पाकिस्तान में रहने वाले हजारों हिंदू परिवारों के लिए भारत सिर्फ एक पड़ोसी देश नहीं, बल्कि सुरक्षित भविष्य की उम्मीद है. भले ही वहां पैदा हो रहे हर हिंदू की मंजिल भारत की नागरिकता है, लेकिन इस मंजिल तक का रास्ता बहुत मुश्किल है. पहले पाकिस्तान में भारत का वीजा पाने के लिए लाखों रुपये खर्च और महीनों तक इंतजार और फिर वीजा मिल भी जाए तो सरहद पार करने के बाद भारत में नागरिकता तक पहुंचने का सफर.
कई परिवार ऐसे हैं, जो एक दशक से ज्यादा समय से भारत में रह रहे हैं, लेकिन आज भी पूरी तरह भारतीय व्यवस्था का हिस्सा नहीं बन पाए हैं. ‘सरहद पार के हिंदू’ सीरीज के पांचवें पार्ट में समझते हैं कि सबसे पहले उन्हें पाकिस्तान में किन रास्तों से गुजरना पड़ता है? फिर उन्हें कौन-सा वीजा मिलता है? लॉन्ग टर्म वीजा (LTV) क्या होता है? भारतीय नागरिकता कैसे मिलती है? और CAA लागू होने के बाद इस प्रक्रिया में क्या बदलाव आया?
पहला कदम- भारत आने के लिए वीजा
पाकिस्तान से आने वाले अधिकांश हिंदू सीधे भारत में बसने के लिए नहीं आते. वे पहले विजिटर वीजा लेकर भारत पहुंचते हैं. सबसे पहले वे कई लोग सालों तक पैसे जोड़ते हैं, कर्ज लेते हैं. इसके बाद वहां पासपोर्ट बनवाते हैं. कई हिंदू परिवार ऐसे हैं, जिनके पास अपनी जमीन नहीं है और वो सरकारी जमीनों पर जुगाड़ से रह रहे हैं. ऐसे में उन्हें पासपोर्ट बनवाने में दिक्कत आती है.
एक बार पासपोर्ट बनवाने के बाद शुरू होता है एजेंट का चक्कर. जैसे अभी तो वीजा बंद है, लेकिन वैसे उन्हें अगला काम वीजा लगवाने का होता है. इसके लिए वे दिहाड़ी मजदूरी का काम एजेंट के यहां चक्कर लगाते हैं. पढ़े-लिखे ना होने की वजह से उन्हें एजेंट का सहारा लेना पड़ता है. सरकारी फीस बहुत कम है, लेकिन एजेंट कागजी कार्रवाई के नाम पर मोटा पैसे लेते हैं. क्यों वीजा प्रोसेस में रिश्तेदार आदि के कागज वगैहरा चाहिए होते हैं. फिर वीजा लग जाए तो उन्हें सिंध से वाघा जाना होता है, फिर वहां से इधर आते हैं. इसके बाद भारत में जिस शहर का वीजा लगा है, वहां हाजिरी देनी होती है.
दिलीप सिंह सोढ़ा बताते हैं कि आमतौर पर भारत में रहने वाला कोई रिश्तेदार या परिचित उन्हें धार्मिक या पारिवारिक कारणों से बुलाता है. उसी के आधार पर वीजा आवेदन किया जाता है.
'पहले बैंक स्टेटमेंट और सामान्य कागजों के आधार पर वीजा मिल जाता था. अब पहले ए-ग्रेड अधिकारी की मंजूरी लेनी पड़ती है. ए ग्रेड ऑफिसर को भी प्रमाणित करने के लिए कई डिटेल देनी होती है, इस वजह से ऑफिसर भरोसा नहीं करते हैं. इसी वजह से लोगों के लिए भारत आना पहले से ज्यादा मुश्किल हो गया है.' — दिलीप सिंह सोढ़ा
थार एक्सप्रेस भी बंद हो गई
उनका कहना है कि इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के बाद बाद ही वीजा जारी किया जाता है. पहले थार एक्सप्रेस से आते थे, अब वह रास्ता बंद है. एक समय पाकिस्तान से आने वाले हिंदुओं के लिए थार एक्सप्रेस सबसे बड़ा माध्यम थी. यह ट्रेन कराची से हैदराबाद, मीरपुर खास होते हुए पाकिस्तान के मोनाबाव बॉर्डर तक पहुंचती थी. वहां से लोग राजस्थान के रास्ते भारत आते थे और फिर जोधपुर पहुंचते थे.
यह ट्रेन सप्ताह में एक दिन, शुक्रवार को चलती थी और 2006 के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने इसी रास्ते भारत आना शुरू किया. हालांकि, 2019 में भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ने के बाद थार एक्सप्रेस सेवा बंद कर दी गई. इसके बाद भारत आने का रास्ता और मुश्किल हो गया.
अटारी बॉर्डर भी बंद होने से बढ़ी मुश्किल
पाकिस्तान से आए हिंदुओं का कहना है कि पहले रिश्तेदारों के बीच आना-जाना अपेक्षाकृत आसान था. दिलीप सिंह सोढ़ा बताते हैं कि अब हालात बदल चुके हैं.
'पहले रिश्तेदार आसानी से आ-जा लेते थे. लेकिन अब नियम काफी सख्त हो गए हैं. पहलगाम हमले के बाद तो अटारी बॉर्डर से आवाजाही लगभग पूरी तरह बंद हो गई. कई परिवार सिर्फ वीजा खुलने का इंतजार कर रहे हैं.' — दिलीप सिंह सोढ़ा
भारत आने के बाद शुरू होती है दूसरी प्रक्रिया
भारत पहुंचने के बाद भी प्रक्रिया खत्म नहीं होती. वीजा लेकर आने वाले लोगों को निर्धारित समय के भीतर संबंधित अधिकारियों के सामने रिपोर्ट करना होता है. अगर वे दूसरे शहर में रहना चाहते हैं तो उसके लिए भी अनुमति लेनी पड़ती है. इसके बाद वे लॉन्ग टर्म वीजा (LTV) के लिए आवेदन करते हैं.
क्या होता है LTV?
LTV यानी Long Term Visa. यह वह व्यवस्था है जिसके तहत पाकिस्तान से आए हिंदुओं को लंबे समय तक भारत में रहने की अनुमति मिलती है. हिंदू सिंह सोढ़ा बताते हैं कि आवेदन करने के बाद सबसे ज्यादा इंतजार इसी मंजूरी का होता है.
'एलटीवी की फाइल यहां से चली जाती है, लेकिन दिल्ली से मंजूरी आने में काफी समय लग जाता है. जब तक एलटीवी नहीं मिलता, लोगों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.' — हिंदू सिंह सोढ़ा
LTV मिलने के बाद लोग भारत में वैध रूप से लंबे समय तक रह सकते हैं और कुछ जरूरी सुविधाएं भी मिलने लगती हैं.
LTV के बाद क्या मिलता है?
हिंदू सिंह सोढ़ा बताते हैं कि LTV मिलने के बाद आधार कार्ड बन सकता है, लेकिन उस पर विदेशी का उल्लेख रहता है.
'कुछ सुविधाएं मिल जाती हैं, लेकिन बैंक खाता खुलवाने और दूसरी सरकारी प्रक्रियाओं में अभी भी दिक्कतें आती हैं.' — हिंदू सिंह सोढ़ा
नागरिकता तक का सफर
भारत की नागरिकता तुरंत नहीं मिलती. पहले पाकिस्तान से आए हिंदुओं को कई सालों तक इंतजार करना पड़ता था. लंबे वक्त रहने के बाद पासपोर्ट को सब्मिट करना होता था और इस बीच पासपोर्ट वैलिड नहीं रहा तो करवाना होता था. नागरिकता आवेदन, जांच और दूसरी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही भारतीय नागरिकता मिलती थी.
सोभराज भील बताते हैं कि उन्हें भारत आने के कई साल बाद नागरिकता मिली.
'हम पहले एलटीवी पर रहे. उसके बाद नागरिकता की प्रक्रिया पूरी हुई. इंतजार जरूर करना पड़ा, लेकिन आखिरकार नागरिकता मिल गई.' — सोभराज भील
जान बहादुर सिंह भी बताते हैं कि वे 2014 में भारत आए थे और करीब दस साल बाद उन्हें भारतीय नागरिकता मिली.
'नागरिकता मिलने के बाद लगा कि अब हमारी पहचान पूरी तरह भारत से जुड़ गई है.' — जान बहादुर सिंह
CAA के बाद क्या बदला?
पाकिस्तान से आए कई हिंदुओं का कहना है कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागू होने के बाद उम्मीद बढ़ी है. हालांकि, CAA के तहत नागरिकता उन्हीं लोगों को मिल सकती है, जो 2014 तक भारत आ चुके थे और कानून की अन्य शर्तें पूरी करते हैं.
सोभराज भील बताते हैं कि पाकिस्तान में आज भी बड़ी संख्या में लोग भारत आने की कोशिश कर रहे हैं. इसके बाद से प्रक्रिया काफी आसान हो गई है और 2014 से पहले आए काफी हिंदुओं को नागरिकता मिल गई है. लेकिन, 2014 के बाद आने वाला एक बड़ा वर्ग अभी भी नागरिकता के इंतजार में है, क्योंकि बड़ी संख्या में 2014 के बाद लोग उधर से इधर आए हैं.
फिर भी पाकिस्तान से आए अधिकांश हिंदुओं का कहना है कि यह लंबा इंतजार उन्हें मंजूर है. क्योंकि उनके मुताबिक, भारत पहुंचना ही उनके लिए नई जिंदगी की शुरुआत है.
मोहित पारीक