पेपर लीक और नकल रोकने के लिए उत्तराखंड में बनाए गए सख्त कानून, राज्यपाल की मंजूरी के बाद किए लागू

पेपर लीक और नकल की घटनाओं के लिए उत्तराखंड सरकार नए कानून लेकर आई है, जो राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद अब लागू भी हो गया है. इन कानूनों में आजीवन कारावास से लेकर दस करोड़ रुपए तक के जुर्माना वसूलने का प्रावधान है. सरकार को उम्मीद है कि इससे आगे घटनाओं में कमी आएगी.

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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

अंकित शर्मा

  • देहरादून,
  • 11 फरवरी 2023,
  • अपडेटेड 3:08 AM IST

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने उत्तराखण्ड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम व निवारण के उपाय) अध्यादेश 2023 को मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही ये अध्यादेश प्रदेश में लागू हो गया है.

उत्तराखण्ड प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता एवं शुचिता को सुनिश्चित करने के लिए को उत्तराखण्ड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम व निवारण के उपाय) अध्यादेश 2023 को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा अनुमोदन प्रदान करते हुए राज्यपाल की मंजूरी के लिए अग्रसारित किया था. इस अध्यादेश में दोषियों के खिलाफ सख्त प्रावधान किए गए हैं. 

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इसके मुताबिक अगर कोई व्यक्ति, प्रिटिंग प्रेस, सेवा प्रदाता संस्था, प्रबंध तंत्र, कोचिंग संस्थान आदि अनुचित साधनों में लिप्त पाया जाता है तो उसके लिए आजीवन कारावास तक की सजा तथा दस करोड़ रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है. इसके आलावा अगर कोई व्यक्ति संगठित रूप से परीक्षा कराने वाली संस्था के साथ षडयंत्र करता है तो आजीवन कारावास तक की सजा एवं 10 करोड़ रूपए तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है. 

यदि कोई परीक्षार्थी प्रतियोगी परीक्षा में स्वयं नकल करते हुए या अन्य परीक्षार्थी को नकल कराते हुए अनुचित साधनों में लिप्त पाया जाता है तो उसके लिए तीन वर्ष के कारावास के साथ न्यूनतम पांच लाख के जुर्माने का प्रावधान किया गया है. यदि वह परीक्षार्थी दोबारा दूसरी प्रतियोगी परीक्षा में फिर दोषी पाया जाता है तो न्यूनतम दस वर्ष के कारावास तथा न्यूनतम 10 लाख जुर्माने का प्रावधान किया गया है. 

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यदि कोई परीक्षार्थी नकल करते हुए पाया जाता है तो आरोप पत्र दाखिल होने की तिथि से दो से पांच वर्ष के लिए डिबार करने तथा दोषसिद्ध ठहराए जाने की दशा में दस वर्ष के लिए समस्त प्रतियोगी परीक्षाओं से डिबार किए जाने का प्रावधान किया गया है. यदि कोई परीक्षार्थी दोबारा नकल करते हुए पाया जाता है तो क्रमशः पांच से दस वर्ष के लिए तथा आजीवन समस्त प्रतियोगी परीक्षाओं से डिबार किए जाने का प्रावधान किया गया है. इसके अलावा अनुचित साधनों के इस्तेमाल से अर्जित सम्पति की कुर्की का भी प्रावधान है.

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