पाकिस्तान के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिनमें लोग बड़ी मात्रा में जानवरों की बची हुई हड्डियां इकट्ठा करते नजर आते हैं. पहली नजर में यह काम बड़ा अजीब लग सकता है और कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर इन हड्डियों का किया क्या जाता है. क्या इन्हें सिर्फ फेंक दिया जाता है या फिर इनका कोई खास इस्तेमाल भी होता है?
दरअसल, जिन हड्डियों को ज्यादातर लोग बेकार समझते हैं, वे कई उद्योगों के लिए कीमती कच्चा माल होती हैं. इन्हें इकट्ठा करके फैक्ट्रियों तक पहुंचाया जाता है, जहां प्रोसेसिंग के बाद इनसे खाद, जिलेटिन, फिल्टर सामग्री, हैंडल और कई अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाते हैं. यही वजह है कि पाकिस्तान समेत कई देशों में हड्डियों को अलग से इकट्टठे करने और बेचने का पूरा कारोबार होता है.
जब हम हड्डियों के बारे में सोचते हैं, तो आमतौर पर उन्हें बेकार समझते हैं. जानवरों के मांस का उपयोग तो कई तरीकों स कर लिया जाता है. लेकिन बची हुई हड्डियां अक्सर कचरे के रूप में देखी जाती हैं. हालांकि, कई देशों में इन हड्डियों का दोबारा इस्तेमाल किया जाता है और उनसे कई तरह के उपयोगी प्रोडक्ट बनाए जाते हैं. सोशल मीडिया और यूट्यूब पर ऐसे कई वीडियो देखने को मिल जाते हैं, जिनमें लोग बड़ी मात्रा में जानवरों की हड्डियां इकट्ठा करते हुए नजर आते हैं. इन्हें देखकर कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर इन हड्डियों का किया क्या जाता है?
असल में हड्डियां कई बिजनेस के लिए एक महत्वपूर्ण कच्चा माल होती हैं. इन्हें साफ करके और प्रोसेस करने के बाद अलग-अलग प्रोडक्ट तैयार किए जाते हैं. हड्डियों का सबसे आम उपयोग बोन मील बनाने में किया जाता है. बोन मील एक प्रकार का पाउडर होता है, जिसे कृषि क्षेत्र में खाद के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. इसमें फॉस्फोरस और कैल्शियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो पौधों की वृद्धि में मदद करते हैं. इसके अलावा हड्डियों से जिलेटिन भी तैयार किया जाता है. जिलेटिन का प्रोडक्ट कई खाद्य पदार्थों, दवाओं और कॉस्मेटिक उत्पादों में किया जाता है. हालांकि इसके लिए विशेष प्रकार की प्रोसेसिंग की जाती है और सभी हड्डियां इस काम के लिए इस्तेमाल नहीं होतीं.
हड्डिडियों से बनाएं जाते हैं कई प्रोडक्ट
कुछ जगहों पर हड्डियों से चारकोल जैसा पदार्थ भी बनाया जाता है, जिसे बोन चार कहा जाता है. इसका उपयोग चीनी को साफ करने, पानी को फिल्टर करने और कुछ औद्योगिक प्रक्रियाओं में किया जाता है. यूट्यूब पर मौजूद कई वीडियो में यह भी दिखाया गया है कि हड्डियों से सजावटी वस्तुएं, बटन, हैंडल और अन्य हस्तशिल्प उत्पाद बनाए जाते हैं. पहले के समय में हड्डियों का उपयोग कंघी, चाकू के हैंडल और कई घरेलू वस्तुओं को बनाने में भी किया जाता था. कुछ वीडियो में रेजर या ब्लेड के हैंडल जैसे उत्पाद बनाने का दावा भी किया जाता है. हालांकि ऐसे प्रोडक्ट आमतौर पर हड्डी के बाहरी हिस्से का उपयोग करके तैयार किए जाते हैं. आधुनिक समय में ज्यादातर रेजर प्लास्टिक, धातु या अन्य सिंथेटिक सामग्री से बनाए जाते हैं, लेकिन पारंपरिक हस्तशिल्प उद्योगों में हड्डियों का उपयोग आज भी देखा जा सकता है.
हड्डियों के पुनः उपयोग का एक बड़ा फायदा यह है कि इससे कचरा कम होता है. यदि इनका सही तरीके से उपयोग किया जाए, तो जो सामग्री बेकार समझी जाती है, वह उद्योगों के लिए उपयोगी संसाधन बन सकती है. यही कारण है कि कई जगहों पर कसाईखानों और मांस उद्योगों से निकलने वाली हड्डियों को अलग से इकट्ठा किया जाता है. हालांकि हड्डियों की प्रोसेसिंग के दौरान स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी नियमों का पालन करना बेहद जरूरी होता है.
यदि इन्हें सही तरीके से साफ और प्रोसेस न किया जाए, तो स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं. इसलिए इस काम को आमतौर पर लाइसेंस प्राप्त इकाइयों और उद्योगों द्वारा किया जाता है. कुल मिलाकर, जानवरों की हड्डियां सिर्फ कचरा नहीं होतीं. इन्हें प्रोसेस करके खाद, जिलेटिन, फिल्टर सामग्री, हस्तशिल्प उत्पाद और कई अन्य उपयोगी चीजों में बदला जा सकता है. यही वजह है कि कई जगहों पर लोग बड़ी मात्रा में हड्डियां इकट्ठा करते हैं और उन्हें उद्योगों तक पहुंचाते हैं, जहां उनका दोबारा उपयोग किया जाता है.
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