वायरल टेस्ट: कांग्रेस ने कर्नाटक में चर्च के साथ मिलकर हिंदुओं को बांटने की साजिश की?

चिट्ठी के मुताबिक कैथोलिक चर्च और कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार ने लिंगायत को अलग अल्पसंख्यक धर्म बनाने के लिए गुपचुप ढंग से मिलकर काम किया. चिट्ठी में एक कथित रोडमैप का दावा भी किया गया है जिसके मुताबिक लिंगायत समुदाय को पहले हिन्दुओं से अलग करना और फिर उनका कैथोलिक ईसाई के रूप में धर्म परिवर्तन कराना था.

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राहुल गांधी (फाइल फोटो) राहुल गांधी (फाइल फोटो)

अजीत तिवारी / खुशदीप सहगल / बालकृष्ण

  • नई दिल्ली,
  • 10 मई 2018,
  • अपडेटेड 10:41 PM IST

कर्नाटक में चुनाव प्रचार खत्म होने के साथ ही अब वोटरों के पास शुक्रवार को पूरे दिन का वक्त है कि वे शांति के साथ मन बना सकें कि 12 मई को किस उम्मीदवार को वोट देना है. प्रचार बेशक खत्म हो गया लेकिन सोशल मीडिया पर ऐसी कोई रोक नहीं है. सोशल मीडिया के सभी प्लेटफॉर्म पर विभिन्न पार्टियों के समर्थक चुनाव के आखिरी वक्त तक ये ‘सियासी लड़ाई’ लड़ते रहते हैं.

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कर्नाटक में मतदान को अब कुछ ही वक्त बचा है, ऐसे में सोशल मीडिया से जुड़े नेटवर्क्स पर एक सनसनीखेज चिट्ठी फैल रही है. वॉट्सअप ग्रुप में भी इसे सर्कुलेट किया जा रहा है. चिट्ठी में जो लिखा गया है वो सांप्रदायिक आधार पर बहुत उकसाने वाला है.

चिट्ठी के मुताबिक कैथोलिक चर्च और कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार ने लिंगायत को अलग अल्पसंख्यक धर्म बनाने के लिए गुपचुप ढंग से मिलकर काम किया. चिट्ठी में एक कथित रोडमैप का दावा भी किया गया है जिसके मुताबिक लिंगायत समुदाय को पहले हिंदुओं से अलग करना और फिर उनका कैथोलिक ईसाई के रूप में धर्म परिवर्तन कराना था.

चिट्ठी पर 23 मार्च 2018 की तारीख दर्ज है. इसे कैथोलिक बिशप कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (CBCI) के अध्यक्ष हिज़ ऐमिनेंस ओसवाल्ड कार्डिनल ग्रेसियस की ओर से लिखा गया बताया गया है. चिट्ठी को आर्कबिशप बंगलौर डॉ बर्नार्ड मोरास के नाम भेजना दिखाया गया है.

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चिट्ठी के मुताबिक '21 दिसंबर 2013 को दिल्ली से 'होली सी' के प्रतिनिधियों ने कर्नाटक के सत्तारूढ़ नेतृत्व से पहली बार मुलाकात की और लिंगायत को अलग धर्म का दर्जा देने की मांग को लेकर दबाव डाला. इसके बाद 'होली सी' के प्रतिनिधियों और कर्नाटक सरकार के कर्ताधर्ताओं के बीच इसी मुद्दे को लेकर कई बैठकें हुईं.' बता दें कि 'होली सी' का संबोधन पोप के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

चिट्ठी में ये भी कहा गया है, 'कर्नाटक में आत्माओं की समृद्ध फसल के लिए हमें कड़ी मेहनत करनी चाहिए.' चिट्ठी में आगे कहा गया है, 'लिंगायत में पैठ बनाने के लिए हम लिंगायत आस्था की खूब प्रशंसा कर सकते हैं लेकिन कैथोलिक को ये कभी नहीं भूलना चाहिए कि किसी भी आध्यात्मिक मापदंड के मुताबिक लिंगायत कैथोलिक आस्था के बराबर नहीं हो सकते और मोक्ष सिर्फ कैथोलिक होने से ही मिल सकता है.'

ईमेल की शक्ल में इस चिट्ठी को फेसबुक और ट्विटर पर दक्षिणपंथ की ओर झुकाव रखने वाले कई लोगों ने पोस्ट किया है. इनमें स्वामी निश्चलानंद भी शामिल हैं. फिर इन पोस्ट पर कई लोगों को प्रतिक्रिया में गुस्से का इजहार भी करते देखा जा सकता है. ये कहते भी कि कैथोलिक चर्च की ओर से ये हिंदुओं को बांटने और फिर उन्हें ईसाई धर्म में परिवर्तित कराने की साजिश है. चिट्ठी को इस तरह ड्राफ्ट किया गया है कि वो कैथोलिक बिशप कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया के दो अहम पदाधिकारियों के बीच वास्तविक संवाद की तरह दिखे. लेकिन चिट्ठी के सावधानी से निरीक्षण से साफ हो जाता है कि ये कोई लीक चिट्ठी नहीं बल्कि फर्जी चिट्ठी है जिसे कर्नाटक चुनाव की पूर्वसंध्या पर मतदाताओं का ध्रुवीकरण कर चुनावी फायदा उठाने के मंसूबे से सर्कुलेट किया जा रहा है.

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चिट्ठी को लेकर कई ऐसे साक्ष्य हैं जो इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं. मसलन-

1. चिट्ठी हिज़ एमिनेंस ओसवाल्ड कार्डिनल ग्रेसियस की ओर से लिखा गया बताया गया है जो CBCI के अध्यक्ष हैं. लेकिन चिट्ठी को जिस ईमेल से भेजा गया दिखाया है वो secretarygeneral@cbci.in  है जो कि CBCI के सेक्रेटरी जनरल का ईमेल है. ऐसा कोई कारण नहीं है कि अध्यक्ष को सेक्रेटरी जनरल का ईमेल का इस्तेमाल करना पड़े वो भी ऐसे महत्वपूर्ण आधिकारिक संवाद के लिए.  

2. आम तौर पर इस तरह की चिट्ठियां आधिकारिक लेटर पैड पर लिखी जाती हैं और उनके नीचे भेजने वाले के दस्तखत भी होते हैं और उन्हें ईमेल के साथ अटैचमेंट के तौर पर भेजा जाता है. उपरोक्त कथित चिट्ठी में ये तीनों ही चीज़ें नहीं हैं.

3. उपरोक्त ईमेल का फॉर्मेट उन ईमेल्स से अलग है जो इस ईमेल आईडी से भेजी जाती हैं. पुष्टि के लिए हमने CBCI के सेक्रेटरी जनरल थियोडोर मैस्करेनहास से संपर्क किया तो उनके इसी ईमेल से कुछ फॉरवर्ड होकर ईमेल आए. उनका फॉर्मेट फर्जी चिट्ठी के फॉर्मेट से अलग था.

फर्जी चिट्ठी का फॉर्मेट था-

 “ Date: 2018-03-23” 10.30 GMT+0530”

जबकि ओरिजनल मेल से आए मेल का फॉर्मेट इस तरह था.

 “ Sent: Tuesday, February 13, 2018 5:19 PM”.

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4. फर्जी चिट्ठी में अंग्रेजी वर्तनी की कई गलतियां हैं. ऐसी संभावना बहुत कम है कि Catholic Bishops’ Conference of India   के अध्यक्ष की आधिकारिक चिट्ठी में संगठन को ही ठीक से ना लिखा जाए. फर्जी चिट्ठी में apostrophe (') का इस्तेमाल गलत जगह किया गया है. इसे Bishop’s  लिखा गया है. (जबकि ये Bishops’ होना चाहिए था)

5. फर्जी चिट्ठी में और भी कई गलतिया हैं. जैसे कि- press urge them ( सही इस्तेमाल नहीं), rip rich harvest (सही है reap rich harvest),  persue (जबकि सही persuade होना चाहिए). चिट्ठी में आर्टिकल ‘The’ भी कई जगह नदारद है. चिट्ठी के शुरू में ये CBCI के अध्यक्ष की ओर से भेजी दिखाई लगती है लेकिन आखिर में सेक्रेटरी जनरल की ओर से भेजी गई चिट्ठी बताई गई है. साफ है कि जिसने भी फर्जी चिट्ठी को ड्राफ्ट किया उसे नामों को लेकर गफलत हुई.

CBCI ने ऐसी कोई लिखे जाने से इनकार किया है. साथ ही इसे फर्जी और शरारतन इरादे से लिखा बताया है. CBCI की ओर से कहा गया है- ‘इस चिट्ठी को कर्नाटक चुनाव से ठीक पहले फैलाना घटिया और शरारत भरी चाल है. जिन्होंने भी इस चिट्ठी को गढ़ा और फैलाया, हम उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई का अधिकार सुरक्षित रखते हैं. हम अपने शुभचिंतकों से आग्रह करते हैं कि जब भी ऐसी चिट्ठी आपके पास आए तो हमारे इस आधिकारिक स्पष्टीकरण से प्रतिक्रिया दर्ज कराएं. ईश्वर कर्नाटक को आशीष दे. ईश्वर हमारे प्रिय देश भारत को आशीष दे.’

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