह का तापमान इस सदी में किसी भी अन्य समय की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ रहा है. हालांकि, अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह एक बहुत मजबूत संकेत है कि एक शक्तिशाली अल नीनो मौसम प्रणाली विकसित हो रही है.

जलवायु पूर्वानुमान के प्रमुख विल्फ्रान मौफौमा ओकिया ने कहा है कि जलवायु मॉडल अब काफी हद तक एकमत हैं और अल नीनो की शुरुआत और उसके बाद आने वाले महीनों में इसके और अधिक तीव्र होने की संभावना है जो अपने  उच्च स्तर पर पहुंच सकता है. मौसम विभाग के मॉडलिंग से पता चलता है कि समुद्र की सतह का तापमान औसत से 1.5 डिग्री सेल्सियस (2.7 डिग्री फारेनहाइट) अधिक हो सकता है और यह भी कहा गया है कि यह इस सदी में अब तक की सबसे मजबूत अल नीनो घटना हो सकती है.

Advertisement

1877 जैसे विनाशकारी परिणाम अब नहीं सामने आएंगे 
सुपर एल नीनो के संभावित प्रभाव को लेकर चिंताओं के बावजूद, विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु निगरानी और पूर्वानुमान में हुई प्रगति के कारण दुनिया अब इसके परिणामों से निपटने के लिए कहीं अधिक तैयार है.

विशेषज्ञों ने कहा है कि 1877 से जुड़े विनाशकारी नुकसान आज दोहराए जाने की संभावना नहीं है. क्योंकि, तब जैसे  सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक हालात अब नहीं है. उस वक्त के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों की वजह से भी  ज्यादा लोगों की जानें गई थीं. तब पूरी दुनिया में साम्राज्यवादी नीतियों और उपनिवेशवाद ने हालात को और भी बदतर बना दिया था. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »