व्हाट्सऐप जासूसी केस: कांग्रेस नेता आनंद शर्मा की अगुवाई में संसदीय समिति करेगी जांच

कांग्रेस नेताओं की अगुवाई वाली दो संसदीय समिति व्हाट्सऐप जासूसी मामले की जांच करेगी. सूचना एवं प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति के अध्यक्ष शशि थरूर ने कहा कि साइबर सिक्योरिटी एक बड़ा मुद्दा है और इसपर समिति सरकार से स्पष्टीकरण मांगेगी.

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कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा (PTI फोटो) कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा (PTI फोटो)

हिमांशु मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 15 नवंबर 2019,
  • अपडेटेड 2:24 PM IST

  • पेगासस स्पाईवेयर की मदद से हुई थी जासूसी
  • साइबर सिक्योरिटी पर चर्चा करेंगे कांग्रेस नेता

कांग्रेस नेताओं की अगुवाई वाली दो संसदीय समिति व्हाट्सऐप जासूसी मामले की जांच करेगी. इसमें गृह सचिव सहित तमाम नेताओं से व्हाट्सऐप जासूसी मामले में जानकारी ली जाएगी. गृह मंत्रालय के मामलों की स्थाई संसदीय समिति की अध्यक्षता करने वाले कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि व्हाट्सऐप जासूसी मामले में 15 नवंबर को बैठक होगी. जिसमें इस मामले पर विचार किया जाएगा.

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वहीं सूचना एवं प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति के अध्यक्ष शशि थरूर ने कहा कि साइबर सिक्योरिटी एक बड़ा मुद्दा है और इसपर समिति सरकार से स्पष्टीकरण मांगेगी. थरूर ने कहा कि हमें किसी भी कीमत पर चीन की तरह निगरानी करने वाला देश नहीं बनना चाहिए.

शशि थरूर ने कहा कि साइबर सिक्योरिटी जरूरी है. उन्होंने कहा, हम जानकारी मांगेंगे कि सरकार इसे रोकने के लिए क्या कर सकती है. आनंद शर्मा ने कहा कि गृह सचिव को समिति की अगली बैठक में जम्मू-कश्मीर की स्थिति की जानकारी देनी है. इस बैठक में गृह सचिव से बात करेंगे और जानकारी मांगेंगे.

क्या है व्हाट्सएप से जासूसी का मामला?

बता दें कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म व्हाट्सऐप ने इस बात की पुष्टि की थी कि से भारतीय मानवाधिकार कार्यकर्ता और पत्रकारों को स्पाइवेयर द्वारा टारगेट कर उनकी जासूसी की गई. जब यह मामला सामने आया तो विपक्ष ने एक बार फिर मोदी सरकार को निशाने पर लिया. वहीं गृह मंत्रालय ने कहा था कि यह सिर्फ सरकार को बदनाम करने के लिए किया जा रहा है.

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सोनिया गांधी ने साधा था निशाना

कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केस में केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि नरेंद्र मोदी सरकार ने इजरायल के सॉफ्टवेयर पेगासस से सबकी जासूसी करवाई है. सोनिया ने कहा कि ऐसा करवाना न सिर्फ असंवैधानिक है बल्कि शर्मनाक भी है.

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