17 जून 1631 को शाहजहां की पत्नी, बेगम मुमताज महल का निधन हो गया था. अपने 14वें बच्चे को जन्म देने के दौरान मुमताज महल की मौत हो गई थी. इसी बेगम की मौत की वजह से ही ताजमहल का निर्माण हुआ. शाहजहां ने मुमताज महल के लिए एक भव्य मकबरा बनावाने का फैसला लिया और इसके परिणामस्वरूप ताजमहल की नींव रखी गई, जो वास्तुकला का एक अनूठा नमूना है.
आधुनिक भारत के केंद्र में स्थित बुरहानपुर शहर में शाही किला नामक एक खंडहर महल खड़ा है. इसकी भव्य शाही स्नानागार आज भी देखी जा सकती है, जिसकी छत पर शानदार नक्काशी की गई है. यह समझना आसान है कि सन् 1631 की गर्मियों में मुगल महारानी मुमताज महल ने अपने 14वें बच्चे को जन्म देने के लिए इसी कमरे को क्यों चुना था.
मुमताज महल के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है. मुमताज फारसी कुलीन परिवार में जन्मीं थीं. उनका जन्म 1593 में अर्जुमंद बानू बेगम के रूप में हुआ था और महज 14 वर्ष की आयु में मुगल राजकुमार खुर्रम से उनकी सगाई हो गई थी. ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, वह एक प्रतिभाशाली युवती थीं, जो अरबी और फारसी पढ़ सकती थीं और कविताएं लिखती थीं.
उनके पति, जो 1628 में शाहजहां के नाम से सम्राट बने. वह उनसे बहुत प्रेम करते थे और उन्होंने उन्हें मुमताज महल नाम दिया था, जिसका अर्थ है 'महल की श्रेष्ठ महिला'होता है. एक दरबारी इतिहासकार ने लिखा कि उनके बीच मित्रता और सद्भाव इस हद तक पहुंच गया था, जैसा कि पति-पत्नी के बीच पहले कभी नहीं देखा गया.
फिर एक त्रासदी घटी. मुमताज महल की 14वीं संतान स्वस्थ पैदा हुई, लेकिन प्रसव पीड़ा उनके लिए असहनीय थी और 17 जून को उनका निधन हो गया. यह एक दुखद कहानी थी – लेकिन, इस घटना ने वास्तुकला की एक असाधारण विरासत पीछे छोड़ी. अगले वर्ष, आगरा शहर में उनके लिए सफेद संगमरमर से बने एक मकबरे का निर्माण शुरू हुआ. आज यह दुनिया की सबसे प्रसिद्ध इमारतों में से एक है – ताजमहल.
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