सुप्रीम कोर्ट ने किसान आत्महत्या मामले में तमिलनाडु को फटकारा

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में किसानों की आत्महत्या को लेकर राज्य सरकार को फटकार लगाई है. कोर्ट ने कहा कि किसानों की हालत वाकई बेहद चिंताजनक है और राज्य सरकार इस मानवीय त्रासदी पर शांत नही बैठ सकती. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे स्थितियों में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह अपने नागरिकों का ख्याल रखे.

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अहमद अजीम

  • नई दिल्ली,
  • 13 अप्रैल 2017,
  • अपडेटेड 5:26 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में किसानों की आत्महत्या को लेकर राज्य सरकार को फटकार लगाई है. कोर्ट ने कहा कि किसानों की हालत वाकई बेहद चिंताजनक है और राज्य सरकार इस मानवीय त्रासदी पर शांत नही बैठ सकती. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे स्थितियों में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह अपने नागरिकों का ख्याल रखे. कोर्ट ने को नोटिस जारी कर दो हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है. इसके साथ ही कोर्ट ने हिदायत दी है कि राज्य सरकार इस याचिका के जवाब में गम्भीरता दिखाएं और इसे किन्हीं दूसरी सामान्य याचिकाओं की तरह न ले.

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कोर्ट ने नियुक्त किया एमिकस क्यूरी
कोर्ट ने इस मामले में गोपाल शंकरनारायण को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है. याचिकाकर्ता द्वारा तमिलनाडु सेंट्रल पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन की ओर से दायर याचिका में तमिलनाडु के साथ से भी जवाब मांगे जाने की मांग की गई थी. हालांकि कोर्ट ने फिलहाल केन्द्र सरकार को नोटिस जारी करने से इंकार करते हुए कहा कि वो पहले राज्य सरकार की ओर से उठाये गए कदमों के बारे में जानकारी चाहता है.

महीने भर से किसान दिल्ली में धरनारत हैं
गौरतलब है कि तमिलनाडु के किसान लगभग 1 माह से दिल्ली के जंतरमंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं. कभी वे नरमुंड पहन कर अपनी व्यथा जगजाहिर कर रहे हैं. तो कभी चूहे और सांप खाते हुए दिख रहे हैं. इतना ही नहीं उन्होंने सरकार के सामने अपनी व्यथा दिखाने के क्रम में सड़क पर दाल-चावल सानकर खाने का काम करने के अलावा राजधानी की सड़कों पर नग्न होकर भी प्रदर्शन किया. शायद यही वजह है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को फटकार लगाई है और अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन की बात कही है.

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