जब इंदिरा गांधी को चुनाव में धांधली के आरोप में दोषी ठहराया गया

आज के दिन ही इंदिरा गांधी को चुनाव में धांधली के आरोप में दोषी ठहराया गया था. इसके बाद उन्हें छह साल के लिए कोर्ट ने सक्रिय राजनीति से प्रतिबंधित कर दिया. इसके परिणाम स्वरूप देश में इमरजेंसी की घोषणा हुई थी.

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आज के दिन ही तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चुनाव में धांधली के आरोप में दोषी ठहराया था (Photo - Getty) आज के दिन ही तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चुनाव में धांधली के आरोप में दोषी ठहराया था (Photo - Getty)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 जून 2026,
  • अपडेटेड 6:35 AM IST

12 जून 1975 भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को 1971 के चुनाव में धांधली और धोखाधड़ी का दोषी पाया गया.  इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने चुनावी उल्लंघन का दोषी ठहराया और छह साल के लिए राजनीति से प्रतिबंधित कर दिया. इसके जवाब में इंदिरा गांधी ने पूरे भारत में आपातकाल की घोषणा कर दी. हजारों राजनीतिक विरोधियों को जेल में डाल दिया और देश में व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगा दिया.

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1966 में लाल बहादुर शास्त्री का निधन हो गया और गांधी कांग्रेस पार्टी की प्रमुख के नाते इंदिरा गांधी भारत की प्रधानमंत्री बनीं. भारत की पहली महिला राष्ट्राध्यक्ष बनने के तुरंत बाद, उन्हें कांग्रेस पार्टी के एक धड़े से चुनौती मिली और 1967 के चुनाव में उन्हें मामूली अंतर से जीत हासिल हुई, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें एक उप प्रधानमंत्री के साथ शासन करना पड़ा.

1971 में उन्होंने भारी बहुमत से पुन: चुनाव जीता और भारत की निर्विवाद नेता बन गईं. उसी वर्ष, उन्होंने बांग्लादेश के निर्माण के समर्थन में पाकिस्तान पर भारत के आक्रमण का आदेश दिया, जिससे उनकी लोकप्रियता और बढ़ गई. अगले कुछ वर्षों में उन्होंने  खाद्य संकट, महंगाई और क्षेत्रीय विवादों के कारण बढ़ती नागरिक अशांति का सामना किया. 

इन समस्याओं से निपटने के लिए अपनाए गए कठोर उपायों के लिए उनके प्रशासन की आलोचना की गई. इसी बीच, सोशलिस्ट पार्टी द्वारा उन पर 1971 के चुनाव में धांधली का आरोप लगाया और 1975 में इलाहाबाद कोर्ट ने उन्हें दोषी पाया और फिर भारत में इमरजेंसी लागू हो गया. 

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इस अवधि के दौरान कई विवादास्पद कार्यक्रमों में से एक जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने के साधन के रूप में पुरुषों और महिलाओं का जबरन बंध्याकरण था.1977 में, लंबे समय से टल रहे राष्ट्रीय चुनाव हुए और गांधी और उनकी पार्टी सत्ता से बेदखल हो गई. अगले वर्ष, इंदिरा गांधी के समर्थकों ने कांग्रेस पार्टी से अलग होकर कांग्रेस (आई) पार्टी का गठन किया.बाद में 1978 में, उन्हें सरकारी भ्रष्टाचार के आरोप में कुछ समय के लिए जेल भेजा गया.

1979 में, सत्ताधारी जनता पार्टी की सरकार आंतरिक मतभेदों के कारण  गिर गई. जनवरी 1980 में  चुनाव हुए और इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस (आई) पार्टी ने राजनीतिक परिदृश्य में एक आश्चर्यजनक उलटफेर करते हुए भारतीय संसद में फिर से बहुमत हासिल कर लिया. इंदिरा गांधी, जिन्हें उनके सशक्त नेतृत्व के लिए भारतीयों ने गले लगाया, एक बार फिर प्रधानमंत्री बनीं. उनके खिलाफ चल रहे सभी कानूनी मामले बाद में खारिज कर दिए गए.

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