Rent Agreement: 11 महीने का रेंट एग्रीमेंट बनवा लिया... क्या अब मकान खाली नहीं कर सकते?

भारत में ज्यादातर लोग 11 महीने का रेंट एग्रीमेंट बनवाते हैं, लेकिन क्या इसका मतलब है कि किरायेदार बीच में मकान नहीं छोड़ सकता या मकान मालिक उसे नहीं निकाल सकता? चलिए जानते हैं क्या कहता है नियम.

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अगर एग्रीमेंट में नोटिस पीरियड तय है, तो किरायेदार को उसका पालन करना चाहिए. ( Photo: ITG) अगर एग्रीमेंट में नोटिस पीरियड तय है, तो किरायेदार को उसका पालन करना चाहिए. ( Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 08 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 1:51 PM IST

अगर आप किराए के मकान में रहते हैं या अपना घर किराए पर देते हैं, तो आपने 11 महीने के रेंट एग्रीमेंट के बारे में जरूर सुना होगा. भारत में ज्यादातर मकान मालिक और किरायेदार 11 महीने का ही रेंट एग्रीमेंट बनवाते हैं. लेकिन कई लोगों के मन में एक सवाल हमेशा रहता है कि अगर 11 महीने का एग्रीमेंट बन गया, तो क्या अब बीच में मकान खाली नहीं किया जा सकता? क्या किरायेदार को पूरे 11 महीने तक रहना ही पड़ेगा? या फिर मकान मालिक भी इस दौरान किरायेदार को नहीं निकाल सकता?

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ऐसी कई गलतफहमियां लोगों के बीच फैली हुई हैं. कुछ लोगों को लगता है कि 11 महीने का एग्रीमेंट होते ही दोनों पक्ष पूरी तरह बंध जाते हैं. जबकि सच इससे थोड़ा अलग है. आइए जानते हैं 11 महीने के रेंट एग्रीमेंट का मतलब क्या होता है और इसके दौरान किसके क्या अधिकार होते हैं.

आखिर 11 महीने का रेंट एग्रीमेंट ही क्यों बनता है?
पटियाला कोर्ट के वकील महमूद आलम ने बताया कि भारत में ज्यादातर रेंट एग्रीमेंट 11 महीने के लिए बनाए जाते हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह कानूनी प्रक्रिया और सुविधा मानी जाती है. कई राज्यों में 12 महीने या उससे ज्यादा अवधि के एग्रीमेंट पर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया अलग हो सकती है, इसलिए लोग आमतौर पर 11 महीने का एग्रीमेंट बनवाना आसान समझते हैं. हालांकि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि 11 महीने का एग्रीमेंट किसी खास कानून के तहत अनिवार्य है. अगर दोनों पक्ष चाहें तो इससे कम या ज्यादा अवधि का एग्रीमेंट भी बना सकते हैं.

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ज्यादातर रेंट एग्रीमेंट में एक नोटिस पीरियड दिया जाता है. यह 15 दिन, 30 दिन, 60 दिन या दोनों पक्षों की सहमति के अनुसार अलग-अलग हो सकता है. अगर किरायेदार मकान छोड़ना चाहता है, तो उसे एग्रीमेंट में तय किए गए नोटिस पीरियड का पालन करना होता है. इसी तरह अगर मकान मालिक किसी वजह से मकान खाली करवाना चाहता है, तो उसे भी एग्रीमेंट में लिखी शर्तों के अनुसार पहले नोटिस देना पड़ता है. यानी केवल 11 महीने का एग्रीमेंट होने से कोई भी पक्ष पूरी तरह बंध नहीं जाता.

क्या मकान मालिक कभी भी घर खाली करवा सकता है?
अगर किरायेदार समय पर किराया दे रहा है और एग्रीमेंट की शर्तों का पालन कर रहा है, तो आमतौर पर मकान मालिक को भी एग्रीमेंट में लिखे नियमों का पालन करना पड़ता है. अगर एग्रीमेंट में लिखा है कि मकान खाली कराने से पहले 30 दिन का नोटिस देना होगा, तो मकान मालिक को भी वही प्रक्रिया अपनानी होगी. बिना उचित कारण या तय प्रक्रिया का पालन किए अचानक मकान खाली कराने की कोशिश विवाद का कारण बन सकती है.

क्या किरायेदार जब चाहे तब मकान छोड़ सकता है?
अगर एग्रीमेंट में नोटिस पीरियड तय है, तो किरायेदार को उसका पालन करना चाहिए. उदाहरण के लिए अगर 30 दिन पहले सूचना देने की शर्त है, तो किरायेदार को मकान छोड़ने से पहले उतने समय पहले मकान मालिक को जानकारी देनी होगी. अगर बिना नोटिस दिए अचानक मकान छोड़ दिया जाता है, तो एग्रीमेंट में लिखी शर्तों के अनुसार सिक्योरिटी डिपॉजिट से कुछ पैसे काटे जा सकते हैं या अन्य नियम लागू हो सकते हैं.

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अगर एग्रीमेंट में शर्त ही नहीं लिखी हो तो क्या होगा?
कई बार लोग जल्दबाजी में साधारण कागज पर एग्रीमेंट बना लेते हैं और उसमें नोटिस पीरियड, सिक्योरिटी डिपॉजिट या मकान खाली करने के नियम साफ-साफ नहीं लिखते. ऐसी स्थिति में बाद में विवाद होने की संभावना बढ़ जाती है. इसलिए रेंट एग्रीमेंट बनवाते समय हर जरूरी बात लिखित रूप में शामिल करना बेहतर माना जाता है. इससे मकान मालिक और किरायेदार दोनों के अधिकार स्पष्ट रहते हैं.

आमतौर पर 11 महीने पूरे होने पर एग्रीमेंट की अवधि समाप्त हो जाती है. इसके बाद दोनों पक्ष चाहें तो नया एग्रीमेंट बनाकर किरायदार रह सकता है. कई बार किराया बढ़ाकर नया एग्रीमेंट तैयार किया जाता है. अगर एग्रीमेंट खत्म होने के बाद भी किरायेदार उसी मकान में रह रहा है, तो आगे की स्थिति दोनों पक्षों की सहमति और लागू नियमों पर निर्भर करती है. इसलिए समय पूरा होने पर नया एग्रीमेंट बनवा लेना बेहतर रहता है.

रेंट एग्रीमेंट बनवाते समय किन बातों का ध्यान रखें?
रेंट एग्रीमेंट केवल एक औपचारिक कागज नहीं होता, बल्कि भविष्य में होने वाले विवादों से बचाने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज भी होता है. इसलिए इसमें किराए की राशि, सिक्योरिटी डिपॉजिट, किराया देने की तारीख, बिजली-पानी का खर्च, नोटिस पीरियड, मकान खाली करने की प्रक्रिया और दोनों पक्षों की जिम्मेदारियां साफ-साफ लिखी होनी चाहिए. एग्रीमेंट पर दोनों पक्षों के सिग्नेचर होने चाहिए और जहां जरूरी हो, वहां गवाहों के सिग्नेचर भी करवाने चाहिए. जरूरत पड़ने पर स्थानीय नियमों के अनुसार रजिस्ट्रेशन कराने पर भी विचार किया जा सकता है.

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11 महीने का रेंट एग्रीमेंट होने का मतलब यह नहीं है कि किरायेदार पूरे 11 महीने तक हर हाल में उसी मकान में रहेगा या मकान मालिक इस दौरान कुछ भी नहीं कर सकता. असली महत्व उस एग्रीमेंट में लिखी शर्तों का होता है. यदि नोटिस पीरियड, मकान खाली करने की प्रक्रिया और अन्य नियमों का पालन किया जाए, तो दोनों पक्ष बिना किसी विवाद के किरायेदारी समाप्त कर सकते हैं. इसलिए रेंट एग्रीमेंट पर सिग्नेचर करने से पहले उसे ध्यान से पढ़ना, हर शर्त को समझना और जरूरत पड़ने पर कानूनी सलाह लेना हमेशा समझदारी भरा कदम माना जाता है.

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