वृंदावन की विधवाओं की दयनीय स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई

वृंदावन की बेसहारा और विधवा महिलाओं की दयनीय स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जाहिर की है. इन महिलाओं के साथ जिस तरह से व्यवहार किया जाता है उस पर कोर्ट ने खासी चिंता जताई है.

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सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से मांगा जवाब सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से मांगा जवाब

अहमद अजीम

  • नई दिल्ली,
  • 03 सितंबर 2016,
  • अपडेटेड 1:59 PM IST

वृंदावन की बेसहारा और विधवा महिलाओं की दयनीय स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जाहिर की है. इन महिलाओं के साथ जिस तरह से व्यवहार किया जाता है उस पर कोर्ट ने खासी चिंता जताई है. सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. कोर्ट ने राष्ट्रीय महिला आयोग को भी इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा है.

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सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- आखिर कैसे 18 साल से कम उम्र की महिलाओं की शादी हो रही है और आखिर क्यों विधवा हो जाने पर लड़कियों के घर वाले उन्हें विधवा आश्रम भेज देते हैं?

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान दौरान सवाल उठाया कि कैसे 18 साल से कम उम्र की महिलाओं की शादी हो रही है और विधवा होने पर घर से दूर कर दी जाती हैं. सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से इस पर जवाब दाखिल करने को कहा है. मामले की अगली सुनवाई 11 नवंबर को होगी.

एक गैर सरकारी संस्था ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है जिसमें इन विधवा महिलाओं की खराब स्थिति की ओर कोर्ट का ध्यान खींचा है. याचिका में कहा गया है कि वृंदावन में विधवा महिलाओं की स्थिति बेहद दयनीय है और कोर्ट उनके हालत बेहतर बनाने के लिए ज़रूरी निर्देश जारी करे.

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याचिका में कहा गया है की ये विधवाएं घंटों भजन गाती हैं और इसके लिए 18 रुपये मेहनताने के तौर पर दिए जाते हैं.

याचिका में कहा गया है कि राष्ट्रीय महिला आयोग ने विधवा वृधाश्रम में रहने वाली 1000 महिलाओं पर स्टडी की थी जिसमें पाया गया की इनमें से काफी महिलाओं के बच्चे हैं लेकिन वो इन महिलाओं को अपने पास नहीं रखना चाहते.

स्टडी में ये भी पाया गया कि मथुरा और वृन्दावन में 5000 से 10हज़ार विधवा महिलाएं रहती हैं जो भीख मांगती हैं और इनमे से कई का यौन शोषण भी होता है.

इसी साल मई में सुप्रीम कोर्ट ने इन विधवाओं की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को ठीक से समझने और डाटा इकठ्ठा करने के लिए एक 7 सदस्यीय समिति का गठन किया था.

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