हरिद्वार महाकुंभ: व्यवस्थाओं से नाराज साधुओं ने मेला अधिकारी पर किया हमला, आंख में आई चोट

अपने कैंप में अपर्याप्त सुविधाएं होने के आरोप के साथ निर्मोही अखाड़े के बैरागी संतों द्वारा एक मेला अधिकारी पर हमला कर दिया गया, जिससे उनकी आंख में चोट आ गई है.

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हरिद्वार में महाकुंभ चल रहा है (फाइल फोटो) हरिद्वार में महाकुंभ चल रहा है (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • हरिद्वार ,
  • 02 अप्रैल 2021,
  • अपडेटेड 9:46 AM IST
  • निर्मोही अखाड़े के संत व्यवस्थाओं से हैं नाराज
  • निरीक्षण करने पहुंचे अधिकारी को पीछे से धक्का दिया
  • चश्मा टूटने से अधिकारी की आंख में आई चोट

हरिद्वार में कुंभ मेले का विधिवत आयोजन हो चुका है, श्रद्धालुओं के लिए साथ-साथ हिन्दू समाज के साधु-संत भी स्नान करने के लिए कुंभ पहुंच रहे हैं. जिसके भारी इंतजाम राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे हैं. लेकिन अपने कैंप में अपर्याप्त सुविधाएं होने से नाराज निर्मोही अखाड़े के बैरागी संतों द्वारा एक मेला अधिकारी पर हमला कर दिया गया है, जिससे उनकी आंख में चोट आ गई है.

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गुरुवार के दिन एडिशनल मेला ऑफिसर हरवीर सिंह जिनकी आंख में चोट आई है वे निर्मोही अखाड़ा के कैंप में व्यवस्थाएं देखने के लिए पहुंचे थे. वे वहां जानने की कोशिश कर रहे थे कि प्रशासन द्वारा की गईं सुविधाओं से साधु-संत संतुष्ट हैं कि नहीं या कोई कमी रह गई है.

मेला आईजी संजय गुंज्याल ने बताया कि शुरुआत में साधु-संत मेला अधिकारी हरवीर सिंह से कुछ शिकायतें कर रहे थे. बातचीत के दौरान ही किसी ने पीछे से उनमें धक्का मार दिया. हरवीर सिंह चश्मा पहने हुए थे, जो इस दौरान उनकी आंख के पास ही टूट गया. इससे उनकी एक आंख में चोट आ गई है. मेला आईजी संजय गुंज्याल ने बताया कि इस मामले को लेकर विस्तारपूर्वक जांच की जा रही है.

आपको बता दें कि 1 अप्रैल से हरिद्वार में महाकुंभ की विधिवत शुरुआत हो चुकी है. ये कुंभ मेला 30 अप्रैल तक चलेगा. इस दौरान तीन शाही स्नान होने हैं. 12 अप्रैल, 14 अप्रैल और 27 अप्रैल को. वहीं इससे पहले ही एक शाही स्नान 11 मार्च को संपन्न हो चुका है. कुंभ मेले में भाग लेने के लिए श्रद्धालुओं को 72 घंटे पहले की कोरोना नेगेटिव रिपोर्ट दिखानी होगी. भारत में कुंभ मेला हर 12वें वर्ष प्रयागराज, उज्जैन, हरिद्वार और नासिक में बारी-बारी से आयोजित किया जाता है. लेकिन इस बार ऐसा संयोग ऐसा हुआ है कि कुंभ 12 साल की बजाय 11वें साल में ही आयोजित किया जा रहा है. ये संयोग 83 साल बाद आया है. 

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