3 महीने से दसवीं की छात्रा का यौन शोषण कर रहा था अंग्रेजी का शिक्षक, ऐसे हुआ खुलासा

तेलंगाना के नालगोंडा जिले के नकरेकल स्थित ज़िला परिषद हाई स्कूल में अंग्रेजी शिक्षक ममिडी श्रीनिवास पर 10वीं की छात्रा से तीन महीने तक यौन शोषण का आरोप लगा. छात्रा ने पिता को बताया, जिसके बाद मामला सामने आया. पुलिस ने POCSO एक्ट में केस दर्ज किया और विभाग ने शिक्षक को निलंबित कर दिया.

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छात्रा ने ये बात पिता को बताई फिर शिकायत दर्ज कराई गई. (Photo: Representational) छात्रा ने ये बात पिता को बताई फिर शिकायत दर्ज कराई गई. (Photo: Representational)

अब्दुल बशीर

  • नालगोंडा,
  • 14 सितंबर 2025,
  • अपडेटेड 10:19 PM IST

तेलंगाना के नालगोंडा जिले में स्थित नकरेकल के ज़िला परिषद हाई स्कूल से यौन शोषण का चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां अंग्रेजी शिक्षक ममिडी श्रीनिवास पर कक्षा 10 की छात्रा से पिछले तीन महीने से लगातार यौन शोषण करने का आरोप लगा है. इस घटना ने स्थानीय लोगों, अभिभावकों और छात्र संगठनों को आक्रोशित कर दिया है.

छात्रा ने बयां की आपबीती
मामला तब सामने आया जब पीड़ित छात्रा ने अपने पिता को आपबीती सुनाई. बेटी की बात सुनकर पिता का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने तुरंत स्कूल पहुंचकर आरोपी शिक्षक से बात की. इसके बाद परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.

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POCSO एक्ट में केस दर्ज
शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी शिक्षक के खिलाफ पोक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है. वहीं, शिक्षा विभाग ने आरोपी अंग्रेजी शिक्षक ममिडी श्रीनिवास को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया है.

पहले भी लगे हैं आरोप
स्थानीय लोगों और छात्र संगठनों का कहना है कि आरोपी शिक्षक पर पहले भी छात्राओं से दुर्व्यवहार करने के आरोप लग चुके हैं. श्रीनिवास एक निजी कॉलेज भी चलाता है, जहां पर भी उसके खिलाफ छात्राओं से अनुचित व्यवहार की शिकायतें आई थीं.

सख्त कार्रवाई की मांग
घटना के बाद से ही इलाके में गुस्से का माहौल है. अभिभावकों और छात्र संगठनों ने मांग की है कि आरोपी को सिर्फ निलंबित करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उसे स्थायी रूप से नौकरी से बर्खास्त किया जाए और कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए. लोगों का कहना है कि अगर आरोपी पर समय रहते सख्त कार्रवाई की गई होती, तो यह घटना टाली जा सकती थी.

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छात्राओं की सुरक्षा पर सवाल
इस घटना ने स्कूलों में छात्राओं की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. अभिभावक चाहते हैं कि शिक्षा विभाग इस तरह के मामलों पर शून्य सहनशीलता की नीति अपनाए और छात्राओं के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करे.

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