नेशनल हेराल्ड केस: जब कोर्ट में सुब्रमण्यम स्वामी ने हिंदी में जवाब देने से किया इनकार

अदालत में वकील आरएस चीमा लगातार सुब्रमण्यम स्वामी से अंग्रेजी में सवाल कर रहे थे और स्वामी भी जवाब दे रहे थे. तभी वकील ने हिंदी में सवाल पूछ लिया, इसपर स्वामी ने कहा कि वो हिंदी में जवाब नहीं देंगे, क्योंकि वह तमिल हैं और कोर्ट की भाषा अंग्रेजी है.

Advertisement
सुब्रमण्यम स्वामी सुब्रमण्यम स्वामी

पूनम शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 30 अगस्त 2019,
  • अपडेटेड 2:46 PM IST

  • नेशनल हेराल्ड केस में शुक्रवार को हुई सुनवाई
  • स्वामी का राहुल-सोनिया के वकील ने किया क्रॉस एग्जामिनेशन
  • स्वामी ने हिंदी में जवाब देने से किया इनकार

दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट में शुक्रवार को नेशनल हेराल्ड केस की सुनवाई हुई. इस दौरान भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी से अदालत में वकील ने क्रॉस एग्ज़ामिनेशन किया. राहुल गांधी और सोनिया गांधी की तरफ से कोर्ट में पेश हुए वकील आरएस चीमा ने स्वामी से तीखे सवाल पूछे, इसी बीच एक दिलचस्प वाकया हुआ. जब सुब्रमण्यम स्वामी ने वकील से कहा कि वह सवालों का जवाब हिंदी में नहीं देंगे, सिर्फ इंग्लिश में ही जवाब देंगे.

Advertisement

दरअसल, हुआ कुछ यूं कि अदालत में वकील आरएस चीमा लगातार सुब्रमण्यम स्वामी से अंग्रेजी में सवाल कर रहे थे और स्वामी भी जवाब दे रहे थे. तभी वकील ने हिंदी में सवाल पूछ लिया, इसपर स्वामी ने कहा कि वो हिंदी में जवाब नहीं देंगे, क्योंकि वह तमिल हैं और कोर्ट की भाषा अंग्रेजी है. भाषा को लेकर वकील और सुब्रमण्यम स्वामी के बीच हुई इस बहस पर कोर्ट में बैठे लोगों ने भी ठहाके लगाए.

‘आजतक’ ने जब स्वामी से कोर्ट रूम के बाहर हिंदी ना बोलने का कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि जब सारे सवाल अंग्रेजी में ही थे तो सिर्फ एक सवाल हिंदी में क्यों पूछा गया. मुझे संस्कृत आती है और चीमा को उर्दू. ऐसे में अंग्रेजी ही वह भाषा है जिसमें हम दोनों ज्यादा बेहतर संवाद स्थापित कर सकते थे. उसके बाद कोर्ट रूम में सारे सवाल और जवाब  अंग्रेजी भाषा में ही हुए.

Advertisement

शुक्रवार को नेशनल हेराल्ड मामले की सुनवाई करीब ढाई घंटे तक हुई, इस दौरान वकील ने सुब्रमण्यम स्वामी से कई सवाल किए. अब इस मामले की अगली सुनवाई 28 और 30 सितंबर को होगी.

हालांकि, ये तारीख भी इतनी आसानी से तय नहीं हुई, क्योंकि तारीख को लेकर भी अदालत में नोकझोंक हुई. क्योंकि जिस तारीख को वकील की तरफ से मांगा गया, उसपर स्वामी ने आपत्ति जता दी और स्वामी की तारीख पर वकील को आपत्ति थी. जिसके बाद सितंबर आखिरी की तारीख को तय किया गया है.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »