बारिश के लिए साधु की साधना, सिर पर आग जलाकर शुरू की तपस्या

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में एक 100 साल के साधु लोगों को भीषण गर्मी से निजात दिलाने के लिए सिर पर आग रख कर और चारों तरफ आग जलाकर तप करने बैठ गए हैं. बाबा को देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट गई. हर किसी ने हाथ जोड़कर बाबा से आशीर्वाद लिया.

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बाल श्रम (प्रतीकात्मक तस्वीर-PTI) बाल श्रम (प्रतीकात्मक तस्वीर-PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 जून 2019,
  • अपडेटेड 8:24 AM IST

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में एक 100 साल के साधु लोगों को भीषण गर्मी से निजात दिलाने के लिए सिर पर आग रख कर और चारों तरफ आग जलाकर तप करने बैठ गए हैं. बाबा को देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट गई. हर किसी ने हाथ जोड़कर बाबा से आशीर्वाद लिया.

खीरी जिले की सदर तहसील के रहने वाले बुजुर्ग साधु बाबा लखन दास त्यागी लोगों के कल्याण और भारी वर्षा की मांग को लेकर अपने सिर पर आग और चारों तरफ आग जला कर बैठ गए हैं. भीषण गर्मी और खुले आसमान के नीचे आग जलाकर तब कर रहे साधु की जानकारी जब लोगों को मिली तो मौके पर सैकड़ों की संख्या में महिला और पुरुष पहुंच गए.

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बता दें कि देशभर में गर्मी ने लोगों को बेहाल कर रखा है. मानसून ने 8 जून को एक सप्ताह की देरी से केरल में दस्तक दी थी. देश के विभिन्न इलाकों में बारिश होना शुरू ही हुआ था कि तभी 10 जून को अरब सागर में चक्रवाती तूफान वायु ने आकार लेना शुरू किया. उसके बाद मॉनसून की बारिश थम सी गई. 11 जून से मॉनसून की बढ़त पूरी तरह से रुक गई.

बारिश में 43 फीसदी कमी

मौसम के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, पूरे देश में मॉनसून की बारिश में भारी कमी रिकॉर्ड की गई है. 1 जून से लेकर 15 जून के दौरान देशभर में 63.2 मिलीमीटर की औसत बारिश के मुकाबले 36.5 मिलीमीटर की बारिश रिकॉर्ड की गई. इस तरह से कहा जा सकता है कि अभी तक मॉनसून की बारिश 43 फीसदी कम रही है.

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चक्रवात ‘वायु’ ने जब अरब सागर में आकार लिया था तो मौसम विभाग का अनुमान था कि यह 13 जून को गुजरात के सौराष्ट्र पहुंचेगा. हालांकि, चक्रवात ‘वायु’ जब गुजरात के तटीय इलाके के पास पहुंचा तो उसने अपनी दिशा बदल दी और यह तूफान उत्तर-उत्तर पश्चिम दिशा में चल दिया. यहां चक्रवाती तूफान 'वायु' ने एक बार फिर अपनी दिशा बदली. ताजा अनुमानों के मुताबिक, यह तूफान समंदर में ही 17 जून को डीप डिप्रेशन बनकर खत्म हो जाएगा.

गुजरात को चक्रवात ‘वायु’ ने भले ही बख्श दिया हो, लेकिन इस तूफान ने जिस तरह से बार-बार दिशा बदली, उससे मानसून की रफ्तार को पूरी तरह से थम गई. मौसम के जानकारों के मुताबिक, चक्रवात एक बड़ा वेदर सिस्टम होता है. मानसून के दौरान जब भी चक्रवात अरब सागर में बनता है तो मानसून की हवाओं को अपनी तरफ खींचता है और इससे मानसून की रफ्तार थम जाती है. इसके उलट अगर मानसून के सीजन में बंगाल की खाड़ी में कोई चक्रवात या डीप डिप्रेशन बनता है तो मानसून की बारिश में जबरदस्त इजाफा हो जाता है, लेकिन इस बार अरब सागर में बने चक्रवात ने मानसून की हालत खस्ता कर दी है.

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