5 रुपये भी नहीं... रेलवे ट्रेन में मिलने वाली चादर कितने रुपये में धुलवाता है?

ट्रेन के एसी कोच में सफर करने वाले यात्रियों को चादर, तकिया, तौलिया और कंबल जैसी सुविधाएं मिलती हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रेलवे इन चादरों और तौलियों को धुलवाने पर कितना खर्च करता होगा?

Advertisement
हर बार ट्रेन में मिलनी वाली चादर को धुलवाने में काफी कम खर्चा होता है (Photo - ITG) हर बार ट्रेन में मिलनी वाली चादर को धुलवाने में काफी कम खर्चा होता है (Photo - ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 08 जून 2026,
  • अपडेटेड 5:07 PM IST

ट्रेन में एसी कोच से सफर करने पर हमें एक बेडरोल मिलता है. इसमें चादर, तकिया, तकिये का कवर, तौलिया जैसी चीजें होती है. हर यात्रा के बाद चादर, पिलो कवर वगैरह की धुलाई होती है. ऐसे में जानते हैं कि आखिर इतने सारे चादर और तकिए के कवर की हर बार धुलाई में कितना खर्च होता है?

ज्यादातर लोगों को लगता है कि एक चादर की धुलाई पर 10-20 रुपये या उससे भी ज्यादा खर्च आता होगा. लेकिन जब रेलवे के रिकॉर्ड सामने आते हैं तो आंकड़े चौंका देते हैं. रेलवे एक चादर को धुलवाने पर 5 रुपये भी खर्च नहीं करता.

Advertisement

सिर्फ इतने में धुलती है एक चादर
भारतीय रेलवे के एक विभागीय लॉन्ड्री टेंडर दस्तावेज के अनुसार, एक बेडशीट (चादर) धोने की निर्धारित दर 3.16 रुपये प्रति पीस है. वहीं एक पिलो कवर धोने का खर्च 1.24 रुपये, फेस टॉवेल का 1.12 रुपये और बाथ टॉवेल का 1.08 रुपये तय किया गया था.

यानी रेलवे की बड़े पैमाने पर होने वाली मशीन आधारित धुलाई व्यवस्था में एक चादर को साफ करने की लागत एक कप चाय से भी कम पड़ती है.

आखिर इतना सस्ता कैसे?
इसकी सबसे बड़ी वजह रेलवे का विशाल नेटवर्क है. देशभर में रोजाना लाखों लिनेन आइटम धुलाई के लिए भेजे जाते हैं. रेलवे की अपनी मैकेनाइज्ड लॉन्ड्री और निजी ठेके पर चलने वाली लॉन्ड्री यूनिट्स बड़े पैमाने पर काम करती हैं.

यह भी पढ़ें: रेलवे अगस्त से बदलेगा 40 साल पुराना रिजर्वेशन सिस्टम! किन चीजों में होगा बदलाव?

Advertisement

जब एक साथ लाखों चादरें, तकिए के कवर और तौलिए धुलते हैं तो प्रति आइटम लागत काफी कम हो जाती है. यही वजह है कि रेलवे बेहद कम कीमत में इस काम को करवा पाता है.

क्या हर यात्रा के बाद धुलती है चादर?
रेलवे का कहना है कि यात्रियों को दी जाने वाली चादर, तकिए के कवर और तौलिए हर इस्तेमाल के बाद धुलवाए जाते हैं. इन्हें दोबारा उपयोग में लाने से पहले लॉन्ड्री में साफ किया जाता है.

रोजाना लाखों यात्रियों तक पहुंचता है बेडरोल
रेलवे के अनुसार, हर दिन लाखों बेडरोल पैकेट यात्रियों को दिए जाते हैं. एक सामान्य बेडरोल किट में दो चादरें, एक तकिया कवर, एक हैंड टॉवेल और एक कंबल शामिल होता है.

यह भी पढ़ें: IRCTC एजेंट की कमाई का क्या है फॉर्मूला? एक टिकट पर इतनी इनकम

एक तरफ होटल या ड्राई क्लीनिंग सेंटर एक चादर धोने के कई गुना ज्यादा पैसे लेते हैं, वहीं भारतीय रेलवे बड़े पैमाने की मशीन आधारित लॉन्ड्री व्यवस्था की वजह से एक चादर सिर्फ 3.16 रुपये में धुलवा लेता है. यानी अगली बार जब ट्रेन में आपको सफेद चादर और तौलिया मिले, तो यह जरूर याद रखिए कि उसे साफ-सुथरा बनाने में रेलवे का खर्च 5 रुपये से भी कम आया है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »