यहां जाने का मतलब मौत... वो जगहें, जहां से वापस आना है मुश्किल!

दुनिया के अलग- अलग कोने में ऐसी जगहें भी है, जहां इंसानों का जाना मना है. इसकी वजह है, वहां उनका जान को खतरा. इन जगहों पर कदम रखने के बाद जिंदा रहने की गारंटी नहीं है. तो चलिए जानते हैं कहां- कहां हैं ऐसी जगहें.

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धरती पर इन जगहों पर इंसानों का जाना है मना, क्योंकि वहां से लौटना है नामुमककिन (Photo - AFP) धरती पर इन जगहों पर इंसानों का जाना है मना, क्योंकि वहां से लौटना है नामुमककिन (Photo - AFP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 8:41 AM IST

इस दुनिया में कुछ ऐसी भी जगहें हैं, जहां जाने का मतलब है मौत. कुछ अपने भौगोलिक बनावट और संरचना की वजह से हद से ज्यादा खतरनाक हैं. तो कहीं ऐसी खतरनाक प्रजातियां, जीव-जंतु और दुर्मग इलाके हैं, जहां इंसान को कुछ घंटे के लिए भी अपना अस्तित्व बनाए रखना मुश्किल हो सकता है. जानते हैं धरती के ऐसे ही कुछ खतरनाक जगहों की कहानी. 

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धरती पर सबसे खतरनाक जगह कहीं है तो उसमें पहला नंबर भारत का आता है. भारत में एक ऐसा स्थान है, जहां इंसानों का जाना मना है. क्योंकि, वहां जाने के बाद कोई भी वापस नहीं लौटा है. ऐसे इलाके के आसपास फटकना भी जानलेवा साबित हो सकता है. जानते हैं भारत में वो जगह कहां है और आखिर क्यों वहां जाने वाला कभी लौटकर वापस नहीं आता. 

भारत के अंडमान निकोबार द्वीप समूह में एक टापू है, जिसका नाम उत्तरी सेंटिनल द्वीप है. इस जगह जिन लोगों ने भी जाने की कोशिश की, वो जिंदा लौटकर नहीं आ पाए. क्योंकि, इस द्वीप पर रहने वाले लोग बाकी दुनिया से पूरी तरह से कटे हुए हैं. उन्हें पता ही नहीं है कि उनके द्वीप के बाहर एक बड़ी दुनिया है, जहां तरह- तरह के लोग रहते हैं. 

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सेंटिनल आईलैंड 
माना जाता है कि सेंटिनल आईलैंड पर रहने वाले आदिवासी आज भी पाषाणकालीन जिंदगी जी रहे हैं. शायद उन्होंने अभी तक खेती करना नहीं सीखा है. दूर- दराज से ली गई उनकी तस्वीरों में सेंटिनल आईलैंड के आदिवासी बड़े- बड़े तीर- धनुष के साथ दिखाई देते हैं. उनकी अपनी अलग भाषा और दुनिया है. इन्हें सेंटनलीज कहा जाता है और ये आज भी शिकार करके अपना पेट भरते हैं. 

यही वजह है कि जब भी कोई इंसान इनके करीब जाने की कोशिश करता है तो सेंटनलीज उन्हें खतरा मान बैठते हैं और हमला कर देते हैं. जिन- जिन लोगों ने इनसे संपर्क करने की कोशिश की, उन आदिवासियों ने उन्हें मार दिया. सेंटिनल द्वीप पर रहने वाले ये लोग खुद भी विलुप्त होते जा रहे हैं. इनकी संख्या काफी कम हो गई है. 

सरकार ने सेंटिनलीज लोगों को बचाने के लिए भी दूसरे लोगों को उस द्वीप पर जाने से प्रतिबंधित कर दिया है. ताकि, बाहर से जाने वाले लोग वहां बीमारी लेकर नहीं जाएं. क्योंकि, सेंटनलीज साधारण फ्लू से भी मर सकते हैं. क्योंकि, इन साधारण बीमारियों के प्रति भी उनमें इम्युनिटी विकसित नहीं हुई है.  साथ ही वहां जाने वाले लोगों की जान पर अविलंब खतरा हो सकता है.  

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स्नैक आईलैंड
सोचिए, आप मीलों दूर का सफर करके, फिर नाव या स्टीमर से यात्रा करके, एक ऐसे द्वीप पर पहुंचे, जहां कदम रखने के कुछ ही मिनट बाद आपको कोई विषैला सांप डस ले. ऐसा सच में हो सकता है, अगर कोई स्नैक आईलैंड पहुंच जाए. वहां इंसानों का जाना मना है. क्योंकि इस जगह पहुंचने के बाद आप कितने भी सतर्क क्यों न हो, किसी न किसी तरह कोई न कोई सांप आपको डस ही लेगा. 

यहां हर कदम पर सांप हैं और सभी शायद एक ही प्रजाति के हैं. यह स्नैक आईलैंड ब्राजील के तट से दूर बीच समुद्र में एक चट्टानी द्वीप है. आधा वर्गकिलोमीटर के इस टापू पर 5000 से भी ज्यादा विषैले गोल्डन लांसहेड वाइपर सांप रहते हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि 11 हजार साल पहले समुद्र का जल स्तर बढ़ने से यह टापू अमेरिका से अलग हो गया था. तभी से लांसहेड वाइपर सांप इस जगह पर फंस गए हैं. तब यहां रहने वाले छोटे जीव- जंतुओं और पक्षियों की आबादी यहां खत्म हो गई और यहां सिर्फ सांप ही सांप हैं. ये सांप इतने घातक होते हैं और इनका विष इतना खतरनाक होता है कि यह पंछियों को उड़ने से पहले ही मार देते हैं. 

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वैसे इस द्वीप का नाम इल्हा दा क्वेमाडा ग्रांडे है.  1985 में ब्राजील प्रशासन ने इस द्वीप को एक प्रोटेक्टेड इकोसिस्टम घोषित कर दिया. ताकि, अपने तरह के इन अनोखे सांपों को संरक्षित किया जा सके, जो केवल यहीं पाए जाते हैं. साथ ही अनजाने में इस टापू पर पहुंचने के बाद लोगों को जान गंवाने से भी रोका जा सके. यही वजह है कि इस जगह कोई भी इंसान नहीं जाता है. यहां जो भी गया है, फिर लौटकर नहीं आता. 

डनाकिल डिप्रेशन: पाताल लोक का द्वार
अफ्रीका के इथोपिया में एक ऐसी जगह है, जहां एसिड की नदियां बहती है और वहां की हवा में जहर घुला हुआ है. ऐसे में आप अंदाजा लगा सकते हैं कि वहां जाने पर लोगों का क्या हाल हो सकता है. इसे पताललोक का द्वार भी कहते हैं. इस जगह का नाम है - डनाकिल डिप्रेशन. यह धरती का सबसे खतरनाक स्थान है. इस जगह का टेम्प्रेचर कभी भी 45 डिग्री से नीचे नहीं होता है. यह एक सक्रिय ज्वालामुखी वाला इलाका है. इस वजह से यहां की आबोहवा अजीबोगरीब और खतरनाक है. 

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यह धरती के सबसे डिपेस्ट पॉइंट में एक है.  समुद्र तल से यह इलाका 125 मीटर नीचे है. आसान शब्दों में इसे दुनिया का सबसे निचला इलाका कह सकते हैं. पूरे इलाके में कई सक्रिय ज्वालामुखी है. यहां की भौगोलिक परिस्थितियां ऐसी है कि वोलकेनिक इलाका होने की वजह से यहां पर कई तरह के प्राकृतिक केमिकल जैसे सल्फ्यूरिक एसिड   के सोते हैं, जो एसिड के तालाब और धाराओं का निर्माण करते हैं. इनसे हमेशा सल्फर डाई ऑक्साइड जैसी जहरीली गैस निकलते रहते हैं.

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यहां के सक्रिय ज्वालामुखियों के आसपास धरती के अंदर से निकलने वाले लावा, जहरीली गैस और एसिड से भरे छोटे- छोटे कई तालाब हैं. हमेशा केमिकल रिएक्शन होते रहने की वजह से इनका रंग गुलाबी, हरा, पीला, नारंगी रहता है. इनसे हमेशा जहरीली और खतरनाक गैसें निकलती रहती हैं. 

अगर यहां कोई पहुंच जाए तो इन जानलेवा गैस से दम घुटने की वजह से लोग गंभीर रूप से बीमार हो जाए. इस जगह लोग आते जरूर हैं, लेकिन इन एसिड के तालाब और ज्वालामुखियों से भरे इस इलाके से दूर ही रहते हैं. उस क्षेत्र में इंसानों का जाना भी मना है.  
 

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