कैसे हुआ विशाखापट्टनम गैस लीक हादसा? शुरुआती जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

विशाखापट्टनम गैस लीक हादसे की शुरुआती जांच रिपोर्ट में पता चला कि गैस वॉल्व में दिक्कत के कारण हादसा हुआ. गुरुवार सुबह 2.30 बजे गैस वॉल्व खराब हो गया और जहरीली गैस लीक कर गई.

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विशाखापट्टन गैस लीक के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन जारी विशाखापट्टन गैस लीक के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

राजीव दुबे

  • हैदराबाद,
  • 07 मई 2020,
  • अपडेटेड 5:04 PM IST

  • गैस लीक हादसे में 10 लोगों की मौत
  • 300 से अधिक लोगों की हालत गंभीर

विशाखापट्टनम गैस लीक हादसे में मरने वालों आंकड़ा बढ़कर 10 हो गया है. शुरुआती जांच रिपोर्ट में पता चला कि गैस वॉल्व में दिक्कत के कारण हादसा हुआ. गुरुवार सुबह 2.30 बजे गैस वॉल्व खराब हो गया और जहरीली गैस लीक कर गई. फिलहाल, यह शुरुआती जांच रिपोर्ट है. अभी अधिकारियों की पूरी टीम मामले की जांच करेगी.

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मामले की प्रारंभिक जांच कर रहे एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक, अभी तक पता चलता है कि गैस के लिए वॉल्व नियंत्रण को ठीक से संभाला नहीं गया था और वे फट गए, जिससे रिसाव हुआ. इसके साथ ही फैक्ट्री के आसपास के इलाकों के स्थानीय ग्रामीणों ने फैक्ट्री का कोई सायरन नहीं सुना. इस वजह से हादसे की चपेट में अधिक लोग आ गए.

क्या कहना है एलजी पॉलिमर्स का?

विशाखापट्टनम में अपने संयंत्र में एक बड़े गैस रिसाव के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में एलजी केम ने कहा है कि गैस रिसाव की स्थिति अब नियंत्रण में है और पीड़ितों को शीघ्र उपचार प्रदान करने के सभी तरीके अपनाए जा रहे हैं. कंपनी ने कहा कि हम मामले की जांच कर रहे हैं ताकि रिसाव और मौतों का सटीक कारण पता चल सके.

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गौरतलब है कि विशाखापट्टनम में एक फैक्ट्री के प्लांट से हुए गैस रिसाव ने आज खलबली मचा दी. गैस का ऐसा रिसाव हुआ कि प्लांट के आसपास के दायरे में हड़कंप मच गया. दम घुटने से लोगों में अफरातफरी मच गई. सड़कों पर लोग बेहोश होकर गिरने लगे. गैस कांड में अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है. करीब 316 लोग अस्पतालों में भर्ती हैं.

बताया जाता है कि हादसे के वक्त प्लांट में करीब दो हजार लोग मौजूद थे. गैस से जब सांस उखड़ने लगी तो बदहवाशी में लोग भागने लगे. इस कोशिश में कुछ लोग पास के नाले में भी गिर गए, तो कई लोग सड़कों पर बेहोश हो गए. इस वजह से राहतकर्मियों को पहुंचने में मुश्किलें पेश आईं.

जहरीली गैस का सबसे ज्यादा असर बच्चों और बुजुर्गों पर देखा गया. आसपास के अस्पताल गैस से बीमार हुए लोगों से भरे परे हैं. गैस का असर करीब तीन किलोमीटर के दायरे में देखा गया. इसका असर ऐसा था कि आसपास के इलाके के कई मवेशी भी बेहोश हो गए. इस पर सुबह 10 बजे से पहले ही काबू कर लिया गया, लेकिन रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है.

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