24 जुलाई, 1969 को अपोलो 11 सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर लौट आया. यही वो अंतरिक्ष यान था, जो पहले अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की सतह पर ले गया था. 16 जुलाई 1969 को, पूरी दुनिया ने देखा कि अपोलो 11 ने अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग , एडविन एल्ड्रिन जूनियर और माइकल कॉलिन्स को लेकर कैनेडी अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरी. 76 घंटों में 240,000 मील की यात्रा करने के बाद, अपोलो 11 ने 19 जुलाई को चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश किया.
अगले दिन, दोपहर 1:46 बजे, अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग और एडविन एल्ड्रिन द्वारा संचालित चंद्र मॉड्यूल ईगल, कमांड मॉड्यूल से अलग हो गया, जहां एक तीसरे अंतरिक्ष यात्री, माइकल कॉलिन्स, मौजूद थे. दो घंटे बाद, ईगल ने चंद्रमा की सतह पर उतरना शुरू किया और शाम 4:18 बजे यह अंतरिक्ष यान शांति सागर के दक्षिण-पश्चिमी किनारे पर उतरा.
आर्मस्ट्रांग ने तुरंत ह्यूस्टन स्थित मिशन कंट्रोल को रेडियो पर एक प्रसिद्ध संदेश भेजा - ईगल उतर चुका है. रात 10:39 बजे, निर्धारित समय से पांच घंटे पहले, आर्मस्ट्रांग ने चंद्र मॉड्यूल का द्वार खोला. सत्रह मिनट बाद, रात 10:56 बजे, आर्मस्ट्रांग ने कहा - यह मनुष्य के लिए एक छोटा कदम है, लेकिन मानवता के लिए एक बड़ी छलांग है . कुछ ही क्षणों बाद, वह चंद्र मॉड्यूल की सीढ़ी से उतरे और चंद्रमा की सतह पर कदम रखने वाले पहले इंसान बन गए.
रात 11:11 बजे एल्ड्रिन चंद्रमा की सतह पर उनसे मिले और उन्होंने साथ मिलकर भूभाग की तस्वीरें लीं, अमेरिकी झंडा फहराया. 21 जुलाई की सुबह 1:11 बजे तक, दोनों अंतरिक्ष यात्री चंद्र मॉड्यूल में वापस आ गए थे और हैच बंद कर दिया गया था. दोनों ने वह रात चंद्रमा की सतह पर बिताई और दोपहर 1:54 बजे ईगल ने कमांड मॉड्यूल की ओर वापस उड़ान भरना शुरू किया.
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22 जुलाई की सुबह 12:56 बजे अपोलो 11 ने अपनी घर वापसी की यात्रा शुरू की और 24 जुलाई की दोपहर 12:51 बजे प्रशांत महासागर में सुरक्षित रूप से उतरा. अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर भेजने के अमेरिकी प्रयास की शुरुआत राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी द्वारा 25 मई, 1961 को कांग्रेस के एक विशेष संयुक्त सत्र में की गई एक प्रसिद्ध अपील से हुई थी. इस अपील के आठ साल बाद अमेरिका ने इंसानों सुरक्षित तरीके से चांद पर भेज दिया और वापस भी ले आया.
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