प्रियंका गांधी की ताजपोशी के साथ ही बदलेगी कांग्रेस की टीम यूपी

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को मजबूत करने के लिए राहुल गांधी ने प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया को जिम्मेदारी सौंपने के बाद अब पार्टी सूबे में ईस्टर्न और वेस्टर्न यूपी के लिए दो उपाध्यक्ष भी नियुक्त करने जा रही है. एक उपाध्यक्ष प्रियंका के साथ होगा तो दूसरा सिंधिया के साथ. इसके अलावा कांग्रेस ने यूपी में पांच कमेटियां बनाने का फैसला किया है.

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प्रियंका गांधी और राहुल गांधी (फोटो-PTI) प्रियंका गांधी और राहुल गांधी (फोटो-PTI)

कुमार अभिषेक

  • लखनऊ,
  • 25 जनवरी 2019,
  • अपडेटेड 12:41 PM IST

देश की सत्ता में वापसी के लिए कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश पर अपनी निगाहें जमा दी हैं. सूबे में वेंटिलेटर पर पड़ी कांग्रेस में जान डालने के लिए पार्टी ने पूरी तरह से कमर कस लिया है. दरअसल भारतीय राजनीति में कहा जाता है कि देश की सत्ता का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है तो इसके पीछे अपना सियासी इतिहास भी है. सूबे में सबसे ज्यादा 80 लोकसभा सीटें हैं यानी देश की हर सातवीं सीट यूपी की है. इसके अलावा केंद्र में सरकार बनाने के लिए जितनी सीटें चाहिए उसकी एक तिहाई सीटें इसी राज्य में हैं. यही वजह है कि कांग्रेस सूबे में नए तेवर के साथ लोकसभा चुनाव के रण में उतरने जा रही है.

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प्रियंका गांधी के सक्रिय राजनीति में कदम रखते ही पार्टी ने उन्हें महासचिव बनाते हुए पूर्वांचल की जिम्मेदारी सौंपी है. वहीं, पश्चिमी यूपी का प्रभार ज्योतिरादित्य सिंधिया को दिया गया है. सूत्रों की मानें तो अब पार्टी सूबे में ईस्टर्न और वेस्टर्न यूपी दो उपाध्यक्ष भी नियुक्त करने जा रही है. एक उपाध्यक्ष प्रियंका के साथ होगा तो दूसरा सिंधिया के साथ.

सूत्रों के मुताबिक प्रियंका के दस्तक के साथ कांग्रेस ने यूपी में पांच कमेटियां बनाने का फैसला किया. इसमें मेनिफेस्टो कमेटी, अल्पसंख्यक कमेटी, कोऑर्डिनेशन कमेटी और मीडिया कमेटी के साथ-साथ पार्टी के नए कोषाध्याक्ष व उसके साथ एक अन्य कमेटी बनाई जा सकती है.  

वहीं, उत्तर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के मेकओवर का काम पिछले कई महीने से चल रहा है. दरअसल अब प्रियंका गांधी के कमान संभालने के बाद माना जा रहा है कि वो यहीं से पूर्वांचल में पार्टी में जान डालने का काम करेंगी.

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दरअसल कांग्रेस पिछले तीन दशक से सूबे की सत्ता से बाहर है और लगातार पार्टी का ग्राफ नीचे गिरा है. हालत ये है कि 2017 के विधानसभा चुनाव में अपना दल भी कांग्रेस से ज्यादा सीटें जीतने में सफल रही थी. 2014 के लोकसभा चुनाव में अमेठी और रायबरेली सीट ही कांग्रेस जीत सकी थी.

2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को अलग रखने का सपा-बसपा ने गठबंधन का फैसला कर लिया है. जबकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से लेकर पार्टी के नेता लंबे समय से सूबे में बसपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की बात करते रहे हैं. लेकिन सपा-बसपा दोनों ने कांग्रेस को तवज्जो नहीं दी.

कांग्रेस ने ऐसे में गुलाम नबी आजाद के हाथों से यूपी का प्रभार लेकर प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया को सौंप दिया है. प्रियंका गांधी की राजनीतिक लॉन्चिंग 10 फरवरी को लखनऊ के रमाबाई मैदान में होगी. प्रियंका गांधी को पार्टी महासचिव बनाये जाने के बाद बड़ी रैली का आयोजन किया जा रहा है. माना जा रहा है कि राहुल और प्रियंका एक साथ मंच पर नजर आएंगे.

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