5 जून 1967 को अपनी सीमाओं पर अरब सेनाओं के जमावड़े के जवाब में, इज़राइल ने मिस्र पर हवाई हमला शुरू कर दिया. इस तरह इजरायल और अरब देशों के बीच युद्ध छिड़ गया, जो छह दिनों तक चला. इसे छह दिवसीय युद्ध या सिक्स डेज वॉर के नाम से जाना जाता है. इजरायल ने इजिप्ट, सीरिया और जॉर्डन तीनों देशों को शिकस्त दी थी. इसके साथ ही इज़राइल ने मिस्र की गाजा पट्टी और सिनाई प्रायद्वीप, सीरिया के गोलान हाइट्स और वेस्ट बैंक तथा पूर्वी यरुशलम के अरब क्षेत्र पर कब्जा कर लिया, जो पहले जॉर्डन के अधीन थे.
5 से 10 जून तक भीषण युद्ध हुआ और इजरायल ने बड़ी जीत हासिल की और अरब देशों के कई इलाकों को अपने कब्जे में कर लिया. 11 जून को संयुक्त राष्ट्र के युद्धविराम के लागू होने तक, इज़राइल ने अपना क्षेत्रफल दोगुने से भी अधिक कर लिया था, जिसमें जॉर्डन से यरुशलम के पुराने शहर पर दावा करना भी शामिल था.संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सभी क्षेत्रों को वापस करने का इजरायल से अनुरोध किया. लेकिन इजरायल ने इनकार कर दिया और पूर्वी यरुशलम को स्थायी रूप से अपने कब्जे में ले लिया तथा अधिकृत क्षेत्रों में सैन्य प्रशासन स्थापित कर दिया.
इजरायल ने स्पष्ट कर दिया कि गाजा, वेस्ट बैंक, गोलान हाइट्स और सिनाई को तभी लौटाया जाएगा जब अरब देश इजरायल के अस्तित्व के अधिकार को मान्यता देंगे और भविष्य में हमला नहीं करने की गारंटी देंगे.
अरब नेताओं ने अगस्त में मिडिल ईस्ट के भविष्य पर चर्चा करने के लिए बैठक की. उन्होंने शांति, वार्ता और इजरायल को मान्यता न देने की नीति अपनाई और अधिकृत क्षेत्रों में फिलिस्तीनी अरबों के अधिकारों की रक्षा के लिए योजनाएं बनाईं.
हालांकि, मिस्र ने बाद में इजरायल के साथ बातचीत करके शांति समझौता कर लिया और 1982 में इजरायल को पूर्ण राजनयिक मान्यता देने के बदले में सिनाई प्रायद्वीप मिस्र को वापस कर दिया गया. बाद में मिस्र और जॉर्डन ने गाजा पट्टी और वेस्ट बैंक पर अपने-अपने दावे फिलिस्तीनियों के सामने छोड़ दिए , जिन्होंने 1990 के दशक में इजरायल के साथ 'शांति के बदले भूमि' वार्ता शुरू की. हालांकि, इजरायल और फिलिस्तीन के बीच स्थायी शांति समझौता अभी भी नहीं हो पाया है.
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