जलीकट्टु पर सेफ गेम खेलेगी तमिलनाडु सरकार, SC में दायर की कैविएट याचिका

जलीकट्टू पर लगा तीन साल पुराना बैन हटा लिया गया था. लोगों की भावना को देखते हुए तमिलनाडु के राज्यपाल विद्यासागर राव ने शनिवार को जलीकट्टू पर अध्यादेश को मंजूरी दी थी.

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जलीकट्टु पर बैन हटने के बाद राज्य में जश्न का माहौल जलीकट्टु पर बैन हटने के बाद राज्य में जश्न का माहौल

अनुषा सोनी

  • नई दिल्ली,
  • 22 जनवरी 2017,
  • अपडेटेड 11:53 AM IST

तमिलनाडु में जल्लीकट्टू को अनुमति देने वाले अध्यादेश लागू होने के तुरंत बाद राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट याचिका दायर कर दी है. राज्य सरकार की ओर से ये कदम जल्लीकट्टु को चुनौती देने वाली किसी भी याचिका से बचने के लिए उठाया गया है. अगर अब कोई सुप्रीम कोर्ट में अध्यादेश के खिलाफ याचिका दायर करता है तो पहले राज्य सरकार का पक्ष सुना जाएगा उसी के बाद ही कोई फैसला लिया सकता है.

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इससे पहले पर लगा तीन साल पुराना बैन हटा लिया गया था. लोगों की भावना को देखते हुए तमिलनाडु के राज्यपाल विद्यासागर राव ने शनिवार को जलीकट्टू पर अध्यादेश को मंजूरी दी थी.

तमिलानाडु में जलीकट्टु पर बैन हटने के बाद जश्न का माहौल है और राज्य के कई इलाकों में जलीकट्टू का खेल शुरु भी हो चुका है. कई जगह आयोजन की तैयारियां की जा रहीं हैं. राज्य के मुख्यमंत्री ओ. खुद रविवार जलीकट्टू आयोजन में हिस्सा लेंगे साथ ही तमिलनाडु के अन्य मंत्री अपने-अपने जिलों के आयोजनों में भाग लेगें.

अध्यादेश आने के बाद सीएम ओ. पन्नीरसेल्वम ने कहा है कि अध्यादेश 6 महीने तक जारी रहेगा और आगामी विधानसभा सत्र में जलीकट्टू के बेरोकटोक आयोजन के लिए नया कानून भी बनाया जाएगा.

जलीकट्टू के आयोजन के पक्ष में अध्यादेश को मंजूरी देने के उद्देश्य से ही तमिलनाडु का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे महाराष्ट्र के राज्यपाल सीएच विद्यासागर राव शनिवार को चेन्नई पहुंचे थे. गौरतलब है जलीकट्टू के आयोजन के पक्ष में चेन्नई के मरीना बीच पर हजारों की तादाद में प्रदर्शनकारी लगातार पांच दिनों से डटे हुए थे. इसके अलावा जल्लीकट्टू के समर्थन में कई बड़ी हस्तियों ने भी एकजुटता दिखाई. इनमें दिग्गज फिल्म एक्टर रजनीकांत, एक्ट्रेस नयनतारा और एक्ट्रेस तृषा आदि शामिल हैं.

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सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में जल्लीकट्टू पर प्रतिबंध लगा दिया था. इसके बाद पिछले साल केंद्र सरकार ने अध्यादेश जारी कर इस पारंपरिक खेल को इजाजत दे दी थी, लेकिन सरकार के इस अध्यादेश को फिर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, जिस पर अंतिम फैसला आना बाकी है.

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