'बीजेपी महासचिव बीएल संतोष को गिरफ्तार कराना चाहते थे KCR', फोन टैपिंग मामले में पूर्व पुलिस अधिकारी का बड़ा दावा

पूर्व पुलिस उपायुक्त राधा किशन राव ने एक बड़े फोन टैपिंग घोटाले में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली है. उन्होंने भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव पर एक वरिष्ठ बीजेपी नेता को गिरफ्तार कराने की साजिश रचने का भी आरोप लगाया है, जिससे पार्टी को समझौता करने के लिए मजबूर होना पड़ता.

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BRS चीफ केसीआर पर पूर्व अधिकारी ने बड़े आरोप लगाए हैं (फाइल फोटो) BRS चीफ केसीआर पर पूर्व अधिकारी ने बड़े आरोप लगाए हैं (फाइल फोटो)

अपूर्वा जयचंद्रन

  • हैदराबाद,
  • 28 मई 2024,
  • अपडेटेड 7:12 PM IST

हैदराबाद पुलिस के सामने कथित तौर पर दिए गए एक कबूलनामे के मुताबिक पूर्व पुलिस उपायुक्त राधा किशन राव ने एक बड़े फोन टैपिंग घोटाले में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली है. उन्होंने भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव पर एक वरिष्ठ बीजेपी नेता को गिरफ्तार कराने की साजिश रचने का भी आरोप लगाया है, जिससे पार्टी को समझौता करने के लिए मजबूर होना पड़ता.

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मामले के सिलसिले में मार्च में गिरफ्तार राधा किशन राव ने अपने बयान में कई उच्च पदस्थ अधिकारियों और राजनीतिक हस्तियों का नाम लिया है. राव ने आरोप लगाया कि 'पेद्दयाना' - केसीआर का अप्रत्यक्ष संदर्भ, उनकी पार्टी के विधायकों को तोड़ने के कथित प्रयास के मामले में बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव बीएल संतोष की गिरफ्तारी चाहते थे.

उन्होंने आगे दावा किया कि यह प्रयास उनकी बेटी और एमएलसी के कविता के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय के मामले से छुटकारा पाने के लिए भाजपा को समझौते के लिए मजबूर करने का था. बीआरएस नेता कविता को ईडी ने मार्च में दिल्ली की अब समाप्त हो चुकी शराब नीति घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था.

रिपोर्ट में कहा गया है, “बाद में, एसआईटी का गठन किया गया और केसीआर मामले को मजबूत बनाने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय स्तर के नेता बीएल संतोष की गिरफ्तारी चाहते थे, ताकि भाजपा समझौता कर सके, और इसका इस्तेमाल उनकी बेटी एमएलसी पर ईडी मामले से छुटकारा पाने के लिए किया जा सके. हालांकि, केरल में साइबराबाद पुलिस अधिकारियों की अक्षमता के कारण, गिरफ्तारी नहीं हो सकी और मामला हाईकोर्ट में चला गया, जहां से गिरफ्तारी पर रोक लग गई. फिर एसआईटी मामला सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया."

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राव ने दावा किया कि 'पेद्दयाना' ''उनकी उम्मीदों के मुताबिक काम पूरा न कर पाने के कारण बहुत नाराज थे. पूर्व डीसीपी ने कहा कि वह मामले के बारे में अधिक जानकारी नहीं देंगे क्योंकि उन पर 'पेद्दयाना' का कर्च है क्योंकि उनको दो बार फिर से नियुक्त किया था और 2020 में रिटायरमेंट के बाद सिटी टास्क फोर्स में तैनात किया था.

राव के कबूलनामे में आरोप लगाया गया कि व्यापक फोन टैपिंग ऑपरेशन का निर्देश विशेष खुफिया शाखा (एसआईबी) के प्रमुख प्रभाकर राव ने दिया था. पूर्व डीसीपी ने आरोप लगाया कि प्रभाकर राव के नेतृत्व में एसआईबी ने बीआरएस के लिए खतरा माने जाने वाले व्यक्तियों को व्यवस्थित रूप से निशाना बनाया और जानकारी एकत्र की. कबूलनामे में कहा गया है, "यह खुफिया जानकारी एसआईबी डीएसपी प्रणीत कुमार को दी गई, जिन्होंने प्रोफाइल विकसित करने के लिए इन व्यक्तियों की लगातार निगरानी की, जिनका इस्तेमाल बीआरएस पार्टी के लिए संभावित खतरों को नियंत्रित और बेअसर करने के लिए किया जा सकता है."

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